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राज्य पशु ऊँट सरंक्षण के अभाव में दर-दर को भटकने पर मजबूर

बाड़मेर/धोरीमन्ना। उपखंड मुख्यालय के कई गांवो मे ऊंटनियो का झुंड देखा जा सकता है सरकार द्वारा राज्य पशु घोषित करने के बाद संरक्षण नही मिल...

बाड़मेर/धोरीमन्ना। उपखंड मुख्यालय के कई गांवो मे ऊंटनियो का झुंड देखा जा सकता है सरकार द्वारा राज्य पशु घोषित करने के बाद संरक्षण नही मिलने पर आज यह पशु भीषण गर्मी मे पानी भोजन के लिए दर दर भटकने को मजबूर है। एक समय जब गांवो के रेतीले धोरो पानी लाने खेती करने ओर आवागमन का मुख्य साधन हुआ करता था। लेकिन आज के युग मे आवारा घुम रहे इस रेगिस्तानी जहाज को बचाना मुश्किल हो गया है, ऐसा ही नजारा उपखंड के मिठड़ा खुर्द ग्राम आवारा घुम रहे एक ऊंटो के झुंड का है, जो पिछले एक महीने से इधर-उधर भटक रहा है सरकारी स्तर पर लुप्त हो रही इस प्रजाति के संरक्षण को लेकर कोई व्यवस्था नजर नही आ रही है। आसपास के इलाके मे लगने वाले पशु मेलो मे ऊंटो की ब्रिकी को कोई खास व्यापारीयो द्वारा खरीद फरोख्त की तवज्जो नही दी जारी है। धोरीमन्ना उपखंड मे ऊंटो की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है।



उपयोगी है ऊंटनी का दुध
चिकित्सको के मुताबिक ऊंटनी के दुध मे वसा कम होने से शुगर, बीपी खुजली,से छुटकारा पाने के लिए उपयोगी होता है, साथ ही शुगर 400 के पार होने के बाद मे उसके लिए ऊंटनी का दूध पीकर सामान्य लेवल लाया जा सकता है।

इनका कहना हैं 
धोरीमन्ना उपखंड क्षेत्र मे ऊंटो की संख्या तेजी से कम होती जा रही है यही स्थिती रही तो यह प्रजाति लुप्त हो जायेगी। 
-लालाराम भील मिठड़ा (ऊंट पालक)

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