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जीवन विकास के लिए विवेक विरति जरूरी न कि विज्ञान और विज्ञापन:आचार्य श्री

आचार्य श्री के आह्वान पर सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने स्वीकार किए व्रत बाड़मेर/चौैहटन, 29 मार्च। पाड़वों की तपोभूमि धर्म उर्वरा चौहटन न...

आचार्य श्री के आह्वान पर सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने स्वीकार किए व्रत
बाड़मेर/चौैहटन, 29 मार्च। पाड़वों की तपोभूमि धर्म उर्वरा चौहटन नगरी में नव संवत्सर का नया दिन एक स्वर्णिम सूर्य के साथ उदित हुआ। प्रसंग बना प.पू. खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वर म.सा. की निश्रा में सैंकड़ों की संख्या में युवक-युवतियों व पुरूष एवं महिलाओं द्वारा चतुर्थ ब्रह्मचर्य व्रत (अर्ध दीक्षा), बारह व्रत, सप्त व्यसन जुआ, चोरी, मांस भक्षण, मदिरा सेवन, शिकार, परस्त्रीगमन, वेश्यागमन इन सप्त व्यसन का आजीवन त्याग एवं विविध तपस्या ज्ञान पंचमी, अष्टमी, वर्षीतप आदि व्रत ग्रहण करने का। 
बुधवार को प्रातः 9 बजे स्थानीय शांतिनाथ प्रवचन मंडप मं परमात्मा के समवसरण (नांद) की रचना की गई और आचार्य भगवंत द्वारा एक-एक व्रत के बारे में समझाते हुए विधिपूर्वक देव-गुरू-धर्म की साक्षी में व्रतों का आरोपण करवाया गया एवं नंदीसूत्र सुनाया गया। इस अवसर पर 18 वर्ष के युवान युवक-युवतियों सहित 68 वर्ष तक के बुजुर्ग पुरूषों व महिलाओं ने चतुर्थ व्रत  स्वीकार किया साथ ही कई युवानों ने सप्त व्यसन के त्याग संकल्प लिया। इसी कड़ी में संस्कार वाटिका के नन्हें-मुन्नें बालक-बालिकाओं ने भी अभक्ष्य सेवन, कोल्ड ड्रिंक, आईसक्रीम आदि के त्याग का नियम लेकर पापों पर प्रतिबंध लगाने का अनुमोदनीय कार्य किया गया। 
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वर म.सर. ने कहा कि श्रमण संस्कृति आत्मा की संस्कृति है। आत्मा के संस्कार को, मन के परिमार्जन को और बुद्धि के प्रक्षालन को श्रमण धर्म में, श्रमण विचारधारा में और श्रमण संस्कृति में बड़ा महत्व दिया गया है। बाहरी जीवन की अपेक्षा उसने भी भीतरी जीवन को संभालने का अधिक काम किया है। वह साधक को भोग से योग की ओर, विलास से वैराग्य की ओर तथा प्रवृति से निवृति की ओर ले जाता है। आचार की पवित्रता एवं विचार की विराटता जैन संस्कृति का मूल आधार है। संयम भारतीय संस्कृति की आत्मा है। जिस तरह फसल की सुरक्षा के लिये वाड़ की आवश्यकता होती है उसी तरह जीवन के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिये नियम, व्रत, संयम आवश्यक है। 
आचार्य भगवंत का 1 माह का चौहटन नगर में स्वर्णिम प्रवास रहा। इस 1 माह के दौरान चौहटन नगरवासी गुरू भगवंतों के आध्यात्मिक प्रवचनों की जिनवाणी रूपी ज्ञानमृत का सेवन कर धन्य हो गये। इस प्रवास की सार्थकता आज के कार्यक्रम में नजर आई। 
इस अवसर पर जैन श्रीसंघ चैहटन एवं पवनकुमार चिंतामणदास मालू परिवार द्वारा व्रत ग्रहण करने वालें आराधकों का बहुमान किया गया साथ ही साथ जैन श्रीसंघ बाड़मेर अध्यक्ष सम्पतराज बोथरा ने आचार्य श्री समक्ष पधारकर भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में निश्रा पधारने हेतु कार्यक्रम एवं प्रवास संबंधी चर्चा की। आचार्य भगवंत गुरूवार को सायं 5.30 बजे चैहटन नगर से बाड़मेर की ओर विहार करेगें। आचार्य भगवंत की निश्रा में बाड़मेर नगर में भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के निमित आयोजित विविध कार्यक्रम संपन्न होगे।

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