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काजू-बादाम से महंगे मारवाड़ के कैर-सांगरी

रिपोर्टर @ गणेश जैन   जैसलमेर/फलसूण्ड। पिज्जा, बर्गर, मैकरोनी, नूडल्स खाने वाले क्या जानें कैर, सांगरी व कुम्मट का स्वाद। पहले गिनाए फास्ट ...

रिपोर्टर @ गणेश जैन  
जैसलमेर/फलसूण्ड। पिज्जा, बर्गर, मैकरोनी, नूडल्स खाने वाले क्या जानें कैर, सांगरी व कुम्मट का स्वाद। पहले गिनाए फास्ट फूड स्वास्थ्यपद्र्धक न होते हुए भी युवाओं की पसंद बने हुए हैं। क्या हमने कभी सोचा है कि राजस्थानी व्यंजनों में भी अनेक फास्ट फूड हैं, जो गुणवत्ता व स्वाद की दृष्टि से किसी भी भोजन से कम नहीं हैं।

गांव से फाइव स्टार होटलों तक

गांव की झोंपड़ी से निकलकर देश के फाइव स्टार होटलों की थालियों में जगह बना चुके मारवाड़ के मेवों के नाम से मशहूर कैर, सांगरी इन दिनों काजू-बादाम से भी महंगी हो गई हैं। कैर, सांगरी व कुम्मट की सब्जी खराब नहीं होने के कारण घरों में इन्हें प्राथमिकता से बनाया जाता था। अब महंगी दरों के कारण इनका नियमित सेवन मध्यम वर्गीय परिवारों के बस की बात नहीं है। शादी समारोह या पर्वों पर ये सब्जियां आज भी शौक से बनाई जाती हैं।
महानगरों समेत विदेशों में भी मांग

कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और अन्य बड़े शहरों के साथ विदेशों में भी इन सब्जियों की खासी मांग है। कैर सांगरी की सब्जी में डाले जाने वाले काजू, पिस्ता, किसमिस और बादाम आदि के भाव इन सब्जियों से कम हैं। सावों का सीजन शुरू होने वाला है। साथ ही पर्यटकों की आवाजाही बढऩे वाली है। एेसे में कैर-सांगरी की मांग और दाम दोनों बढ़ गए हैं। विदेशों से इन सूखी सब्जियों के मंगवाने के आर्डर भी आते हैं और जैसलमैर, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, नागौर, पाली सहित अन्य जिलों से हर साल लाखो  रुपए की कैर, सांगरी, कुम्मट, सहित अन्य सूखी सब्जियां विदेशों में भेजी जाती है।
शाही सब्जी की प्रतिष्ठा

कैर, सांगरी व कुम्मट की सब्जी राजस्थान में शाही सब्जी की प्रतिष्ठा पा चुकी है। कैर नाम की एक कंटीली झाड़ी रेगिस्तानी इलाकों में बहुतायत से पाई जाती है इस पर लगे छोटे-छोटे बेरों के आकर के फल को ही कैर कहते हैं। कैर को आप चेरी ऑफ डेजर्ट भी कह सकते हैं। खेजड़ी के पेड़ पर लगने वाली हरी फलियों को ही सांगरी कहा जाता है। सांगरी को सूखे कैर व कुम्मट के साथ मिलाकर स्वादिष्ट शाही सब्जी तैयार की जाती है। कुम्मटिया भी एक पेड़ होता है, जिसकी फलियों के बीज का सब्जी के लिए उपयोग किया जाता है। पंचकूटा में सूखे कैर और सांगरी, कुम्मट, काचरा, अमचूर, सूखे मेवे डालकर सब्जी बनती है। सूखे कैर और सांगरी की सब्जी ही ताजा रहती है। हरे कैर और सांगरी की सब्जी खराब हो जाती है।

पहले गांवों में मुफ्त मिलती थी सूखी सब्जियां

सीजन के दिनों में पेड़ों पर लगने वाली इन सूखी सब्जियों से ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता है। बच्चे और महिलाएं कैर सांगरी को एकत्र कर बाजार में पहुंचाते हैं। इससे उन्हें रोजाना 500 से 1000 रुपए तक की आमदनी हो जाती है। इन दिनों कैर व सांगरी की मांग बनी हुई है। जो कैर सांगरी कभी गांवों में मुफ्त में मिल जाती थी। अब बाजार में बिकने के लिए लाई जाती है। अचार बनाने के लिए कैर की मांग बढ़ जाती हैं और सांगरी को कच्ची तोड़कर सूखाने पर सब्जी के काम आती है।

रक्त शोधक व उदर रोगों में लाभकारी

डॉ. महावीर गोदरा बताते हैं कि ठंडी तासीर व कषायरस गुण होने से कैर-सांगरी अच्छे रक्त शोधक है। बदहजमी, एसीडीटी, दस्त, कब्ज, गैस सहित उदर की सभी बीमारियों में लाभदायी हैं। ये सब्जियां साल भर रखनी हो तो इन्हें काम में लेने से पहले उबालना चाहिए। शोधन के लिए किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

दुकानदार  चम्पालाल सालेच ने बताया कि भाव

सूखी सब्जियों के भाव -रुपए प्रति किलो

सांगरी 900-1200

कैर 800-1000

पतली ग्वार फळी 500-700

काचरा 200-350

कुम्मट 100

गूंदा 300

अमचूर 300

सामान्य सूखे मेवों के भाव-रुपए प्रति किलो

बादाम 600-800

काजू 400-600

किशमिश 200-300


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