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सत्यपुर नगर सांचौर में हुआ आचार्यश्री का भव्य नगर प्रवेश

36 गुणों के धारक आचार्य भगवंत का हुआ 36 साधु-साध्वी मंडल के साथ प्रवेश। प्रवेश शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। जैन एवं जैनतर स...

  • 36 गुणों के धारक आचार्य भगवंत का हुआ 36 साधु-साध्वी मंडल के साथ प्रवेश।
  • प्रवेश शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
  • जैन एवं जैनतर समुदाय ने किया आचार्यश्री का अभिनन्दन।

जालोर/सांचोर, 23 जनवरी। गुरूजी म्हारो अन्तर्नाद हमने आपो आशीर्वाद, छतीसगढ़ के नन्दन कोटि-कोटि वन्दन, पीयूषसागरसूरिजी आये है नई रोशनी लाये है के जयघोष के साथ आचार्य पदारोहण के बाद 16 वर्ष पश्चात् प्रथम बार सत्यपुर नगर सांचोर में आये शासन सम्राट खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वरजी म.सा. एवं अचलगच्छ के कच्छ कोहिनूर, मारवाड़ रत्न मुनि कमलप्रभसागरजी म.सा. व साध्वी विपुलगुणा श्री आदि ठाणा-36 को जैन एवं जैनतर समुदाय ने स्वागत किया एवं युवाओं ने आचार्य भगवंत को पालकी में बिठाकर एवं अपने कंघों पर बिठाकर नगर प्रवेश करवाया। नगर प्रवेश को लेकर नगरवासियों में अपने गुरू के प्रति जबरदस्त उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। नगर का दृश्य अद्भूत नजर आ रहा था। सम्पूर्ण नगर में तोरणद्वार, र्होडिंग, बैनरों से सजा हुआ नजर आ रहा था। 
इन मार्गो से गुजरी प्रवेश शोभायात्रा
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ सांचोर के ट्रस्टी दूधमल बोथरा ने बताया कि खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागरसूरीश्वरजी म.सा. एवं मुनि कमलप्रभसागरजी व साध्वी विपुलगुणाश्री आदि ठाणा 36 का सांचोर नगर प्रवेश सोमवार को प्रातः 10 बजे कुन्थुनाथ धर्मशाला से सामैया के साथ प्रारम्भ हुआ। आचार्य श्री के प्रवेश की शोभायात्रा कुन्थुनाथ धर्मशाला से प्रारम्भ होकर मुख्य बाजार, विवेकानंद सर्किल, सब्जी मंडी, दरबार चैक, महावीर जिनालय के आगे से होते हुए पीपली चैक, गौड़ी पाश्र्वनाथ जिनालय, शंखेश्वर पाश्र्वनाथ जिनालय एवं दादावाड़ी होकर शांतिनाथ जैन मन्दिर कुशल भवन पहुंची। प्रवेश शोभायात्रा में जैन ध्वज लिए पाठशाला के बालक, बैंड पार्टी, ढोल पार्टी, गुरू भगवंत, साध्वी मंडल सिर पर मंगल कलश धारण किए महिला मंडल, कुशल बालिका मंडल, बाड़मेर जैन समाज, जिनदत मंडल, जिनशासन विहार सेवा ग्रुप, सहित जैन एवं जैनतर समाज के पुरूष वर्ग, महिला वर्ग प्रवेश शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। बैंड की धुन एवं ढ़ोल की थाप पर गुरूभक्त जगह-जगह पर झूम रहे थे। आचार्य श्री को जहां-जहां से शोभायात्रा गुजरी वहां-वहां आचार्य भगवंत को नगरवासियों द्वारा बधाया गया। शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए स्थानीय शांतिनाथ जिनालय कुशल भवन पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गई। 

16 वर्ष बाद हुआ सत्यपुर नगर में आगमन
नरपतचंद बोथरा ने बताया कि आचार्य भगवंत ने आज  16 वर्षों की लम्बी अवधि के पश्चात् आचार्य भगवंत के नगर में आगमन की खुशी को देखते हुए सत्यपुर सांचैर नगर में जैन एवं जैनतर समुदाय में खुशी और उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। गौरतलब है कि लगभग 16 वर्ष पूर्व सन् 2001 में आचार्य भगवंत मुनि पर्याय में बाड़मेर नगर में चातुर्मास सम्पन्न करने के पश्चात् विचरण करते हुए सांचैर नगर पधारे थे  आज 16 वर्षों के बाद आचार्य बनकर उनके नगर आगमन पर कई भक्तों ने उनका अभिनन्दन करते हुए गुरू के प्रति श्रद्धाभाव प्रकट किए। 

ये रहे कार्यक्रम के अतिथि
प्रवेश शोभायात्रा में बाड़मेर जैन श्रीसंघ सूरत अध्यक्ष बाबूलाल संखलेचा, अ.भा.खरतरगच्छ महासंघ सदस्य पुखराज लूणिया, नाकोड़ा तीर्थ ट्रस्टी भंवरलाल डोसी, जैन श्रीसंघ सांचैर ट्रस्टी दौलतराज अंगारा, मांगीलाल डोसी, भंवरलाल सेठिया, जैनम टुडे संपादक प्रकाश संखलेचा भारतीय जैन संगठना बाड़मेर शाखा प्रवक्ता चन्द्रप्रकाश छाजेड़ ने कार्यक्रम में आतिथ्य प्रदान किया। 

इन्होनें किया गुरू का अनुमोदन
खरतरगच्छ संघ सांचोर के ट्रस्टी केवलचंद बोहरा ने सभा को स्वागत भाषण से संबोधित करते हुए गुरू महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सारी धरती को कागज, वन को लेखनी, समुन्द्र को स्याही भी बना दे तो भी गुरू का गुणगान नहीं किया जा सकता है। मुमुक्षु शुभम सिंघवी ने कहा कि जीवन के बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक व्यक्ति को दूसरों से परिचय करने का बड़ा शौक रहता है, चाहे घर में हो या दुकान में, चाहे बस में हो या ट्रेन में। व्यक्ति मिनटों में उससे परिचय कर लेता है। इन सारी बातों में मनुष्य अपने जीवन का बहुत सा समय खराब कर देता है, लेकिन अपने स्वयं से परिचय करने के लिए उसके पास वक्त नहीं है। श्री जय त्रिभूवन पाश्र्व 72 जिनालय तीर्थ के कार्यकारी अध्यक्ष नरपतचंद कानूंगों ने आचार्य भगवंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जनमानस को परिचय करवाया। इस अवसर पर मुमुक्षु लोकेश गोलेच्छा एवं शुभम सिंघवी का अभिनन्दन खरतरगच्छ संघ सांचोर द्वारा किया गया। बोथरा कानूंगो परिवार सांचोर द्वारा साधर्मिक वात्सल्य का लाभ लिया गया। 

गुरू ही सच्चा मार्गदर्शक-आचार्य जिनपीयूषसागरूसूरीश्वर म.सा. ने कहा कि महापुरूषों के सम्पर्क से भले महापुरूष न बन सके लेकिन उनके समीप जाने से वैराग्य के, संयम के भाव सुवासित अवश्य होगें। सद्गुरूओं की संगति करने से संतो के साथ ज्ञान चर्चा करने से ही इस संसारी भूल भूलैया से निकलने का मार्ग मिल सकता है। आचार्य प्रवर ने कहा कि हम धर्म का ठिंठोरा तो बहुत पीटते है लेकिन धर्म का मर्म क्या है उस महत्व की चाबी को भूलकर केवल उत्साह समारोह लगे रहे तो हमारी भी वही स्थिति होगी जो 102वीं बिल्डिंग पर पहुंचने के बाद चाबी नीचे भूल आता है। 
साधु को शक्ति नहीं भक्ति बांध सकती है- कच्छ कोहिनूर मुनि श्री कमलप्रभसागर जी म.सा. ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिसके पांवों में छाले और होंठों पर हंसी होती है वो ही परमात्मा के शासन के सच्चे संत है और शासन के रखवाले है। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो लेकिन मनःस्थिति को मजबूूत रखे। जहां परिणाम ही प्रतियुत्तर हो वहां सबूत की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होने कहा कि साधु को कोई भी शक्ति बांध नहीं सकती है। साधु को बांधने की अगर किसी में शक्ति है तो वो है भक्ति में।
संसार मलीन, पराधीन व क्षणीक- प्रखर प्रवचनकार मुनि सम्यकरत्नसागर म.सा. ने कहा कि क्रोधी व्यक्ति को वापिस प्रतिक्रिया क्रोध से न दे। मन के सामने जब भी कोई शुभ कार्य करने की बात आयेगी तब-तब ये वकील रूपी मन तारीख पर तारीख मांगता रहेगा। ये मन हमारे को स्वास्थ्य, सम्पति और संबंधों में उलझाकर देव-गुरू-धर्म के साथ जुड़ने देता नहीं है। डाॅक्टर कितना भी प्रयास कर ले लेकिन वे भी मौत से बचा सकता नहीं है और वकील कितना प्रयास कर ले लेकिन मौत स्टे ला सकता नहीं है। 
खरतरगच्छ संघ सांचौर के जेठमल बोथरा ने शोभायात्रा में चार चांद लगाने वाले बाड़मेर जैन समाज, जिनदत मंडल, जिन कुशल बालिका मंडल, विहार गु्रप एवं समस्त मंडलों, आंगतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर खरतरगच्छ संघ सांचैर के पूर्व अध्यक्ष चुन्नीलाल मरडिया, पूर्व उपाध्यक्ष जेठमल बोथरा, मफतलाल कानूंगो, राजमल मरडिया, नेमीचंद चंदन, मांगीलाल कानूंगो, सुरतानमल बोहरा, मोहनलाल मालू, बाबूलाल छाजेड़, भंवरलाल गांधी, बाबूलाल श्री श्रीमाल, चंपालाल मरडिया, भूरचंद मुणोत, शांतिलाल बोथरा, अमृत बोथरा सहित जैन समाज के गणमान्य श्रावकगण उपस्थित थे। 
प्रवेश शोभायात्रा में बाड़मेर, सूरत, चौहटन, मुम्बई, हैदराबाद, पाली, धोरीमन्ना, कारोला सहित देश के विभिन्न अचंलो से गुरूभक्त शिरकत की।

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