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शहीद प्रेमसिंह को अंतिम सलामी देने उमड़ा जन सैलाब

रिपोर्टर @ बंशीलाल चौधरी  -जाबांज शहीद प्रेम सारण का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार -बायतू के शहर गांव में छाई शोक की लहर -तीन तीन...

रिपोर्टर @ बंशीलाल चौधरी 
-जाबांज शहीद प्रेम सारण का सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
-बायतू के शहर गांव में छाई शोक की लहर
-तीन तीन पूर्व गये थे घर से शहीद होकर पार्थिव देह आई वापस
-प्रेम सारण अमर रहे के नारों से गूंजा आसमान

बाड़मेर/बायतू। उपखंड के शहर गांव में भारत मां के जयकारों के जाबांज शहीद प्रेमसिंह(26) पुत्र कुम्भाराम सारण का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना की टुकड़ी ने सलामी दी। जैसे ही तिरंगे में लिपटा हुआ शहीद प्रेमसिंह का प्रार्थिव शरीर उत्तरलाई से सडक़ मार्ग होते हुए इनके पैतृक गांव शहर पहुंचा तो यहां उपस्थित हजारों लोग अपने आंसू नही रोक पाये, रूहांसे गले से भारत माता के जयकारों के साथ, प्रेमसिंह अमर रहे-अमर रहे के नारों से गुंजायमान कर दिया।
इस दौरान कई दिग्गज नेताओं के साथ जिला प्रशासन का पूरा लवाजमा शहीद के निवास पर ही रहा। ज्ञात रहे कि 8 नवम्बर को जम्मू के नौसेरा सेक्टर में पाक गोलीबार के दौरान लौहा लेते हुए भारत के दो जवान शहीद हो गये थे, उनमें बायतू के लाल प्रेमसिंह हैं। इनका पार्थिव देह गुरुवार प्रात: उत्तरलाई हवाई अड्डे पर पहुंचा यहां पर सेना की टुकडिय़ों ने सलामी दी तथा पुष्प चक्र अर्पित किये, यहां से सेना के वाहन द्वारा पार्थिव देह पैतृत गांव शहर रवाना जहां पर 1.30 बजे शहीद के निवास पर पहुंचा। यहां पर पार्थिव देह पर पुष्पचक्रों के साथ पुष्प अर्पित करने के बाद विभिन्न परम्पराओं का निर्वहन करने के बाद 3.30 पर सेना की टुकडिय़ों की सलामी और मातमी धुन के बीच बड़े भाई लालाराम ने मुखाग्रि देकर अंतिम संस्कार किया गया।
मुझे गर्व हैं कि मेरा भाई देश के लिए शहीद हुआ: लालाराम

मुझे गर्व हैं कि मेरे भाई ने आतंक से लड़ते हुए भारत मां के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये, यह बात आंखों में आंसू लिए रूहांसे गले से बायतू उपखंड क्षेत्र से सीमा पर शहीद हुए नायक प्रेमसिंह सारण के बड़े भाई लालाराम ने कही। उन्होने बताया  कि मेरे भाई के शहीद होने की सूचना मुझे 55 आर से फोन पर सूचना मिली, मुझे सबसे बड़ा दु:ख इस बात का हैं कि दीपावली पर भाई घर आया था, पर मैं उससे मिल नही पाया। उन्होनें भारत सरकार से मांग की हैं कि पाकिस्तान आंतक का घर हैं, आंतक को खत्म करने के लिए पाक को नष्ट करना बहुत जरूरी हैं। नहीं तो मेरे भाई की तरह और भी कई भाई इसी तरह शहीद होते रहेंगे तथा बच्चों के सिर से पिता का छाया उठता रहेगा।
तीन वर्ष पूर्व हुई थी शादी

शहीद प्रेमसिंह सारण की शादी 3 वर्ष पूर्व रैना के साथ हुई थी तथा पत्नी बीएड धारी हैं तथा जोधपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
पिता के सिर से उठा दूसरे बेटे का छाया

शहीद प्रेमसिंह सारण के पिता कुंभाराम के तीन पुत्र थे उसमें से एक पुत्र 21 मई 1995 को सडक़ दुर्घटना में निधन हो गया था तथा प्रेमसिंह 8 नवम्बर को शहीद हो गये।
दो भाईयों सहित परिवार के चार सदस्य सेना में

शहीद प्रेमसिंह का बड़ा भाई लालाराम एयरफोर्स जोधपुर में कार्यरत हैं तथा चचेरे भाई मोटाराम के दो पुत्र चैनसिंह व गोरधनराम सेना में हैं।
दीपावली पर आये थे घर

शहीद प्रेमसिंह दीपावली पर 10 दिन के अवकाश पर घर आए थे तथा परिजनों के साथ बड़ी ही धूमधाम से दीपोत्सव का पर्व मनाया तथा इसके बाद 5 नवम्बर को ही घर से ड्यूटी पर गये थे, जहां पर 7 नवम्बर को इन्होने ड्यूटी ज्वाईन की तथा इसके दूसरे दिन ही 8 नवम्बर को पाक की ओर से भारतीय चौकियों पर की अंधाधूंध फायरिंग में लौहा लेते हुए शहिद हो गये।
उत्तरलाई से शहर तक जगह-जगह दी सलामी

शहीद प्रेमसिंह के पार्थिव देह ज्यों ही उनके गांव के लिए रवाना हुआ, इस दौरान बीच रास्ते में जगह-जगह सलामी दी गई तथा स्कूलों में दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

मां व पत्नी का बुरा हाल

शहीद प्रेमसिंह की पत्नी रैना को अपने पति के निधन की जानकारी सुबह ही दी गई, इसके बाद से उसका रो-रो कर बुरा हाल हैं, दूसरी ओर मां पैम्पों देवी भी अपने लाल को खोने से लगातार क्षुब्ध हैं, अपने पुत्र को खोने से उनके मुंह से कोई शब्द नही निकल रहा हैं।

बायतू विधायक ने परिजनों को ढांढ़स बंधाया

शहर गांव में शहीद प्रेमसिंह सारण के घर बायतू विधायक कैलाश चौधरी सुबह ही पहुंच गये तथा शहीद के परिजनों को लगातार ढांढस बंधा कर सात्वंना दे रहे हैं। 

ये हैं पारिवारिक स्थित

शहीद प्रेमसिंह सारण के परिवार में पिता कुंभाराम, मां पैम्पों देवी, भाई लालाराम और 3 बहिने हैं। शहीद का कच्चा घर हैं, तथा घर तक जाने के लिए पक्की सडक़ का अभाव हैं, घर में लाईट भी नही हैं।
गांव में शोक की लहर 

शहर के जाबांज के शहीद होने की खबर पूरे गांव में बुधवार को ही मिल गई थी, इसके बाद से पूरे गांव में शोक की लहर छाई हुई हैं, सुबह से ही आस-पास के ग्रामीण शही के घर पहुंचने शुरु हो गये हैं।
कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासन का लवाजमा रहा मौके पर

शहीद के निवास पर जिला कलेक्टर सुधीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक गगनदीप सिंगला, बायतू उपखंड अधिकारी हेतराम चौहान, तहसीलदार अजय चारण, गिड़ा  नायब तहसीलदार नरसिंहाराम गौड़ सहित कई प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर रहे।
कई नेता पहुंचे शहीद के घर

शहर गांव में कई वरिष्ठ नेता शहीद के घर पहुंच रहे हैं जानकारी के अनुसार बायतू विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष कैलाश चौधरी, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी, यूआईटी चैयरमैन डॉ. प्रियंका चौधरी, भाजपा जिला महामंत्री बालाराम मूंढ, कांग्रेस महासचिव रूपाराम धणदे, जैसलमेर के पूर्व जिला प्रमुख मूलाराम चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख मदन कौर, बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन,भवन निर्माण मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष करनाराम मांजू,  गोपाराम मेघवाल, आदुराम मेघवाल, गिड़ा प्रधान लक्ष्मणराम डेलू, पूर्व प्रधान सिमरथाराम पूर्व विधायक मदन प्रजापत, चैनाराम कड़वासरा, मूलाराम वैरड़, प्रहलाद धतरवाल, कुंपाराम पंवार, जसराज धतरवाल, चनणाराम वैरड़, लक्ष्मण बलियारा सहित बायतू उपखंड के सभी सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को सांत्वना देकर ढांढस बंधाया।

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