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राष्ट्रीय लोक अदालत की समझाईश से जीवन की नई शुरूआत

बाड़मेर,11 जनवरी, शनिवार। अपर जिला न्यायाधीश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पति एंव पत्नि के बीच विचाराधीन तलाक की याचिका को पति ...

बाड़मेर,11 जनवरी, शनिवार। अपर जिला न्यायाधीश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पति एंव पत्नि के बीच विचाराधीन तलाक की याचिका को पति और पत्नि के बीच आपसी समझाईश करके राजीनामा करवाकर तलाक की याचिका को विड्रो करवाया गया एंव पति एंव पत्नि ने एक-दूसरे को माला पहनाकर जीवन की नई शुरूआत करने का निर्णय लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राकेश जैन का विवाह 4 वर्ष पूर्व चेतना के साथ हुआ था तथा दोनों के एक पुत्र युगल भी था, पति और पत्नि के बीच में आपसी सम्बध बिगडने के कारण पति राकेश एंव पत्नि चेतना ने आपसी सहमति से हिन्दु विवाह अधिनियम की धारा 13.ठ के तहत तलाक की याचिका एडवोकेट मुकेश जैन के माध्यम से लगभग 1 वर्ष पूर्व अपर जिला न्यायाधीश संख्या 1 बाडमेंर में प्रस्तुत की थी तथा पति-पत्नि अलग रह रहे थे।
अपर जिला न्यायालय बाडमेंर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अपर जिला न्यायाधीश सुरेन्द्र खरे, एडवोकेट मुकेश जैन, की समझाईश से पति-पत्नि ने एक-दूसरे से सुलह करते हुए एक-दूसरे के साथ नई जिन्दगी की शुरूआत करने का निश्चय किया तथा एक-दूसरे को माला पहनाकर तलाक की याचिका को विड्रो किया। इस अवसर पर राकेश एंव चेतना के अधिवक्ता मुकेश जैन, लोक अदालत के सदस्य पुरूषोतम गुप्ता एंव पुरूषोतम सोलंकी, लोक अभियोजक गणपत गुप्ता, सुरेश मोदी, सवाई महेश्वरी, सहित अन्य अधिवक्तागण उपस्थित थे।

सुलह के प्रयास रंग लाए
राकेश एंव चेतना के अधिवक्ता मुकेश जैन ने बताया कि राकेश एंव चेतना के बीच लम्बे समय से विवाद चल रहे थे, इस कारण दोनों ने एक दूसरे को तलाक देने का निश्चय किया था तथा न्यायालय में तलाक की याचिका प्रस्तुत की थी, लेकिन अधिवक्ता मुकेश जैन द्वारा पति-पत्नि में सुलह के प्रयास किये गये एंव माननीय न्यायालय द्वारा भी प्रयास किये गये, जिसके परिणाम स्वरूप राकेश एंव चेतना ने एक दूसरे से सुलह कर नए सिरे से साथ में जीवन व्यापन करने का निर्णय लिया है तथा तलाक की याचिका विड्रो कर दी है।

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