Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

निजी चिकित्सालय में प्रसुता की मौत परिजनों के साथ भीड़ ने दिनभर किया हंगामा

लाइफ लाइन बना नीतू देवी की डेड लाइन निजी चिकित्सालय में प्रसुता की मौत परिजनों के साथ भीड़ ने दिनभर किया हंगामा परिजनों का डॉक्टर पर ...

  • लाइफ लाइन बना नीतू देवी की डेड लाइन
  • निजी चिकित्सालय में प्रसुता की मौत परिजनों के साथ भीड़ ने दिनभर किया हंगामा
  • परिजनों का डॉक्टर पर ईलाज में लापरवाही का आरोप
  • डॉक्टर की गिरफ्तारी को लेकर किया हाईवे जाम
  • पुलिस के हल्के लाठीचार्ज के बाद हुई पत्थरबाजी

@ पृथ्वीराज गोयल
जालोर/भीनमाल,19 जनवरी। नगर के कृषि मंडी रोड स्थित एक निजी हॉस्पीटल में गुरूवार सुबह प्रसव के बाद प्रसुता की मौत हो गई। लाइफ लाइन नाम का यह अस्पताल प्रसुता नीतू देवी की डेड लाइन बनकर उभर आया।
परिजनों ने निजी चिकित्सालय के संचालक, स्टाफ व चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हॉस्पीटल पर हंगामा किया। मामला इतना बढ़ गया है कि लोगों ने चिकित्सालय पर पत्थरबाजी भी की। मामला बढ़ता देख एसडीएम चैनाराम चौधरी, डीएसपी धीमाराम विश्नोई व पुलिस निरीक्षक कैलाशचन्द्र मीणा मौके पर पहुंचे। पुलिस के हल्का लाठीचार्ज करने पर लोगों की भीड़ उत्तेजित हो गई, भीड़ ने भी पुलिस पर पत्थर बरसाएं। जिसमें पुलिस निरीक्षक मीणा के कनपटी पर हल्की चोट भी लगी। आक्रोशित लोगों ने चार घण्टे तक भीनमाल-रामसीन मार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान विधायक पूराराम चौधरी, प्रधान धुखाराम राजपुरोहित व भाजपा नगरध्यक्ष भरतसिंह भोजाणी ने भी मौके पर पहुंचकर मृतका के परिजनों से समझाईश की। लेकिन परिजन डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अड़े रहे। इसके बाद मामले को बढ़ता देख एएसपी पीडी धानिया भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने जालोर, रानीवाड़ा, जसवंतपुरा, रामसीन से अतिरिक्त पुलिस जाब्ता बुलाया। पुलिस के मुताबिक शहर के जगजीवन राम कॉलोनी निवासी राजुराम पुत्र बाबुलाल जीनगर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसकी पत्नी नीतू (26) प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार शाम को शहर के लाईफ लाइन चिकित्सालय में भर्ती करवाया था। तब डॉ. कौशल शर्मा ने जांच कर तुरंत डिलीवरी करने की बात कहते हुए पैसे का इंतजाम करने की बात की। हमने रुपए की व्यवस्था करने पर डॉ. शर्मा ने सुबह 3.30 बजे डिलीवरी करवाई। उसके बाद प्रसुता की तबीयत बिगड़ गई। डॉ. द्वारा नीतू को आगे ले जाने के लिए एम्बुलेंस मंगवाने की बात कही। हमें नीतू को सुपुर्द किया गया तो खून ज्यादा बहने से उसकी हालत गंभीर हो गई थी। हम आगे ले जाते समय रास्ते में ही नीतू की मौत हो गई।

पहले रुपए का इंतजाम करो, उसके बाद होगा ईलाज
निजी अस्पताल में डिलेवरी से पूर्व पहुंचने वाले मरीजों को पहले तो रूपए के लालच में अस्पताल मे भर्ती कर लिया जाता है। इसके बाद परिजनों पर ईलाज से पूर्व रूपए की मांग की जाती है। मरीज गरीब परिवार से होने पर एकदम ईलाज के लिए रूपए एकत्रित नहीं कर पाता है। रूपए एकत्रित करने में लगे समय में मरीज की तबीयत बिगड़ जाती है, तो उसे अन्यत्र रेफर कर देते है। 

मृतका के शव के साथ रास्ते में पांच घण्टे तक खड़ी रही एम्बुलेंस
प्रसुता को ईलाज के लिए आगे रेफर करने के बाद रास्ते में ही उसकी मौत हो जाने के बाद परिजन एम्बुलेंस को लेकर सीधे लाइफ-लाईन अस्पताल पहुंचे। इसके बाद अस्पताल के आगे प्रदर्शन के दौरान पांच घण्टे तक मृतका का शव लेकर एम्बुलेंस रास्ते में ही मुख्य सड़क पर खड़ी रही। 

मेडिकल बोर्ड से करवाया मृतका के शव का पीएम
पुलिस व प्रशासन की काफी समझाईश के बाद मृतका के परिजन मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने के लिए राजी हुए। इसके बाद राजकीय अस्पताल में प्रशासन की मौजूदगी मेें मेडिकल बोर्ड बनाकर मृतका का पोस्टमार्टम करवाया। मेडिकल बोर्ड में डॉ पांचाराम देवासी, डॉ बाबूलाल चौधरी व डॉ महेन्द्र कुमार  शामिल थे। 

उपखण्ड कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
निजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करने के बाद जीनगर समाज के लोग जुलुस के रूप में सीधे उपखण्ड कार्यालय पहुंचे। उपखण्ड कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर दोषी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। पीएम होने के बाद डॉक्टर की गिरफ्तारी को लेकर परिजन अड़े रहे। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की गलती की वजह से प्रसुता की मौत हुई है। लिहाजा डॉक्टर की गिरफतरी होनी चाहिए। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद में ही मृतका का अंतिम संस्कार किया जायेगा।

दो लाख ले लो मामला यहीं खत्म करो
मृतका के जेठ देवाराम ने आरोप लगाया कि अस्पताल के संचालक मुकेश बाफना ने तो यह कहते हुए कि ऐसे मामले तो चलते रहते है। अब आप लोग दो लाख रूपये ले लो और मामला यहीं पर खत्म कर दो। केस वेस से कुछ आना जाना नहीं है।

सोशियल मिडिया पर चली चर्चा
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर चर्चा की। लोगों ने शहर में निजी अस्पतालों की मनमानी से लेकर राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टरों के रिक्त पदों को लेकर भी चर्चा हुई। लोगों ने महंगा इलाज और कम समय में मामूली से आदमी बन जाते है अस्पताल के करोड़पति संचालक से लेकर इस प्रकरण में डॉक्टर, स्टाफ व संचालक को जमकर घसीटा।

कोई टिप्पणी नहीं