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गोडागड़ा धाम शिवदानपुरी महाराज की समाधी पर मेले का आयोजन

रिपोर्टर @ गणेश जैन  दिन भर लगी रही श्रद्वालुओ की लंबी कतारे जैसलमेर/फलसूण्ड। निकटवर्ती गोडागड़ा धाम पर शिवदानपुरी महाराज की समाधी पर ...

रिपोर्टर @ गणेश जैन 

दिन भर लगी रही श्रद्वालुओ की लंबी कतारे
जैसलमेर/फलसूण्ड। निकटवर्ती गोडागड़ा धाम पर शिवदानपुरी महाराज की समाधी पर शनिवार को मेले का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के गांवो व दूर दराज क्षेत्र से हजारो की संख्या में श्रद्वालुओ ने यहाॅ पर पहुॅच कर खुशहाली की कामना की। इस मेले का आयोजन प्रत्येक माह की शुक्ला पंचमी को किया जाता है यह मेला माघ महिना का बड़ा मेला रहता हैं। जिसमें आसपास के गांवो व दूर दराज क्षेत्रो में छतीचगढ, कर्नाटक गुजरात, जोधपुर, बाडमेंर, बायतु, बालोतरा, जैसलमेंर, शेरगढ, नाचना,धोरीमन्ना से भी भारी संख्या में यहाॅ पर श्रद्वालु पहुॅचते है।
रविवार को भरा गया मेला
रविवार को आयोजित मेले में श्रद्वालु अधिक संख्या में आए सुबह 5 बजे से लेकर शाम तक समाधी पर दर्शन के लिए भक्तो का तांता लगा रहा है। श्री शिवदानपुरी जी महाराज की जीवित समाधी पर लगे मेले हजारो श्रदालुओं ने आकर खुशहाली की प्रार्थना कर जीवित समाधि के दर्शन किये। सुबह चार बजे से ही यात्रियो की शुरूआत हो गई यहा पर हर माह की पंचमी को मेला लगता है । यहा पर लाखों लोगो के कष्ट दुर करने वाले तपो तपसवी महाराज श्री शिवदानपुरी जी की जिवित समाधी है और यह जगह गोडागड़ा धाम के नाम से जानी जाती है। इस जीवित समाधि 552 वर्ष हो गया हैं। ओर यहा श्री शिवदानपुरी ट्र्रस्ट सेवा समिति गोडागड़ा धाम पर आयोजित मेले मे पुलिस व ट्रस्ट सेवा समिति व समस्त वंशज पुजारी यहाँ यात्रियो को चाय पानी कि व्यवस्था करते हैं। इस जगह पुजारी पुजा पाठ करवाते है ओर एक भगवा धागा बांधते है यहाँ मरीज रोते हुए आते हैं और बाबा के दरबार से वापस हंसते हंसते जाते हैं। 
लकवा ग्रस्त मरीजो का होता है यहाँ उपचार 
यहाॅ पर आयोजित मेले में विशेषकर लकवा ग्रस्त मरीज आते जो यहाॅ पर तांती बांद कर ठीक होने के लिए फेरी लगाने के लिए प्रत्येक माह समाधी पर दर्शन के लिए आते है जो ठीक भी हो जाते है।

नोट बंदी का असर यहाँ भी हैं
नोटबंदी का असर बाजार से लेकर भगवान के दर तक पहुंच गया है। 500 व 1000 के नोट बंद होने के कारण जहां एक तरफ श्रद्धालुओं की आवक कम हो रही हैं तो दूसरी ओर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किया जाने वाला चढ़ावा भी घट गया है। क्षेत्र का मंदिर हो या थान, या फिर अन्य प्रमुख मंदिर। नोट बंदी के पहले तक जहां इन मंदिरों में दर्शनार्थियों की कतार लगी रहती थी। वहां अब श्रद्धालुओं की आवक 50 फीसदी से भी कम रह गई है। इसका सीधा असर दानपात्र पर हुआ है। पहले जहां श्रद्धालु एक हजार या पांच सौ का नोट चढ़ाते थे। अब दस-बीस रुपए का नोट ही दानपात्र में पहुंच रहा है। नोटों की तंगी में कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर ही काम चला रहे हैं। रोजाना यहा 200 से 300 दर्शनार्थी आते थे। लेकिन अब इनकी संख्या आधी रह गई है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यहां भारत के हर राज्य से  से आने वाले श्रद्धालु पांच सौ व हजार चढ़ाते थे। अब तो वे भी 50 से 100 रुपए ही दानपात्र में डालते हैं। जबकि स्थानीय श्रद्धालु पांच-दस रुपए या बिना कुछ चढ़ाए दर्शन कर चले जाते हैं।

चौथाई रह गई आवक
हर पांचम के शिवदान पुरी महराज के गोडागड़ा घाम  प्रसिद्ध मंदिर में तो नोटबंदी के बाद से श्रद्धालुओं की आवक चौथाई रह गई है। यहां रोजाना 5 से 7 हजार और चतुर्थी के दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं की आवक होती है। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कल्याण सिंह ने बताया कि रोजाना आने वाले श्रद्धालु 25 फीसदी ही रह गए। जबकि चतुर्थी पर लगे मेले में श्रद्धालुओं की आवक 20 से 25 हजार रह गई।

पूरा दिन पुलिस तैनात रही
ग्रामीणो ने बताया कि फलसूण्ड पुलिस ने भी अपनी तरह से हर प्रकार का सहयोग दिया गया हैं और ट्रस्टी कि और से चाय पानी कि पुरी व्यवस्ता कि गई थी और गांव के ग्रामीणों का भी सयोग रहा ग्रामीणो ने बताया कि आज सुबह 6 बजे से पुलिस स्टाप मेन चौराया पर दिन भर तैनात रहा जाम नही लगने दिया। पुलिस प्रशासन कि आज दिन तक ऐसी व्यवस्था ग्रामीणों नही देखी श्रद्धालुओं ने कतारो में खडे होकर समाधि के दर्शन किये पुलिस की ओर से शांति व्यवस्था की गई।

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