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बाड़मेर। बीजेपी के दिग्गज नेता व पुर्व विधायक तगाराम चौधरी नहीं रहे

@ ओमप्रकाश मूढ बाड़मेर/बायतु/बाटाडू। राजस्थान की राजनीती में लम्बे अरसे तक सक्रिय रहे व मारवाड़ के दिग्गज बीजेपी नेता माने जाने वाले ब...

@ ओमप्रकाश मूढ

बाड़मेर/बायतु/बाटाडू। राजस्थान की राजनीती में लम्बे अरसे तक सक्रिय रहे व मारवाड़ के दिग्गज बीजेपी नेता माने जाने वाले बाड़मेर के पुर्व विधायक तगाराम चौधरी अब नही रहे है।
तगाराम चौधरी ने आज अलसुबह साढ़े पांच बजे अंतिम सांस ली। आपको बता दे कि सांस की बिमारी को देखते हुए तगाराम चौधरी की तबियत बिगड़ने पर जोधपुर मथुरा दास अस्पताल में भर्ती करवाया गया करीब 15दिन तक वेंटिलेटर पर थे जहा उपचार के दौरान तगाराम चौधरी ने आज अलसुबह साढ़े पांच बजे अंतिम सांस ली।
उनका पार्थिव शरीर को सुबह दस बजे बायतु उपखण्ड के माडपुरा बरवाला गाँव लाया जाएगा।उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव माडपुरा बरवाला में दर्शनार्थ के लिए रखा जायेगा जहा से शाम करीब 4बजे अंतिम संस्कार होने के समाचार मिले है। चौधरी की अंतिम यात्रा में हजारो लोग शामिल होने की खबर है।
तगाराम चौधरी के बारे में बात करे तो वे बाडमेर जिले की बायतु तहसील के ग्राम माडपुरा बरवाला निवासी पढाई की पर्याप्त सुविधा न होने से आपने प्रारंभिक शिक्षा गाँव में प्राप्त की परन्तु आगे शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके।

राजनीती में प्रवेश
व्यवसाय से कृषक चौधरी 1953 में हुए पंचायत चुनाओं में प्रथम बार कवास ग्राम पंचायत के वार्ड पञ्च बनकर राजनीति की दहलीज पर पैर रखा । इस दौरान 1958 से 1961 तक उप सरपंच पद पर रहे. 1958 से 1973 तक 15 वर्षों तक माडपुरा बरवाला ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष रहे।
1961 में माडपुरा बरवाला के सरपंच चुने गए. 1963 से 1964 तक बायतु पंचायत समिति के उप प्रधान रहे. बायतु पंचायत समिति के तो आप पर्याय ही बन गए। इस पद पर 1965 से 1977 तथा 1981 से 1992 तक 24 वर्ष तक रहे. 1973 से 1977 तक बाड़मेर सेन्ट्रल कापरेटिव बैंक के अध्यक्ष रहे. 1988 से 1992 तक बाड़मेर जिला परिषद् के उप प्रमुख के पद पर आसीन रहे।

लगातार कांग्रेस में रहने के बाद 1997 में आप भाजपा में सम्मिलित हो गए. 2003 में 11 वीं विधान सभा के चुनाव में बाड़मेर क्षेत्र से भाजपा की टिकट पर विजयी हुए. 1998 के बायतू ब्लाक अध्यक्ष के पद पर रहते हुए 1998 से 2007 तक जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद पर भी रहे।
साथ ही पश्चिमी राजस्थान में पड़ने वाले अकाल में जन सहयोग से पशु शिविरों का सुचारू सञ्चालन कर गौ-धन को बचाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं.सन 1998, 2000, 2003, 2005, 2006, 2007 व 2008 के भीषण अकालों में पशु शिविरों के माध्यम से गौ सेवा का कार्य कर रहे थे।

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