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मालवाडा ठिकाणा के भंवर करूणादित्यसिंह का ढुढोउत्सव धुमधाम से मनाया

ग्रामीणो ने घुटी भंग लगा रंग गले मिल नाचे संग रिपोर्टर प्रकाश राठौड जालोर/मालवाड़ा। नगर में रविवार को रंगों के त्यौहार होली को ह...

ग्रामीणो ने घुटी भंग लगा रंग गले मिल नाचे संग

रिपोर्टर प्रकाश राठौड

जालोर/मालवाड़ा। नगर में रविवार को रंगों के त्यौहार होली को हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दिन पुजा अर्चना की गई तथा सांय को होलीका का दहन भी किया गया। होली पर महिलाओं ने घरों में तरह-तरह के व्यंजन भी बनाए। होली के दूसरे दिन धुलटी पर एक-दूसरे के उपर रंग डालकर रंगों का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया।
युवाओं ने अपनी मित्र मंडली के साथ एक-दूसरें के ऊपर रंग डालकर धुलेटी मनाई। इस पर्व पर मालवाडा ठिकाणा में सरपंच प्रतिनिधि प्रदीपसिंहजी देवल के पुत्र रत्न पर प्रथम बार करूणादित्य का ढुढोउत्सव हर्सोउल्लास के साथ मनाया गया। लोगों के द्वारा भांग घोटी तथा एक-दूसरे को पिलाकर रंगों का त्यौहार मनाया गया। धुलेटी पर नौनिहालों के ढ़ूढऩे की रस्म निभाई गई। ढंूढोत्सव पर लोगों ने टोलिया बनाकर तथा हाथ में लाठियां लेकर बच्चें को ढंूढने की रस्म निभाई गई तथा ढंूढानें आने वाले लोगों पर परिवार के लोगों ने रंग डालकर कुछ भेंट दी। ढंूढ पर मेहमानों के आगमन से गली-मोहल्ले में रौनक बढ़ गई हैं। बुआ व ननिहाल पक्ष की ओर से लाए ढंूढ के सामान को देखने के लिए महिलाओं को आमंत्रित किया गया। बुआ भतीजा होने की तथा दादा-दादी पोते के जन्म की खुशी में महिलाओं से गीत गवाकर उपहार प्रदान किए। घरों में दोपहर में गोरे-गोरे गाल है घुंघर वाले बाल........ व रंग दे, रंग दे रंग दे जल पिल्लो मोतीचूर रो...... गीतों के स्वर सुनाई दियें।
सांझी बिठाई- नौनिहालों को ढूंढने से पूर्व घरों में सांझी बिठाई गई। महिलाएं सांझ ढलते ही ढंूढ के गीत गाकर बच्चे को आर्शीवाद देती हैं। भतीजा री ढंूढ ढंूढाऊ ऊपर जाऊं वारी जाऊं सा..... गीत से बुआ की, रेशमी रोन पालना जाली का झुल रहा नंदलाल जच्चा रानी का..... से मां की तथा हा रे लाल नान्या रा दादाजी..... गीत से दादा के पोते के प्रति प्रेम का इजहार किया गया। इस मौके पर नगर के ठाकुर अमरसिहजी देवल, गजेन्द्रसिह देवल, हरिशचन्द्रसिह देवल, प्रदीपसिह देवल, राजेन्द्रसिह देवल, हितेन्द्रसिह देवल, महेन्द्रसिह देवल, कल्याणसिह देवल, प्रतापसिह देवल, गुलाबसिह देवल, गोपालसिह देवल, माधुसिहजी देवल, राणसिह देवल, चन्दनसिह देवल, गोपाल सिह  सहित ग्रामीण मौजुद थै।

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