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शाही परम्पराओं के साथ हुआ कुंवर विक्रमसिंह का हुआ राजतिलक

रिपोर्टर @ नवीन वाधवानी जैसलमेर। पर्यटन नगरी जैसलमेर में रियासतकालीन परम्पराएं आज एक बार फिर जीवित होती हुई दिखाई दी। जैसलमेर में नाच...

रिपोर्टर @ नवीन वाधवानी

जैसलमेर। पर्यटन नगरी जैसलमेर में रियासतकालीन परम्पराएं आज एक बार फिर जीवित होती हुई दिखाई दी। जैसलमेर में नाचना परगने के पूर्व महारावल किशनसिंह की मृत्यु के बाद आज उनके बड़े पुत्र कुंवर विक्रम सिंह का राज्याभिषेक किया गया और उन्हें महाराज की पदवी से नवाजा गया। जैसलमेर के नाचना हवेली में आयोजित हुए भव्य समारोह के दौरान विक्रमसिंह का वैदिक मंत्रोच्चार और रियासतकालीन परम्पराओं के अनुसार राजतिलक किया गया और उन्हें परगने के महाराज के रूप में घोषित किया गया। इस अवसर पर जैसलमेर जिले के प्रबुद्ध लोगों के साथ साथ आसपास की रियासतों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

आजादी के बाद लम्बे अरसे के पश्चात स्थानीय लोगों को राजपरम्पराओं का जीवन्त रूप देखने को मिला, जैसलमेर के पूर्व महारावल बृजराजसिंह के राज्याभिषेक के बाद यह दूसरा मौका था, जब किसी परगने के महाराज के रूप में किसी कुंवर का राज्याभिषेक किया गया हो। जैसलमेर रियासत के सबसे बड़े परगने के रूप में नाचना को पहचाना जाता है और रियासतकाल से राजपरिवार के सदस्यों को ही परगनों की जिम्मेदारी दी जाती थी।
इसी कडी में नाचना परगने के महाराजा किशनसिंह भाटी पिछले लम्बे समय से इस पद को सुशोभित कर रहे थे, लेकिन पिछले दिनों उनकी मृत्यु के बाद अब उनके पुत्र कुंवर विक्रमसिंह का आज नाचना परगने के महाराज के रूप में राज्याभिषेक किया गया और उन्हें पूर्व महाराजा की पदवी से सुशोभित किया गया। राज्याभिषेक के इस मौके पर मारवाड़ की विभिन्न रियासतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और साथ ही जैसलमेर जिले के ग्रामीण अंचलों और शहरी लोगों ने भी राज परम्पराओं के जीवन्त होने के साक्षी बने।
इस अवसर पर पूर्व महाराजा विक्रम सिंह ने कहा कि अब समय बदल गया लेकिन जो मान—सम्मान और जिम्मेदारी उन्हें यहां की जनता ने दी है, उस पर वे पूरी तरह से खरे उतरने का प्रयास करेंगे और उन्होंने इस भव्य कार्यक्रम में शरीक होने के लिये सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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