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मृत्युभोज एक सामाजिक कुरीति एवं अभिशाप है।

मृत्युभोज एक सामाजिक कुरीति एवं अभिशाप है। किसी व्यक्ति का सामयिक या असामयिक निधन होना उस परिवार के लिए गहरा आघात होता है। दुःख की इस घड़ी म...

मृत्युभोज एक सामाजिक कुरीति एवं अभिशाप है। किसी व्यक्ति का सामयिक या असामयिक निधन होना उस परिवार के लिए गहरा आघात होता है। दुःख की इस घड़ी में शोक संतृप्त परिवार के साथ खड़ा होना और उन्हें ढाँढस बंधाना सभी का दायित्व है।
परंतु इस अवसर को एक उत्सव के रूप में मनाया जाना, सभी को आमंत्रित करना एवं मिठाइयाँ बनाकर लोगों को खिलाया जाना नितांत गलत है। केवल यहीं तक ही नहीं अपितु अफीम की मनुहार जहरीली एवं दानवरूपी प्रथा है जो एक तरफ तो उस परिवार पर आर्थिक बोझ बन जाती है वहीं यह जाजम अफीमचियों की शरण-स्थली बनने के साथ-2 युवा पीढ़ी को भी इसकी चपेट में ले रही है। 
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि इस मृत्युभोज के बहाने अबोध बालकों को प्रणय-सूत्र में बांध दिया जाता है। परिवार, आस-पड़ोस की सभी बालिकाओं का आनन-फानन में रिश्ता तय करके शादी कर दी जाती है। हालांकि इसे पुण्य-प्राप्ति की संज्ञा तक दी जाती है तथापि वस्तुतः इस कुकर्म के सभी सम्भागीगण पाप के बड़े भागीदार ही होते हैं। इस प्रक्रिया में घर की औरतें भी बाल विवाह को प्रोत्साहन देने का कार्य करती है क्योंकि वे भी चाहती है कि इस बहाने उन्हें पीहर-पक्ष से मायरा वगैरा मिल जाएगा। ध्यान रहे कि आजकल बार-बार मायरा और इसमें प्रतिस्पर्धा से यह दहेज का दूसरा रूप बन गया है।
इस प्रकार मृत्युभोज, बाल विवाह, मायरा एवं नशाखोरी से गांव-परिवार की दुर्दशा हो रही है परिणामस्वरूप बालकों की शिक्षा, संस्कार तथा रोज़गार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कम उम्र में पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण रोज़ी-रोटी का संकट उत्पन्न होता है जिसकी पूर्ति हेतु वह अनैतिक एवं अवैधानिक साधनों का इस्तेमाल करने हेतु भी विवश होता है और शनै:शनै: अपराध के चक्रव्यूह में फंसता जाता है। अंततः उसका सम्पूर्ण जीवन नरकमयी बन जाता है।
अतः एक सभ्य समाज में इन कुरीतियों एवं अंधविश्वासों का निवारण अत्यावश्यक है। सम्प्रति प्रशासन द्वारा उक्त कुरीतियों के उन्मूलन हेतु कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उदाहरणार्थ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सांचोर श्री बृजेश पँवार महोदय द्वारा इस दिशा में जो कदम उठाया जा रहा है वो वाक़ई प्रेरणास्पद एवं प्रशंसनीय है जिसमें सभी जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं आमजन हृदय से सहयोग करें तो बेहद सकारात्मक परिणाम आएंगे। पुनश्च, सभी नागरिकों, विशेषतः युवाओं से विनम्र अपील है कि इन कुरीतियों का समूल उन्मूलन करने अपनी महती भूमिका का निर्वहन करें।

साभार रामगोपाल विश्नोई जालोर।

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