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लो जी अब झारखंड में भी चल बसी भाजपा।

लो जी अब झारखंड में भी चल बसी भाजपा। भले ही देश के प्रधानमंत्री व ग्रह मंत्री 370, ट्रीपल तलाक, यूएपीए, अथवा नागरिकता जैसे कानू...

लो जी अब झारखंड में भी चल बसी भाजपा।

भले ही देश के प्रधानमंत्री व ग्रह मंत्री 370, ट्रीपल तलाक, यूएपीए, अथवा नागरिकता जैसे कानून पास करके देश की जनता के खुश होने या समर्थन का दावा कर रहे हो, लेकिन राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र, हरियाणा के बाद अब झारखंड से भाजपा की रूखसती इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता भाजपा से तो खुश हैं लेकिन उसकी नितियों का जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। और कुछ समर्थक तो डर के मारे जिंदाबाद करने में लगे हैं, लेकिन मजेदार बात तो यह है कि सत्ता के घमंड में चूर भाजपा के छोटे बड़े अधिकतर नेता अपनी कमीयों में झांकने को तैयार नहीं है। कल झारखंड के चुनाव परिणाम में मुझे भी उम्मीद थी कि नागरिकता संशोधन कानून आने व मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने से अस्सी बीस के बीच बटी आबादी झारखंड में भाजपा की बंपर बहुमत से वापसी करेगी लेकिन परिणाम आए तो भाजपाइयों को झटका लगा हो या न लगा हो ये तो अहसास नहीं होने देंगे। लेकिन मुझे ऐसा झटका लगा कि मैं बिमार होने के बावजूद बिना लिखें नहीं रह सका। मुझे भाजपा की हार से खुशी नहीं बल्कि इस बात से बेहद खुशी मिली कि देश की जनता अब लकीर की फकीर नहीं बल्कि मुद्दों को समझ चुकी है जिसका मकसद जाति धर्म साम्प्रदायिक अथवा मंदिर मस्जिद नहीं बल्कि कम से कम मूलभूत सुविधाएं चाहती हैं जो उन्हें सत्तर साल की आजादी काटने के बाद गैर भाजपाई सरकारों से नहीं मिल सकी, वह राष्ट्रवादी भाजपा सरकारों में मिल जाएगा, जिस कारण देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा का कमल मजबूती के साथ खिला और सत्ता के घमंड में एक के बाद एक करके दलित ओबीसी सहित सबसे बड़ी संख्या में रहने वाली गरीब जाति का विश्वास तोड़ डाला। और देखते देखते झारखंड भी महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ बन गया। हालांकि खास बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री  देश को मजबूत राष्ट्रभावना रखकर चला रहे हैं जिस कारण वे नुकसान पर नुकसान झेलने के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं है और आपके नेतृत्व में पास किये गए कानून भारत की जनता के लिए भविष्य में वरदान बनेंगे। लेकिन मूलभूत समस्याओं से जूझ रही राज्यों की जनता को अपनी सरकारों पर भरोसा नहीं रहा जिस कारण जनता ने उन्हें चलता कर दिया। यह सोलह आने सच है कि देश के प्रधानमंत्री ने देश का नाम विदेशों में भी रोशन किया है लेकिन भाजपा की राज्य सरकारें अपने देश में भी अपने राज्य का नाम रोशन नही कर सकी।जिस कारण झारखंड जैसे राज्य को राजस्थान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र बनना पड़ा। हालांकि अब मुझे भी लिखते हुए डर लगने लगा है और अन्य की तरह चापलूसी के रास्ते पर चलने लगा हूं। लेकिन  सही बात न लिखना न सिर्फ पत्रकारिता बल्कि देश के भी खिलाफ समझता हूं। इससे पहले भी, भाजपा नेता कृपया ध्यान दें तेजी से गिरने लगा है भाजपा का ग्राफ, शीर्षक से सम्पादकीय प्रकाशित कर चुका हूं क्योंकि कांग्रेसी सरकारों को अपनी समझ से बाहर मानता हूं लेकिन वर्तमान सरकार ने जो रास्ता अपनाया है वह भी जनता की जरूरत के मुताबिक सही नहीं है। प्रधानमंत्री मानें न माने और ना ही उनसे कोई मनवा सकता है लेकिन देश प्रेमी होने के नाते यह कहना जरूरी समझता हूं कि प्रधानमंत्री जी इस देश को बुलेट ट्रेन से पहले अपनी ट्रेन को भरोसे की ट्रेन बनाने की आवश्यकता है। मंदिर मस्जिद से पहले देश की अस्सी प्रतिशत आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, पानी सही करने की आवश्यकता है। विदेशों से दोस्ती तो जरुरी है लेकिन अपने देश में भी दोस्ती का माहौल बनाने की आवश्यकता है। यदि आपने अपनी राज्य सरकारों को ही लोकप्रियता के रास्ते पर चला दिया होता तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं भाजपा को प्रत्येक चुनाव में राज्यों से भागने की आवश्यकता नहीं पड़ती। चलते चलते आपको प्रधानमंत्री बनाने या भाजपा को जीताने की गलतफहमी रखने वाले कान खोलकर सुने, कि मोदी जी पहली बार या दूसरी बार प्रधानमंत्री किसी दिल या दल की वजह से नहीं बल्कि कांग्रेस व उसके अयोग्य नेताओं की वजह से बनें है यदि भाजपा की वजह से बनें होते तो आधा दर्जन राज्यों से भाजपा की रूखसती इस तरह नहीं हो रही होती। अभी सुधार का समय है सबसे पहले तो शोशल मीडिया पर भाजपा या सरकार विरोधियों को खरी खोटी सुनाने वाले भाड़े के टट्टूओ पर लगाम लगाओ क्योंकि सरकार का खुला विरोध ही तो स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। यदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला जारी रहा तो फिर आप प्रधानमंत्री नहीं राजा कहलाएंगे। मुझे आशा है कि भाजपा अब झारखंड की हार से सबक लेकर काम करेगी और अपने मियां मुंह मिठ्ठू बनने की वजाय जनता से प्रशंसा कराएगी वरना किसी दिन किराए के नेता तो दूसरे दलों में चले जाएंगे। और सत्ता की गलतफहमी में  केन्द्र सरकार से भी भाजपा की रूखसती कम से कम मैं तो नहीं झेल सकूंगा।
विनेश ठाकुर सम्पादक
लखनऊ
फिलहाल मुरादाबाद साई अस्पताल से


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