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मानसिक तनाव को बीमारी नहीं समझे, अपनों से करें बातःजोशी

बाड़मेर, 08 अप्रैल। मानसिक तनाव को बीमारी नहीं समझे। डिप्रेशन एक मानसिक स्थिति है। इसकी वजह से व्यक्ति खुद को समझ नहीं पाता है। मौजूदा सम...

बाड़मेर, 08 अप्रैल। मानसिक तनाव को बीमारी नहीं समझे। डिप्रेशन एक मानसिक स्थिति है। इसकी वजह से व्यक्ति खुद को समझ नहीं पाता है। मौजूदा समय में बच्चे, युवा, महिलाएं एवं बुजुर्ग मानसिक तनाव के शिकार हो रहे है। इसके बारे में निसंकोच बातचीत करते हुए इसका समाधान निकाला जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मेघवालो की बस्ती आदर्श ढूढा में धारा संस्थान की ओर से केयर्न इंडिया एवं वेदांता के सहयोग से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि रामकुमार जोशी ने यह बात कही।
इस अवसर पर रामकुमार जोशी ने कहा कि इस तरह के आयोजन के पीछे मंशा लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक होगा, तभी वह खुशमय जीवन जी सकता है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संदीप चौैधरी ने कहा कि स्वास्थ्य दिवस का आयोजन का उद्देश्य लोगों में जागरूकता लाना है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही परेशानी का कारण बनती है और हम बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपने स्वास्थ्य प्रति जागरूक होंगे, तभी देश एवं समाज को बेहतर रख सकते हैं। इस दौरान आईटियन दीपक कड़वासरा ने कहा कि सालाना सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। हर वर्ष अलग-अलग विषय पर इसका थीम होता है। इस वर्ष का थीम डिप्रेशन है। डिप्रेशन किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय हो सकता है। उन्हांेने कहा कि वर्तमान समय में अधिकतर युवा पीढ़ी इसका शिकार हो रही है। डिप्रेशन में किसी व्यक्ति को नींद नहीं आना, काम में मन नहीं लगना होता है। यह बहुत बड़ी बीमारी नहीं है। इसका इलाज संभव है। ऐसे लोगों को शीघ्र अस्पताल में लाकर इलाज करा कर सामान्य कर सकते है। बहमकुमारी सुशीला ने कहा कि इस दिन को सेलेब्रेट करने के पीछे उद्देश्य है कि लोगों को उनके स्वास्थय के प्रति जागरूक किया जाए। इसके अलावा सरकारों को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना भी इस दिन को मनाने का कारण है। डा.राधा रामावत ने कहा कि इस दिन को मनाने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है कि इसके जरिए लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों। लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को उठाया जा सके। हर इंसान का स्वास्थ्य अच्छा हो और बीमार होने पर हर व्यक्ति को अच्छे प्रकार के इलाज की अच्छी सुविधा मिल सके। इस दौरान चाइल्ड लाइन समन्वयक सोनाराम चौैधरी ने मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि लोगों को आस-पास स्वस्थ वातावरण बनाकर खुशहाल और स्वस्थ जीवन जीने को प्रेरित किया जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होना ही मानव स्वास्थ्य की परिभाषा है। 
कार्यक्रम के दौरान केयर्न इंडिया के भुवनेश पाठक ने कहा कि समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए उसके नागरिकों का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। ज्योति द्विवेदी ने कहा कि चिंता की बात यह है कि चिकित्सकीय क्षेत्र में नित-नए आविष्कार और अनुसंधानों के बाद भी आज दुनिया की बड़ी आबादी शारीरिक व मानसिक रूप से गंभीर बीमारियों की चपेट में है। निर्मला सिंहल ने तनाव की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कही। धारा संस्थान के मुख्य अधिशाषी महेश पनपालिया ने कहा कि स्वच्छ रहने के लिए सुबह जल्दी उठकर योगा,ध्यान, प्राणायाम करें। उन्होंने कहा कि तनाव मुक्त रहें, खूब हंसे और हंसाएं। साथ ही सकारात्मक सोच रखें। कार्यक्रम के दौरान जादू शो एवं कठपूतली शो के जरिए मानसिक तनाव से मुक्त रहने एवं बेटी बचाओ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

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