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प्राचीन काल में नारी को थी देवी की उपाधी-हरीश कुमार

रिपोर्टर @ प्रकाश राठौड़ -विधिक शिविर में उमडे सैकड़ों ग्रामवासी जालोर/मालवाड़ा। प्राचीन काल में नारी को देवी की उपाधी दी गई। इसके बाद मुगल...

रिपोर्टर @ प्रकाश राठौड़
-विधिक शिविर में उमडे सैकड़ों ग्रामवासी
जालोर/मालवाड़ा। प्राचीन काल में नारी को देवी की उपाधी दी गई। इसके बाद मुगलकाल व अंग्रेजों के शासन के बाद कई कुरितिया एवं कुप्रथाओं ने जन्म लिया। उक्त विचार मालवाड़ा नगर के होली चौक पर तालुका विधिक सेवा समिति की ओर से आयोजित विधिक सेवा शिविर के अध्यक्ष न्यायिक मजिस्ट्रेट हरीश कुमार ने शिविर सभा में महिला के विरूद्ध अपराध एवं उससे संबंधित कानून एवं बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं अभियान विषय पर कार्यक्रम में व्यक्त किये।
उन्होंने महिलाओं के विरूद्ध अपराधों में दहेज हत्या, कन्या भू्रण हत्या, छेड़छाड, दुष्क्रम क्रुरता सहित अनेकों अपराध प्रमुख है। इनके संबंधित कानून पीसी, पीएनडीटी एक्ट भारतीय दण्ड़ संहिता के प्रावधानों, बाल विवाह प्रतिषेद अधिनियम यौन अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, 125 दण्ड़ प्रक्रिया, संहिता के प्रावधानों, हिन्दू उतरा अधिकार अधिनियम में पुत्रियां के सम्पति संबंधित अधिकार में हुये महत्वपूर्ण संषोधन की जानकारी दी। न्यायिक मजिस्ट्रेट हरीश कुमार ने निर्भया प्रकरण के पश्चात अपराधिक कानूनों में कठोरता संबंधित प्रमुख प्रावधान बताते हुये बेटी बचाओं, बेटी पढाओं अभियान की विस्तार से जानकारी दी।
इस मौके पर पुलिस उप अधीक्षक, हीरालाल रजक ने कहा कि महिलाओं में सहनशीलता होती है। इसका मतलब यह नही कि उन पर अत्याचार करते रहे, यदि महिला पर किसी भी प्रकार का अत्याचार या उन्हें नाप्रसन्द हरकते की जाती है, तो महिला की सूचना शिकायत पर अपराधी पर कानूनी कठौर कार्यवाही अमल में लाई जा सकती है। समाज में महिलाओं का बहुत बड़ा महत्वपूर्ण योगदान करता रहता है, उन्हें सम्मान देकर आगे बढाने में सहभागीता निभाने का आग्रह किया। तहसीलदार सुरेन्द्र पी पाटीदार ने जनसमूह को संबोधित करते हुये कहा कि अब महिलाओं को अपने आप को कम नही समझना चाहिये, हर क्षैत्र में महिलाओं की अग्रिम भूमिका रहती है। सरकार ने भी इनके हित में कानून बनाकर अपराधियों में भय पैदा कर महिलाओं संभल प्रदान किया है। उन्होंने महिलाओं से निडरता से आगे बढने का आह्वान किया। शिव सांई समिति के अध्यक्ष एवं विधिक चेतना समिति के सदस्य मुकेश कुमार खण्डेलवाल ने विधिक सेवा शिविर का उद्देष्यों को समझाते हुये उस पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिविर में सहायक पुलिस निरीक्षक विरेन्द्रसिंह नरूका, प्रधानाचार्य बनवारीलाल मीना, हंजारीराम, हरेश कुमार, जीवाराम, छैलगिरी गोस्वामी, प्रदीपसिंह देवल, प्रतापाराम पुरोहित, कासम छीपा, लक्ष्मण सैन, श्रीमती सीमा गुप्ता, मदनसिंह देवल, प्रकाश मेघवाल, गोविन्द भाट, किस्तुर पाउआ, धुनाराम राणा, मुस्ताक नागौरी, चन्दुलाल राणा, मफाराम हीरागर, श्रीमति शशिप्रिया गुप्ता, भूमिकाकुमारी, प्रियंका, मोनिका, प्राची, सेजल, मिताली, प्रेरणा, चन्द्रीका, एकता सहित कई महिलायें व बालिकायें उपस्थित थी। शिविर में विधिक चेतना अभियान के फोल्डर का विमोचन न्यायिक मजिस्ट्रेट व अतिथियों की उपस्थिति में बालिकाओं से करवाया गया।

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