Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

सन्तों की सेवा ही परम् भगवान भक्ति हैं:बांके बिहारी

@ घमण्डाराम परिहार बाड़मेर/बायतु। खरंटिया गाँव में चल रही भागवत कथा में सम्बोधित करते हुए बांके बिहारी बताते है कि जन्म और मृत्यु के च...

@ घमण्डाराम परिहार

बाड़मेर/बायतु। खरंटिया गाँव में चल रही भागवत कथा में सम्बोधित करते हुए बांके बिहारी बताते है कि जन्म और मृत्यु के चक्कर से मुक्ति हो जाना है। जैसे ही जन्म होता है हम माया जाल में लिप्त हो जाते है।
भाव का सागर से हम बंधे हुए है। जन्म बाद में होता है, माया का बन्धन पहले बन्ध जाता है। बालक भी अपने अधिकार के लिए प्रयास करता है। गुरु का एक ऐसा सम्बन्ध होता है जो भगवान की और खींचता है। गुरु का मतलब होता है जो अँधेरे से प्रकाश की ओर ले जाते है। गुरु दो प्रकार के होते है।शिक्षा और दीक्षा गुरु। विद्या गुरु विद्या सिखाते है,, दीक्षा गुरु कान में मन्त्र फूंकते है। जीवन के एक दीक्षा गुरु अवश्य बनाना चाहिए। आत्मा को विराम नही मिलता है। सत्य बोलो गत है। भगवान ने मनुष्य का शरीर सुनहरा दिया है। बांके बिहारी ने कथा वचन करते हुए कहा कि पृथ्वी का कोई भगवान है तो वो सन्त है। सन्त की सेवा से देवता बन जाता है। भगवान को प्राप्त करने के लिए वैराग्य धारण करना होता है। तीसरी भगवान की भक्ति गुरु की सेवा ही है, जो मन्त्र गुरु ने दिया है, उसको जपना ही भक्ति है। सन्तों की ही सेवा ही भक्ति है। भगवान ने जितना ही दिया है, उसमे ही सन्तोष की काफी है। चल कपट को त्याग कर भगवान की भक्ति करनी चाहिए। इस मौके पर भागवत कथा आयोजक रेखाराम सारण, वगताराम, दानाराम बटेर, लुम्भाराम मुंढण्, किशनाराम मुंढण्, खींयाराम लुखा, घमण्डाराम परिहार बालक बालिकाएँ, युवक-युवतियां, महिलाओं सहित कई श्रोता मौजूद रहे।

कोई टिप्पणी नहीं