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इलाज के अभाव में मौत की तरफ बढता मोहित

रिपोर्टर @ रोहित शर्मा पैसा नही होने से 6 महिने से नही कराया बीमार बालक का इलाज धौलपुर। जिले के बसेड़ी उपखण्ड के गांव ममोधन में एक कि...

रिपोर्टर @ रोहित शर्मा

पैसा नही होने से 6 महिने से नही कराया बीमार बालक का इलाज
धौलपुर। जिले के बसेड़ी उपखण्ड के गांव ममोधन में एक किशोर को मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी ने ऐसा जकड़ा है की किशोर दिन-प्रतिदिन मौत के आगोश में सिमिटता चला जा रहा है किशोर के परिजन उसके उपचार को लेकर बसेड़ी चिकित्सालय से लेकर दिल्ली के एम्स तक उपचार करा चुके है लेकिन बीमारी दूर होने का नाम नही ले रही है,किशोर का उपचार तो दूर अभी तक देशभर के विख्यात चिकित्सक किशोर की बीमारी को ही डायग्नोसिस नहीं कर सके है पिछले तीन साल से बीमारी के बढ़ते दंश को झेल रहे किशोर के परिजन भी अब थक-हार कर घर बैठ गए है और सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया है जो किशोर के मौत के इंतजार करने के अलावा कुछ नही है। 

क्या है मोहित की कहानी
यह दर्दनाक और रहस्य से भरी कहानी है जिले के बसेड़ी उपखण्ड के गांव ममोधन के मोहित कुमार शर्मा की,सन 2013 में गांव के स्कूल में दसवी कक्षा में पढ़ रहे मोहित को अचानक कुछ बदलाब होने लगे उसके होठ और आखो की पुतली में आये परिवर्तनो पर जब तक परिजनों की निगाह पड़ी उसे दौरे भी आने लगे,इसके बाद तो मोहित की परेशानियां बढ़ती गयी और उसे जयपुर स्थित बड़े चिकित्सालय एसएमएस में वरिष्ठ चिकित्सको को दिखाया गया,जिन्होंने मोहित को उपचार भी दिया लेकिन कोई फायदा नही हुआ,बाद में परिजन मोहित को लेकर दिल्ली स्थित एम्स पहुचे और तमाम तरह की जांचो को कराने के बाद उपचार शुरू किया गया लेकिन आज मोहित मौत के कगार पर है सिवाय तरल पदार्थो के वह कुछ नही खा सकता है चलने फिरने से लाचार है और उसका शरीर दिन-प्रतिदिन सूखता चला जा रहा है। 
क्या है मोहित की बीमारी
मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारी से जूझ रहे इस 17 वर्षीय किशोर को दौरे पड़ते है और मुँह से झाग निकलने के साथ वह अपनी सुधबुध खो देता है जिसको लेकर उसके साथ हर वक्त परिवार का कोई सदस्य साथ रहता है,मोहित अपने आप कुछ नही खा सकता उसको भोजन में केवल लिकवयड (तरल) दिया जाता है जिसकी मात्रा भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है वह चलने फिरने से लाचार है,बोल नही सकता है केवल अपनी भावनाओ को लिख सकता है जिसमे भी उंगलियो के कांपने के चलते अब स्पष्ट नही लिखा जाता है,परिवारीजन उसका उपचार बड़े अस्पतालों से लेकर पनगढ़िया और भावना शर्मा जैसे वरिष्ठ चिकित्सको से करा चुके है लेकिन बीमारी का रहस्य अभी नही खुल सका है। 
क्या कर रही है सरकारी मशीनरी
मोहित के किसान माता-पिता अब तक उसके उपचार पर हुए लाखो रुपयो के खर्चे के बाद हिम्मत हार चुके है और वे अब मोहित को लेकर अपने घर पर सामान्य उपचार दे रहे है साथ में ईश्वर से ही बच्चे के सही होने की प्रार्थना कर रहे है,इस बीच बिडम्बना यह है की जिले का स्वास्थ्य विभाग स्कूली बच्चे की इस बीमारी को लेकर अभी तक अनविज्ञ है जबकि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रिय बाल स्वास्थ्य योजना में प्रत्येक जिले में शिविर लगाकर ऐसे बच्चो की तलाश की जाती है जिनका उपचार भी पहले जिला स्तर पर और बाद में प्रदेश या बड़े सेंटर पर सरकार द्वारा निशुल्क कराया जाता है लेकिन जिले में सरकार के यह शिविर स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में लगते है या शिविरों में प्रभारी मोनिटरिंग नही की जाती है जिसके चलते पिछले तीन वर्ष से बीमारी का दंश झेल रहा यह स्कूली छात्र सरकारी मशीनरी की पहुच से दूर है। 
मोहित के पिता ब्रजमोहन और माता रामबाई चाहती है की सरकार उनके बच्चे के उपचार के लिए कुछ करे जिससे उनका मोहित बचपन जैसे खुशहाल जीवन में वापस लौट सके ग्रामीण और मोहित के हमउम्र लोग भी उसके स्वस्थ होने के लिए अब सरकार की और आशा भरी दृष्टि से देख रहे है।

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