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अब गांवो में नही जायेगे नये डाक्टर, पुराने डाक्टर देगें सामुहिक ईस्तीफा

@ प्रकाश राठौड़ जालोर/मालवाडा। दुर्गभ ओर ग्रामीण इलाको में कार्य करने वाले डाक्टरो को प्री-पीजी में ऐडमिशन के लिए 50 प्रतिशत रिजर्वेशन ...

@ प्रकाश राठौड़

जालोर/मालवाडा। दुर्गभ ओर ग्रामीण इलाको में कार्य करने वाले डाक्टरो को प्री-पीजी में ऐडमिशन के लिए 50 प्रतिशत रिजर्वेशन खत्म करने ओर उपर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के एवं एमसीआई के नियमो को दरकिनार करते हुए ग्रामीण डाक्टरो के आरक्षण को न्युन करने पर सेवारत डाक्टरो का सरकार के प्रति गुच्छा बढता ही जा रहा है।
पुरे राज्य में चल रहे आन्दोलन का समर्थन करते हुए डाक्टर संघर्स कमेटी ने जालोर में जिला कलेक्टर अनिल कुमार गुप्ता को अपनी मांगे बताई। अध्यक्ष डाक्टर जीतेश खत्री, उपाध्यक्ष डाक्टर पीयुस शर्मा,डाक्टर भरत टेलर, डाक्टर असीम परिहार, डाक्टर मदन, डाक्टर बाबुलाल चौैधरी, डाक्टर लक्ष्मण मौजुद थे। डाक्टर जीतेश खत्री ने बताया कि सरकार के सेवारत डाक्टरो का आरक्षण लगभग खत्म करने से ग्रामीण जनता के हितो को नुकसान पहुचेगा। पहले ही हमारे राज्य में डाक्टरो कि भारी कमी है ओर सरकार से इस कदम से एक भी डाक्टर ग्रामीण क्षैत्र में काम नही करेगा। वही दुसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के डाक्टर स्पेशलिस्ट नही बन सकेगे। जहा पुरे देष में सरकारे डाक्टरो को सरकारी सेवाओ में लुभावने कि नित नए प्रयास कर रही है। वही राजस्थान सरकार ठीक विपरीत दिशा में अग्रसर है।


क्यो मिलता है आरक्षण
ग्रामीण क्षेत्र में प्रोत्साहन के लिए तीन वर्श कार्य करने के बाद राज्य कि पचास सीटो में कोटा मिलता था ओर स्पेसलिस्ट बनने के बाद दो साल सरकारी सेवाये देना आवष्यक था।


क्या है नियम

सुप्रीम कोर्ट व मेडिकल कौसिल आॅफ इंडिया एमसीएल के कहते है कि दुर्गम ग्रामीण आदीवासी क्षेत्र में काम करने वाले डाक्टर दस प्रतिवर्ष कि दर से अधिकतम तीस बोनस अंक दिए जाए। यह नियम पुुरे देश में पिछले वर्श से लागु है।


राजस्थान सरकार ने किया क्या
सरकार ने तीन वर्षों तक काम करने के बाद केवल दस बोनस अंक दिए जाने का आदेश जा कर दिया। पहले राज्य कि कुल सीटो में पचास ग्रामीण दुर्गम सेवारत डाक्टरो के लिए आरक्षित था। तो क्यो जायेगे गांव में डाक्टर।

डाक्टर क्यो देना चाहते है इस्तीफा 
बडे शहरो में प्राईवेट अस्पतालो में काम के घंटे फिक्स है ओर तनखाह 2-3 गुना, वही सरकारी सेवाओ में 24 घंटे डयुटी व केन्द्र एवं राज्य सरकार कि विभिन्न योजनाओ का भार भी रहता है।

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