Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

मालवाड़ा,पाॅलीथिन पर पाबंदी है फिर भी खुले आम पाॅलीथिन का उपयोग

रिपोर्टर @ प्रकाश राठौड़ जालोर/मालवाड़ा। कस्बे समेत आस पास के गांवो में अंधाधंुन हो रहे पाॅलीथिन के उपयोग पर राज्य सरकार की ओर लगाई गई पाबंदी...

रिपोर्टर @ प्रकाश राठौड़
जालोर/मालवाड़ा। कस्बे समेत आस पास के गांवो में अंधाधंुन हो रहे पाॅलीथिन के उपयोग पर राज्य सरकार की ओर लगाई गई पाबंदी बेअसर होती नजर आ रही है। राज्य सरकार के आदेश के बाद कुछ दिन के लिए पाॅलीथिन का उपयोग करने वाले से भय प्राप्त था लेकिन प्रशासन के उदासीन रवैये से कस्बे सहित क्षैत्र के ग्रामीण इलाको के गंावो में बेहीचक पाॅलीथिन का उपयोग के बाद इधर-उधर डालने से पर्यावरण भी दूषित हो रहा हैै।

साथ में गौवंश के लिए भी घातक साबित हों रहा है। क्षैत्र में पाॅलीथिन प्रयोग पर अंकुश लगाने के लिए कभी कभार प्रशासन कि ओर से कोई कार्यवाही की जाती है, जिसमें पालीथिन सब्जी मार्केट, मिठाई की दुकान, नास्ते की होटलो, चाय की थडियों एवं किराणा के व्यापारी का उपयोग कर रहै है। प्रशासन कि आंखांें के आगे पाॅलीथिन खुलेआम धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। राज्य सरकार ने एक सितंबर, 2010 से पाॅलीथिन उपयोग करने वालो के खिलाफ सख्त कार्रवाही कर जुर्माना वसूलने के निर्देश दे रखे है, लेकिन आज भी थोक विक्रता व छोटे व्यापारी प्रतिबंधित पाॅलीथिन की थैलियां ग्राहकों को दे रहे है। व्यापारियांे के साथ ग्राहक भी फैशन से अपने साथ कपड़े की थैली ना लाकर पाॅलीथिन की थैलियां लेकर ही बाजार में खरीददारी कर इसके उपयोग में सहयोग कर रहे है। क्षैत्र में लोगों द्धारा पाॅलीथिन का उपयोग कर घर के बाहर व आम रास्तों पर फैक देते है, जो मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कचरे के ढैर में पड़ी पाॅलीथिन मवेशी खाते है और काल का ग्रास बन रहै है। वहीं गंदगी से अटी पाॅलीथिन हवा के साथ खुले नालो में जाकर गिरती है तथा नालियों में अटककर अवरोध उत्पन करता है, जिससे नालियों का गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है, जिससे मच्छरो का प्रकोप बढने से डेंगू व मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियां फैलने का अदेशा बना रहता है।

कोई टिप्पणी नहीं