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बाड़मेर। चामुण्डा माता केराडू का अष्टम वार्षिक मेला 9फ़रवरी को भरा जायेगा

@ शिवप्रकाश सोनी बाडमेर। श्री  ब्राह्मण  स्वर्णकार बाड़मेरा (गोत्र) की कुल देवी श्री चामुण्डा माता केराडू का अष्टम वार्षिक मेला इस ...

@ शिवप्रकाश सोनी


बाडमेर। श्री  ब्राह्मण  स्वर्णकार बाड़मेरा (गोत्र) की कुल देवी श्री चामुण्डा माता केराडू का अष्टम वार्षिक मेला इस वर्ष विक्रम संवत 2073 मिति माघ शुदी 13 गुरूवार दिनांक 9 फरवरी, 2017 को केराड़ू में भरा जाएगा। माताजी की कृपा से संयोगवश इस दिन गुरु पुष्य नक्षत्र, रवि योग सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृतसिद्धि आदि चार योग एक साथ होने के शुभ अवसर पर माताजी के हवन आदि के कार्यक्रम पण्डित श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा के आचार्यत्व में सम्पन्न होंगे। माताजी के मेले के लिए आने वाले दर्शानार्थी परिवारों के लिए अस्थाई ठहरने की व्यवस्था श्री ब्राह्मण  स्वर्णकार समाज भवन, ढ़ाणी बजार बाड़मेर में की गई है। बाड़मेर से केराड़ू पहुंचने के लिए बसों की व्यवस्था (शहर में बसों के आवागमन पर प्रतिबन्ध होने के कारण) समाज भवन के दक्षिण में कुछ दूरी पर स्थित जैन विद्यापीठ  के पास रहेगी। अपने निजी एवं किराए पर वाहन लेकर आने वाले दर्शनार्थी परिवार सीधे ही केराड़़ू पहुंच सकते हैं।
अत: सभी ब्राह्मण  स्वर्णकार बन्धुओं से निवेदन है कि आप सपरिवार अधिक से अधिक तादाद में हमारी ऐतिहासिक एवं प्राचीन नगरी श्री धर्मसी की पुण्य भूमि एवं पंछी देवी की क्रीडा स्थली केराड़ू पधार कर चामुण्डा माता का दर्शन लाभ लेवें तथा माताजी के सम्पन्न होने वाले निम्नांकित कार्यक्रमों में भागीदार बनकर अपनी मनोकामना पूर्ण करें। मन्त्रोच्चार के साथ माताजी का अभिषेक व श्रंगार प्रात: 8:00 बजे, गणेश पूजा प्रात: 11:45 बजे, माताजी का हवन प्रारम्भ दोपहर 12:15 बजे, माताजी की मुख्य ध्वजा का ध्वजारोहण दोपहर बाद 1:15 बजे, माताजी के हवन की पूर्णाहूति दिन के 4:00 बजे ,माताजी की सायंकालीन आरती सायं 6:15 बजे, माताजी का रात्रि जागरण रात्रि 8:30 बजे से प्रात: 5:00 बजे, माताजी के हवन पर अधिकतम 14 जोड़े बैठ सकेंगे। हवन पर बैठने वाले बन्धु धोती पहनकर सपत्नी प्रात: 11:00 बजे तक स्वयं के वाहन से मन्दिर पहुंच जावें। माताजी के श्रंगार की पोशाक प्रात: ही अभिशेक के साथ पहनाई जावेगी। दिन में बार-बार पोशाक बदलना पहनाना सम्भव नहीं होगा। ऐसी स्थिति में जो भक्तगण अपनी श्रद्धा से पोशाक ले आवें वे मन्दिर के पुजारी को सौंप दें। वे यथा समय माताजी को पोशाक पहना देंगे। माताजी के दर्शनार्थ आने वाले समस्त ब्राह्मण  स्वर्णकार परिवारों के भाई-बन्धुओं, माताओं-बहनों के लिए माताजी के मन्दिर प्रांगण में माताजी के प्रसाद भोजन की माकूल व्यवस्था रखी गई है।

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