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कोटड़ा, मानव तस्करी की जांच के लिए विशेष टीम पुलिस थाने पहुँची।

कोटड़ा, मानव तस्करी की जांच के लिए विशेष टीम पुलिस थाने पहुँची। देवाराम सेन कोटड़ा से उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में मानव तस्क...

कोटड़ा, मानव तस्करी की जांच के लिए विशेष टीम पुलिस थाने पहुँची।
देवाराम सेन कोटड़ा से
उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में मानव तस्करी की जांच के लिए विशेष टीम कोटड़ा पुलिस थाने पहुँची ।
कोटड़ा से पुलिस थानाधिकारी धनपत सिंह व पुलिस वृताधिकारी भूपेंद्र सिंह के साथ सीआईडी सीबी आईजी गोगाई, अधिकारी पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश जयपुर पुलिस हेडक्वार्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक क्राइम ब्रांच महावीर सिह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंनत कुमार, उपखंड अधिकारी टी शुभमंगला, नायब तहसीलदार सुरेश चंद्र मेहता, कोटडा थाना क्षेत्र के मामेर भूरी ढ़ेपर पहुँचे।
भूरी ढ़ेपर पहुँचने पर दल ने बाल श्रमिकों के साथ परिवार जनों से मुलाकात की।

टीम ने यह भी जानने की कोशिश की वाकई गुजरात सीमावर्ती क्षेत्रों वाकई मानव तस्करी हो रही हैं क्या ? 
परिवार जनों ने बाल मजदूरी करने के सवाल पर आय के अपर्याप्त संसाधन ,खेती के लिए नवीनतम तकनीकों से पूर्व में भी गुजरात जाकर बीटी कपास, वरियाली, अरण्डी गेहूं जैसी खेती करने के तरीकों को सीख कर कोटडा क्षेत्र में खेती कर रहे है।
जिससे यहां के लोग मजदूरी के बहाने नई तकनीकों को सिख कर आना शुरू हुआ।
यहां पर खेती की भूमि कम होने के कारण कई परिवारजन परिवार सहित जाकर गुजरात खेती में मजदूरी करते हैं।
खेती कर अनाज को वापस लेकर आते हैं जीवन यापन करते हैं।

कोटड़ा के नजदीकी क्षेत्र खेड़बह्मा, ईडर, हिम्मतनगर, दांता, पालनपुर, तक मजदूरी करने जाते है, जो कुछ दिन बाद या महीने दो महीने में भी वापस घर पर आ जाते है।
उपखंड अधिकारी टी शुभमंगला ने गुजरात के खेड़बह्मा क्षेत्र के वासना कम्पा में जाकर देखा लेकिन वहां पर स्थानीय मजबूर ही पाए गए जो कपास का काम कर रहे थे।
सीड प्रोसेसिंग यूनिट में भी मौका मुआयना किया जहा भारी संख्या में मजदूर कार्य कर रहे थे लेकिन जांच करने पर सभी मजदूर स्थानीय ही पाए गए।
अधिकतर सीमावर्ती क्षेत्रों से मजदूर देहाडी मजदूरी के लिए जाते हैं लेकिन शाम को पुनः घर लौट आने की बात भी मजबूर वर्ग ने की।
जांच दल के पहुँचने पर मामेर सरपंच पति मोहनलाल आस्था संस्थान के बाबूलाल गमार, आनंदी बेन, सहित सैकड़ों लोगों का जमावड़ा हो गया।
मामेर क्षेत्र में पहली बार कई आला अधिकारियों के साथ आने से भूरि ढ़ेपर गांव में लोगों को आश्चर्य हुआ कि एक साथ इतनी अधिक संख्या में पुलिस अधिकारियों की गाड़ियों से लोगों में भय का वातावरण खड़ा हो गया।
लेकिन ग्रामीण जनो को भरोसा दिलाया गया कि यह टीम ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को जानने के साथ मानव तस्करी के कारणों को जानने व रोकने के पहलुओं पर गौर कर टीम रिपोर्ट देगी।
तक जाकर ग्रामीण लोगों को विश्वास हुआ और खुलकर अपनी बात कहने लगे।

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