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चित्रकूट में हैं भगवान श्रीराम से जुड़े कई धार्मिक स्थल, सबका अपने आप में है अलग स्थान।

चित्रकूट में हैं भगवान श्रीराम से जुड़े कई धार्मिक स्थल, सबका अपने आप में है अलग स्थान। चित्रकूट में भगवान राम का 84 कोसीय त...


चित्रकूट में हैं भगवान श्रीराम से जुड़े कई धार्मिक स्थल, सबका अपने आप में है अलग स्थान।


चित्रकूट में भगवान राम का 84 कोसीय तपोवन क्षेत्र है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान श्री राम, माता- सीता और लक्ष्मण के साथ यहां 11 वर्ष से अधिक का समय बिताया था. यहां भगवान राम से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल हैं।

बलराम शुक्ला सतना से
मध्यप्रदेश/सतना। सबसे प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक चित्रकूट प्रकृति और ईश्वर की अनुपम देन है। यह भगवान राम का 84 कोसीय तपोवन क्षेत्र है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या से 5 वें दिन चित्रकूट पहुंचे और अपने 14 वर्ष के वनवास में से 11 वर्ष से अधिक का समय बिताया।

"चित्रकूट में भगवान श्रीराम से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थान हैं। जैसे कामदगिरी पर्वत, रामघाट, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, सती अनुसूइया, गुप्तगोदावरी, हनुमानधारा और भरतकूप।"

कामदगिरी पर्वत
इस पर्वत का बड़ा धार्मिक महत्व है। जंगल से घिरे इस पर्वत के ताल पर अनेक मंदिर बने हुए हैं। चित्रकूट के लोकप्रिय कामतानाथ और भरत मिलाप मंदिर भी यहां स्थित हैं। यहां परिक्रमा करने के बाद लोग भगवान कामतानाथ की पूजा अर्चना करते हैं।

रामघाट
चित्रकूट का रामघाट घाट वह घाट हैं। जहां प्रभु श्री राम और माता सीता स्नान किया करते थे। इस घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा भी है। घाट पर शाम को होने वाली आरती मन को काफी सुकून पहुंचाती है।

जानकीकुंड
चित्रकूट जानकी कुंड रामघाट से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदाकिनी नदी के किनारे जानकीकुंड स्थित है। जनक पुत्री होने के कारण सीता को जानकी कहा जाता था। माना जाता है कि जानकी माता सीता यहां स्नान करती थीं। जानकी कुंड के समीप ही राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकट मोचन मंदिर है।

स्फटिक शिला
जानकीकुंड से कुछ ही दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनारे यह शिला स्थित है। इस शिला पर भगवान राम और माता सीता के पद चिन्ह मुद्रित है। यहां की किवदंती यह है कि माता सीता जब इस शिला पर खड़ी थी तो भगवान इंद्र के बेटे जयंत ने एक कौवे का रूप धारण कर माता सीता के पैरों में चोच मारी थी।.इस शिला पर भगवान श्रीराम ने माता सीता का पहली बार पुष्प श्रंगार किया था।

सती अनुसूइया
यहां पर एक रथ पर सवार भगवान श्री कृष्ण की बड़ी सी मूर्ति है जिसमें अर्जुन पीछे बैठे हैं। जो महाभारत के दृश्य को दर्शाती है। स्फटिक शिला से लगभग 5 किलोमीटर दूर पर घने जंगलों से घिरा हुआ यह एकांत आश्रम स्थित है। जिसे चित्रकूट में सती अनुसुइया अत्री आश्रम के नाम से जाना जाता है। इस आश्रम में अत्रि मुनि अनुसुइया दत्तात्रेय और दुर्वासा मुनि की प्रतिमा स्थापित है।

गुप्त गोदावरी
चित्रकूट नगर से 18 किलोमीटर दूर गुप्त गोदावरी स्थित है। यहां दो गुफाएं हैं। एक गुफा चौड़ी और ऊंची है. प्रवेश द्वार सकरा होने के कारण इसमें आसानी से नहीं घुसा जा सकता, दूसरी गुफा लंबी और सकरी है। जिसमें हमेशा पानी बहता है। कहा जाता है कि इस गुफा के अंत में राम और लक्ष्मण ने दरबार लगाया था।

हनुमान धारा
चित्रकूट में पहाड़ी के शिखर पर हनुमान धारा स्थित है। इस पहाड़ी में लगभग 3 सौ सीढ़ियां ऊपर चढ़ने के बाद शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है। कहा जाता है कि यह धारा श्री राम ने लंका दहन से आए हनुमान के आराम के लिए बनवाई थी। इस पहाड़ी के शिखर पर ही माता सीता की रसोई हैं। यहां से चित्रकूट का मनोरम एवं सुंदर दृश्य भी देखा जा सकता है।

भरतकूप
चित्रकूट में भरतकूप स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम के राज्याभिषेक के लिए भरत ने भारत की सभी नदियों से जल एकत्रित कर यहां रखा था। अत्रि मुनि के परामर्श पर भरत ने जल एक कूप में रख दिया था। इसी कूप को भरतकूप के नाम से जाना जाता है।
श्रीराम से जुड़े और भी कई महत्वपूर्ण स्थान आपको चित्रकूट में मिल जाएंगे। हर स्थान से जुड़ी अपनी एक खासियत और मान्यता है। चित्रकूट की धरती राम भक्तों के लिए हमेशा ही आस्था का एक बड़ा केंद्र रहेगी।


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