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(बाल दिवस विशेष)"चलो नन्द घर" की मीठी मनुहार के साथ मनेगा बाल दिवस

बाड़मेर। जिले की पचास गाँव-ढाणियों में स्वरुप ले चुके आंगनवाड़ी के डिजिटल अवतार नन्द घर में सोमवार को बाल दिवस एक अनूठे अंदाज़ में मनाया जाएगा।...

बाड़मेर। जिले की पचास गाँव-ढाणियों में स्वरुप ले चुके आंगनवाड़ी के डिजिटल अवतार नन्द घर में सोमवार को बाल दिवस एक अनूठे अंदाज़ में मनाया जाएगा। इस दिन ग्राम रैली और बाल उत्सव के ज़रिए बच्चे सभी ग्रामीणों को अपने दूसरे घर यानि नन्द घर आने के लिए आमंत्रित करेंगे।

चार हज़ार उन्नत आंगनवाड़ियों यानी नन्द घर को देश के ग्यारह राज्यों में निर्मित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत पचास आंगनवाड़ियां बाड़मेर की सूदूर ढाणियों में बन कर तैयार हो चुकी हैं। कच्चे पक्के मकानों और झोपड़ियों के बीच रंग बिरंगे नगीने की तरह दमकते 'नन्द घर' ग्रामीणों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं।  
बाल दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले कार्यक्रमों को ले कर बच्चों, आशा सहयोगिनियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ साथ बायतु महाविद्यालय की उन छात्राओं का उत्साह देखते बनता है जो इस प्रोजेक्ट में स्वयंसेविका के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  
देश में अपनी तरह की पहली साझेदारी के रूप में महिला-बाल विकास मंत्रालय और वेदान्ता  की ओर से  देश भर में ऐसे मॉडल आंगनवाड़ी अगले दो साल में आरम्भ किए जायेंगे। भौतिक सुख सुविधाओं से कोसों दूर सूदूर गाँवों के लिए बड़े शहरों के प्ले स्कूल जैसे 'नन्द घर' आंगनवाड़ी के अच्छे दिनों की तरफ पहला कदम साबित होंगे।  
भारत सरकार द्वारा एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत स्थापित एक सेवा वितरण इकाई के रूप में नन्द घर मौजूदा आंगनवाड़ी का ही आधुनिक विस्तार है । नन्द घर अनूठी निर्माण प्रौद्योगिकी का उपयोग करेगा और सौर पैनलों के माध्यम से बिजली, एक प्रेरक माहौल में ई-लर्निंग, स्वच्छ पीने के पानी आरओ के माध्यम से और मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य लाभ से बच्चों और महिलाओं को जोड़ेगा।
नन्द घर बच्चों के लिए सुबह शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्र के रूप में चलाने के लिए और दोपहरी बाद व्यावसायिक कौशल के क्षेत्र में महिलाओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे हैं। यह एक बदलाव लाने वाला कदम है जिससे देश में बच्चों के कुपोषण उन्मूलन और महिला उद्यमियों को तैयार करने का कार्य किया जाएगा। एक अनुमान के अनुसार 25 लाख बच्चों और महिलाओं को हर साल इस परियोजना के माध्यम से लाभ होगा।

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