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एंतिहासिक धरोहरों का वार्ड ही सुविधाओं से वंचित,वार्डवासियों ने दिया एक दिवसीय सांकेतिक धरना

नहीं हुआ समस्याओं का समाधान तो होगा आंदोलन तेज @ नवीन वाधवानी जैसलमेर,06 अप्रेल। स्वर्णनगरी पर्यटन के क्षैत्र में दुनिया भर में मशह...

नहीं हुआ समस्याओं का समाधान तो होगा आंदोलन तेज

@ नवीन वाधवानी

जैसलमेर,06 अप्रेल। स्वर्णनगरी पर्यटन के क्षैत्र में दुनिया भर में मशहूर है जिसे देखने देश से ही नही अपितु विष्व के कोने-कोने से इसकी स्थापत्य कला को निहारने सैलानी आते है उसी धरोहरो में नथमल हवेली व पटवा हवेली शुमार है जो वार्ड सात की परिधि में आती है जहां प्रतिवर्ष लाखो सैलानी आते है लेकिन इस वार्ड की सुविधाओं व उसके रख रखाव की बात करे तो उसकी गिनती जीरो से शुरू होकर वही खत्म हो जाती है ओर इसका श्रेर्य जैसलमेर की नगरपरिषद को जाता है अपनी इन्ही पीड़ा व व्यथा को लेकर वार्डावासियों ने कई बार नगरपरिषद को अवगत करवाया लेकर नतीजा सिफर रहा ओर तो ओर वार्ड पार्षद के द्वारा विकास कार्यो पर हुए खर्च को ब्यौरा मांग तो उनका भी उनके पास कोई आधार नही ।इन सभी बातों से व्यथित महिला पार्षद दुर्गा कमलेश छंगाणी के द्वारा अपने वार्ड वासियों के साथ मिलकर जगत विख्यात पटवा हवेली के समाने एक दिवसीय सांकेतिक धरना ओर इन समस्याओं को लेकर उसके उचित निष्पादन के लिये जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। वहीं उनकी मांग है कि इस वार्ड में स्थित बालिका विधालय की छत लम्बे समय से क्षतिग्रस्त है उसका पुर्ननिर्माण हो ताकि बालिकाओं को जिंदगी सुरक्षित रह सके जो कि भय के साये में पढ़ाई के लिये मजबूर है।इसको लेकर वार्ड पार्षद ने आगामी 15 दिनों में विकास कार्यो को करवाने के साथ ही मूलभूत समस्याओं के निस्तारण की मांग की है अगर ऐसा नही हुआ तो आगामी दिनों में आंदोलन तेज होगा।


विकास हुआ तो कहां गये दस्तावेज
पार्षद के द्वारा विकास कोलेकर जब बात कही तो मात्र मौखिक तौर पर चालीस लाख के बजट की बात कही गई जो शायद पार्षद के जहन में नही है जब उसकी सूची व खर्च की बात मांगी ताकि वह अपना पक्ष गिरेबान पकड़ने वाली वार्ड की जनता को बता सके तो उन्हें पांच अप्रेल तक भी वह सूची नही दी गई। अब इस पूरे प्रकरण में एक ही बात सामने आती है कि अगर वास्तविकता में विकास कार्य हुए तो उन दस्तोवजों को कम से कम वार्ड पार्षद को बताने में क्या हर्ज है।

हुआ होता तो जरूर दिखता विकास
बात करे इस वार्ड की तो विकास के नाम पर किये गये 40 लाख अपने आप में बहुत बड़ी रकम होती है अगर वास्तविकता में उतना खर्च हुआ भी है तो वह दिखाता जरूर लेकिन बात करे सबसे पहले दलाल पाड़ा की तो भाटिया भवन से शारदा पाड़ा के बीच में स्थित है उसमें जहां स्पीड ब्रेकर नतमस्तक हो गये है वही सड़क की स्थिति एक दिव्यांग ही बयां कर सकता है जो वह अनुभव करता है । ओर  तो ओर जो भी मूलभूत समस्या है उस पर इतना खर्च अगर हुआ होता तो वार्ड बोलता जरूर। लेकिन इन सबके बावजूद वार्डवासियों का धरना परिषद की कार्यशैली पर जरूर सवालिया निशान लगाता है।

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