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बायतु,शहीद प्रेम चौधरी की पार्थिक देह कुछ देर बाद शहर गांव पहुंगी

बाड़मेर/बायतु। उपखंड का एक गांव है शहर। है गांव किंतु नाम शहर। यह नाम न जाने क्यों पङा होगा? कल के बाद यह शहर गांव हर व्यक्ति की जुबां पर है।...

बाड़मेर/बायतु। उपखंड का एक गांव है शहर। है गांव किंतु नाम शहर। यह नाम न जाने क्यों पङा होगा? कल के बाद यह शहर गांव हर व्यक्ति की जुबां पर है। इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया और माउथ मीडिया सब जगह चर्चा हो रही है। लेकिन गांव में एक अजीब सा माहौल है। खामोश चर्चायें। इससे भी अधिक खामोशी है गांव के रतेऊ रोङ स्थित कुम्भाराम के घर में। सबकी निगाहें एक बार कुम्भाराम के घर की तरफ जाती है दूसरी बार किसी गाङी की आवाज पर रोङ की तरफ।

हर कोई शख्स गमजदा है किंतु उसकी बहादुरी व मिलनसारिता की चर्चा कर रहा है। दरअसल धोरों की धरा का धोरी (नायक) कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में शहीद हो गया। उसने इसलिये प्राण गंवाये कि भारत माता का आंचल पाक के नापाक इरादों से नापाक न हो जाये और मेरे भाई बहन (भारतवासी) सुख की नींद सो सके। शहर गांव के रेतीले धोरों में 50-52 डिग्री तापमान में पला-बढा यह शख्स कश्मीर की वादियों का -10 डिग्री तापमान  सहकर भी कभी विचलित नहीं हुआ। 
  कहा भी जाता है कि य़हां की रेत और यहां के लोगों का मिजाज एक जैसा है। रेत जब तक ठंडी रहती है तब तक हिलोरों देकर सुलाती है, उस नींद के सामने डनलप के गद्दों का आंनद भी पानी भरता नजर आता है और रेत जब गरम हो जाती है तो अपने ऊपर से चींटी तक को नहीं गुजरने देती है। वैसे ही यहां का आदमी भी मित्र के लिये सुख की सेज और दुश्मन के लिये महाकाल। यही कर दिखाया इस पावन माटी के ओरिजनल बेटे प्रेम सारण ने। 
  आंतकवादियों मुठभेङ में देश के लिये प्राण न्यौछावर कर एक मिसाल कायम कर दी। 
  R R regiment के जाबांज सिपाही शहीद प्रेम सारण का पार्थिव शव आज सुबह 10 बजे उनके पैतृक गांव शहर ले जाया जायेगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जायेगी। 
इस शहादत का एक दूसरा पहलू भी है। हालांकि उसके परिवार को उसकी शहादत पर गर्व तो है किंतु आंतरिक मन पर क्या गुजरती होगाी, कल्पना मात्र से ही सिहरन सी उठती है। नौ माह तक अपने उदर में समेटे रखने वाली मां, अंगुली पकङकर चलना सिखाने वाले पिताजी, साथ में खेलने वाला भाई राखी बांधने वाली बहन  और मात्र एक साल का सुहाग व सेज का आंनद ले पाने वाली जोङायत पर आज क्या बीत रही होगी? 

वीर प्रेम सारण की शहादत को नमन, बार-बार वंदन।

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