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लब्धिनिधान पार्श्वनाथ तीर्थ का भूमिपूजन आज

देशभर से संघ के अग्रणी एवं उद्योगपति करेगें शिरकत। चौहटन से विरात्रा जाने वाले मार्ग पर होगा भव्य तीर्थ का निर्माण। आचार्य भगवंत के 32...

  • देशभर से संघ के अग्रणी एवं उद्योगपति करेगें शिरकत।
  • चौहटन से विरात्रा जाने वाले मार्ग पर होगा भव्य तीर्थ का निर्माण।
  • आचार्य भगवंत के 32वें संयम वर्ष पर श्रद्धालुगण करेगें अभिनन्दन।

बाड़मेर, 2 मार्च। बाड़मेर जिला के मालाणी क्षेत्रान्तर्गत अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच चौहटन नगर में परम पूज्य खरतरगच्छाचार्य श्री जिनपीयूषसागर सुरीश्वरजी म.सा. की पावन प्रेरणा से नवोदित श्री लब्धिनिधान पार्श्वनाथ-मणिधारी तीर्थ के भूमि शुद्धि, भूमि अधिग्रहण, भूमिपूजन कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजित होगा।
विचक्षण स्नात्र मंडल के अध्यक्ष भंवरलाल डोसी ने बताया कि चौहटन नगर से विरात्रा जाने वाली रोड़ पर ढोक ग्राम में अरावली पर्वतमालाओं की सुरमय वसुंधरा पर विशाल भूभाग पर लब्धिनिधान पार्श्वनाथ मणिधारी तीर्थ की परिकल्पना की गई है। इस विशाल भूभाग भव्य जिनालय, दादावाड़ी, म्युजियम इत्यादि का निर्माण होगा। इस परिकल्पना को साकार रूप देने के लिए आचार्य भगवंत एवं मालाणी क्षेत्र में विराजित गुरू भगवंतों की पावन निश्रा में शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण, भूमि शुद्धि एवं भूमिपूजन के कार्यक्रम का आयोजन होगा। 

ये होगें कार्यक्रम
शुक्रवार को प्रातः 6.45 बजे आचार्य भगवंत एवं मुनि भगवंत की निश्रा में सकल संघ के साथ परमात्मा की भव्यरथ यात्रा गाजे-बाजे के साथ स्थानीय शांतिनाथ जैन मन्दिर से प्रारम्भ होकर राजमार्ग से होते हुए महोत्सव स्थल पर पहुंचेगी जहां पर 8.00 बजे स्नात्र पूजा, 8.36 बजे नवग्रह पूजा, दशदिग्पाल पूजन, अष्टमंगल पूजन, 9.45 बजे नाकोड़ा भैरव पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, 10.36 बजे विभिन्न तीर्थों को जल से भूमि शुद्धि एवं भूमिपूजन तत्पश्चात् दोपहर 12.36 बजे साधर्मिक भक्ति के कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। इस अवसर पर जैन संगीत सम्राट नरेन्द्र वाणगोता एण्ड पार्टी मुम्बई द्वारा सुमधुर आवाज में भजनों की प्रस्तुति देते हुए कार्यक्रम का संचालन किया जायेगा।


आचार्य भगवंत का 32वां दीक्षा दिवस आज
प.पू. खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वर म.सा. का 32वां दीक्षा दिवस भी भूमिपूजन कार्यक्रम में मनाया जायेगा। आचार्य भगवंत ने आज से 32 वर्ष छतीसगढ़ के दुर्ग जिले में 19 वर्ष की अल्पवय में प.पू. खरतरगच्छापति जिनउदयसागर सूरीश्वरजी म.सा. के करकमलों से दिक्षित होकर प.पू. श्री महोदयसागरजी म.सा. का शिष्यत्व स्वीकार कर अपना जीवन उनके चरणों में समर्पित कर दिया था। तथा 11 जून 2015 को नागपुर में आचार्य पद से विभूषित किया गया था। आचार्य भगवंत 32 वर्षों से विभिन्न नगरों ग्रामों में जिनशासन की धर्म पताका लहरा रहे है। 

यहां-यहां से पधार रहे है मेहमान 
मांगीलाल डोसी ने बताया कि इस आयोजन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल बना हुआ है तथा इस विशाल कार्यक्रम में दिल्ली, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित सम्पूर्ण भारत देश के संघों के अग्रणी श्रावकगण, गुरूभक्त एवं उद्योगपति शिरकत करने पधार रहे है।


विशाल भूभाग पर साकार होगा भव्य तीर्थ का सपना
मंडल के सचिव सोहनलाल डोसी ने बताया कि इस विशाल भूभाग पर भव्य जिनालय एवं दादावाड़ी का निर्माण होगा। चारों ओर पहाड़ियों एवं रेतीले टीलों से घीरे इस स्थल पर बनने वाले विशाल एवं भव्य तीर्थ का प्रारूप बन कर तैयार हो गया है तथा नजदीक में ही विश्व प्रसिद्ध वांकल माता मन्दिर विरात्रा स्थित होने से इस मार्ग पर प्रतिवर्ष भारतभर से लाखों जैन यात्री कुलदेवी दर्शनार्थ आते है इस हिसाब से ये तीर्थ भविष्य में पर्यटन के लिए वरदान साबित होगा।

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