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राजस्थान राजपूत समाज मुंबई का स्नेह मिलन समारोह धूमधाम से संपन्न

@ जेताराम परिहार सम्मेलन में तारातरा मठ के प्रताप पुरीजी महाराज सहित कई जनप्रतिनिधी एवं प्रशासनिक अधीकारियें ने की शिरकत जालोर/सायल...

@ जेताराम परिहार

सम्मेलन में तारातरा मठ के प्रताप पुरीजी महाराज सहित कई जनप्रतिनिधी एवं प्रशासनिक अधीकारियें ने की शिरकत

जालोर/सायला। राजस्थान राजपूत समाज मुंबई का स्नेह मिलन समारोह बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। सम्मेलन की शुरूआत भगवती माताजी की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलीत कर की।
समारोह के मुख्य अतिथी तारातरा मठ क प्रतापपुरीजी महाराज ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहां कि क्षत्रिय राजपूतों को धर्म के मार्ग पर चलने की चलाह दी। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहां कि  हम क्षत्रिय राजपूत ऋषियों की संतान है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कमाई का दसवा हिस्सा धर्म के नाम पर खर्च करना चाहिए। जिससे उसका कल्याण होगा। क्षत्रिय राजपूत एक ही माले के मोती है कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। इसी तरह सायला प्रधान जबरसिंह तुरा ने संबोधित करते हुए कहां कि आज अपना राजपूत समाज तरक्की के रास्ते पर चल रहा है और हमे मिलजुल कर चलते की बात कही। इसी तरह उपजिला कलेक्टर डां वारसिंह दहिया ने अपने संबोधन में शिक्षा पर जोर दिया व शैक्षणिक संस्थान खोलने की बात कही। इसी तरह आरएएस अधिकारी शंबुसिंह राठौड़ सेरणा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहां कि हम जिस धरती से आते है वह शुरवीरों की भूमि है, वहीं आगे कहां कि हमारे समाज में बालिका शिक्षा का नितांत अभाव है उन्होने बालिका शिक्षा को बढावा देने की बात की। एक बच्ची पढेगी तो वह दो कुलों को सुधारेगी। 
इसी तरह कल्याणपुर प्रधान हरीसिहं उमरलाई, राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेवसिंह गोगामेड़ी, राजपूत समाज हैदराबद अध्यक्ष रिडमलसिंह परिहार, राजपूत समाज मुंबई अध्यक्ष भोपसिंह सुराणा ने भी समारोह को संबोधित किया। इस मौके पर राजपूत समाज सिरोही अध्यक्ष गुमानसिंह परमार, राजपूत समाज गोवा अध्यक्ष नरपतसिंह चैहान, बाड़मेर राजपूत करनी सेना उपाध्यक्ष नरपतसिंह, छैलसिंह राह, गणपतसिंह राह, अचलसिंह बालवाड़ा, मानसिंह सुराणा, उतमसिंह कोड़ी, मलसिंह बालवाड़ा मांगसिंह ओटवाला, मंगलसिंह गोल, गणपतसिहं वाली, मोड़सिंह वाली, छैलसिंह बालवाड़ा, दुर्जनसिंह बिबलसर, गुलाबसिंह कुका, बलवतसिहं नरसाणा, मुकनसिंह घाटकोपर, रूपसिंह धाणसा, धनसिहं, भीमसिंह चैन्नई, भवरसिंह नून, हुकमसिंह मदुराई, केशरसिंह कलकता, केशंिसंह निजामाबाद, चंदनसिंह हैदराबाद, छैलसिंह हैदराबाद, भवानीसिंह हैदराबाद, रणजीतसिंह, जालमसिहं, जोगसिंह तुरा, राणसिंह तुरा, रणछोड़सिंह ओटवाला, पूर्व जिला परिषद सदस्य भूरसिंह सुराणा, चंदनंिसह बोरटा, भीमसिंह पादरा, रामसिहं राठौड, खंगारसिंह आसाणा, मोड़सिंह धुम्बडीया, लालसिंह भुण्डवा, जयसिंह सुराणा, धनसिहं जुजाणी, लक्ष्मणसिंह सुराणा, राजपूत अहमदाबाद के दर्जनो कार्यकता, गुमानसिंह  विशाला, मोड़सिहं वाली, नरपतसिहं सुराणा, दिपसिंह नोहरा, दीपसिंह बागोड़ा, पहाड़सिहं नगर, कालुसिंह सुराणा, श्रवणसिंह नगर, जेतसिंह कोड़ी, सतपालसिंह कोड़ी, प्रतापसिंह सांथु, राणा पहाड़सिंह देता, नारायणसिंह बावरला, अमरसिहं डकातरा, वीरसिंह, शंकरसिंह सुथाणा, हीरसिंह राठौड़, विक्रमसिंह भाडु, अनोपसिंह मिठौड़ा, भवरसिंह आसाणा, कालुसिंह सुराणा, धनसिंह अमरापुरा, सांगसिहं पादरू, नारायणसिहं बासड़ा धनजी, हरीसिंह बालवाड़ा, विजयसिंह नून, परबतसिंह ओटवाला, अर्जुनसिंह निम्बावास, किशोरसिंह धुम्बडिया, मदनसिंह राठौड़, जीतुसिंह लेदरमेर, जालमसिंह नरसाणा, बाबुसिहं दहिया धरूबलो की ढाणी, गुमानसिंह देवड़ा, बाबुसिंह जुजाणी, जालमसिंह सुराणा, जालमसिंह आकोली, चंदनसिंह मोरसीम, खेदसिंह राठौड, महेन्द्रसिंह, विक्रमसिंह सुराणा, सुजानसिंह सुराणा, किशोरसिंह कावतरा, शंबुसिंह नरसाणा, आसुसिंह जुजाणी, मदनसिंह नरसाणा, उम्मेदसिंह रेवतड़ा, धनपतसिंह सुराणा, सुजानसिंह कावतरा, चतरसिंह खिची, भवरसिंह सुराणा, शंबुसिंह सायला, उतमसिंह चैराउ, जवाहरसिंह सिरोही, नरपतसिंह सिरोही, हुकमसिंह सुराणा, इन्द्रसिंह सुराणा, परबतसिंह जाखल, शैतानसिंह जाखल, दलपतसिंह, बलवतसिंह भालीखाल, किशोरसिंह भालीखाल, दिलावरसिंह सहित हजारों की संख्या में राजपूत समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंच संचालन जोरावरसिंह दहियावत आसाणा ने किया।

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