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दीक्षाथीं ने किया वर्षीदान, वरघोडे में उमड़ी भीड़

बाडमेर 15 मार्च। थार नगरी की धन्यधरा पर वसीमालाणाी रत्न शिरोमणी ब्रह्मसर तीर्थोद्वारक उपाध्याय मनोज्ञसागर  म.सा. व नयज्ञसागर म.सा. व साध्व...

बाडमेर 15 मार्च। थार नगरी की धन्यधरा पर वसीमालाणाी रत्न शिरोमणी ब्रह्मसर तीर्थोद्वारक उपाध्याय मनोज्ञसागर  म.सा. व नयज्ञसागर म.सा. व साध्वी विमलप्रभाश्री म.सा. आदि ठाणा के पावन निज्ञा में दीक्षार्थी मुमुक्षु बहन वैशाली गोलेच्छा का भव्य वर्षीदान का वरघोड़ा निकाला गया। मुमुक्षु के भाई महावीर गोलेच्छा ने बताया कि संसारिक मोह माया को त्याग संयम पथ अंगीकार करने जा रही दिक्षार्थी बहन वैशाली गोलेच्छा का भव्य वरघोडा निवास स्थान से बुधवार को प्रात 9.30 बजे उपाध्याय प्रवर मनोज्ञ सागर म.सा. के मांगलिक के साथ रवाना हुआ। जो शहर के मुख्य मार्गो से होता हुआ आराधना भवन पहुंचा जहां उसके बाद वरघोडा धर्मसभा में परिर्वतित हो गया। सबसे आगे जैन ध्वज लिए घुडसवार, बाडमेर बैण्ड की सुमधुर धुन के साथ, ढोल वादक, साधु मण्डल, चतुरविद संघ, साध्वी मण्डल, दिक्षार्थी का रथ, महिलाओ  के साथ वरघोडे में मुमुक्षु रथ पर सवार होकर वर्षीदान कर रही थी वही श्रद्धालुगण दिक्षार्थी अमर रहे के जयघोष से उसका अभिवादन कर रहे थे। 
यहां से गुजरा वरघोडा
वरघोडा महावीर पारसमल गोलेच्छा के निवास जटियो का नया वास से रवाना होकर रैन बसेरा, चौैहटन रोड,स्कूल नम्बर चार, करमु जी की गली, दरियागंज, जैन न्याति नोहरा, पीपली चौक, जवाहर चौैक, छोटी ढाणी, तेरापंथ भवन होता हुआ आराधना भवन पहुॅचा जहां दिक्षार्थीे बहन वैशाली गोलेच्छा ने वर्षीदान किया। रास्ते में जगह-जगह चावल की गहुंली केेे साथ लोगो ने पुष्पों की वर्षा कर वरघोड़े व साधु-साध्वी  भगवंतो का स्वागत किया।  गोलेच्छा ने बताया कि इस अवसर पर उपाध्याय प्रवर ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन मोक्ष का प्रवेश द्वार है जिसके लिए श्रावक श्राविकाओं को संयम ग्रहण करना आवश्यक है। आज मुमुक्षु वैशाली गोलेच्छा उसी पथ की ओर अग्रसर हो रही है। जो सहन करता है वही सिद्वपुरुष बनता है। उन्होने कहा कि हमारी प्रार्थना तभी पूर्ण होगी जब हमें परमात्मा को पाने की प्यास होगी। साध्वी विमलप्रभाश्री म.सा. ने दीक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि धर्म चार प्रकार का होता है जो कि दान, शील, तप व भाव। इसी तरह कषाय का महत्व समझाते हुए कहा कि क्रोध, मान, माया लोभ एवं संज्ञा के बारे में कहा कि आहार, भय, मैथुन परिग्रह का जीवन में त्याग करने का कहा। इस अवसर पर दीक्षार्थी वैशाली गोलेच्छा ने कहा कि वो आभारी है अपने माता पिता की उन्होने मुझे संयम पथ पर जाने की अनुमति सहर्ष प्रदान की। उन्होने कहा कि सांसर में रहकर अपने आप को मोक्ष के पथ पर नही ले जा सकती थी इस लिए मैने ये मार्ग अपनाया है। इस अवसर पर खरतरगच्छ संघ चार्तुमास समिति की ओर से मुमुक्षु बहन वैशाली गोलेच्छा का बहुमान करते हुए अभिनन्दन पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन खरतरगच्छ संघ चार्तुमास कमेटी के महामंत्री केवलचन्द छाजेड़ ने मंच संचालन किया।इस अवसर पर ब्रह्मसर ट्रस्ट के अध्यक्ष दानमल डूंगरवाल,खरतरगच्छ संघ चातुर्मास समिति अध्यक्ष रतनलाल संखलेचा, चौैहटन जैन श्री संघ अध्यक्ष हीरालाल धारीवाल, बाडमेर जैन श्री संघ बालोतरा अध्यक्ष गजेन्द्र संखलेचा, राणमल संखलेचा, कैलाश कोटडिया, पारसमल गोठी, अशोक धारीवाल, बाबूलाल संखलेचा, अमृतलाल पारख, संजय भादरेश, प्रकाश मालू, भूरचन्द झाख, रमेश कानासर, पुखराज म्याजलार, राजू वडेरा, कपिल मालू, भरत गोेलेच्छा व आस-पास से कई क्षेत्रो से श्रद्वालु ने वरघोडे मे भाग लिया।

21 अप्रेल को होगी गुजरात के नवसारी जिले में भव्य दिक्षा
मुमुक्षु महावीर ने गोलेच्छा ने बताया कि मुुलतः बाड़मेर के हाथीतला की रहने वाली मुमुक्षु वैशाली गोलेच्छा गुजरात के नवासारी जिले में दिक्षा ग्रहण कर प.पू.प्रर्वतनि महोदया शशिप्रभाश्री म.सा. की सुशिष्या अनन्त दशर्नाश्री म.सा की शिष्या बनेगी। 

उपाध्याय प्रवर का विहार आज
उपाध्याय प्रवर मनोज्ञ सागर म.सा. बाड़मेर से नवसारी के लिए गुरूवार को विहार करेंगे। गुरूभक्त कपिल मालू ने बताया कि उपाध्याय प्रवर गुरूवार को बाड़मेर से नवसारी के लिए पैदल विहार कर नवसारी पहुंचेगे जहां वो इस भगवती दिक्षा में अपनी निश्रा प्रदान करेंगे।

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