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क्षमा मांगना और क्षमा करना सिखाता हैं निरंकारी मिशन : संत शांतिलाल

क्षमा मांगना और क्षमा करना सिखाता हैं निरंकारी मिशन : संत शांतिलाल वर्षभर में हुई गलतियों की क्षमा मांगने के लिए निरंकारी स...


क्षमा मांगना और क्षमा करना सिखाता हैं निरंकारी मिशन : संत शांतिलाल

वर्षभर में हुई गलतियों की क्षमा मांगने के लिए निरंकारी सेवादलों मनाया क्षमा याचना दिवस।

बाड़मेर। जैसलमेर रोड़ स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार सांय 4 बजे स्थानीय जोनल प्रभारी संत शांतिलाल के सानिध्य में क्षमा याचना दिवस मनाया गया। निरंकारी मण्डल बाड़मेर के मिडीया सहायक हितेश तंवर ने बताया कि निरंकारी मिशन के सेवादल इस वर्ष हरियाणा में आयोजित हुए 72वां अंतर्राष्ट्रीय संत निरंकारी समागम तथा वर्षभर के विविध कार्यक्रमों में वर्ष के अंत में निरंकार परमात्मा का सर्वश्रेष्ठ साकार स्वरूप सतगुरु से जाने - अनजाने में की गई गलतियों की क्षमा मांगने के लिए क्षमा याचना दिवस मनाते हैं। इस दौरान बाड़मेर के आस पास सहित कई जगहों से महिला सेवादल नीली सफेद वर्दी तथा पुरुष खाखि पूर्ण वर्दी में उपस्थित होकर सतगुरु से क्षमा मांगी। मिशन के प्रमुख सतगुरु माता सुदीक्षा ने भी यही कहा कि क्षमा मांगना और किसी को क्षमा कर देना बहुत बड़ी बात हैं। क्षमा मांगने के लिए आत्मशक्ति की जरूरत होती हैं तथा कोई भी व्यक्ति अहंकार नहीं करें हर किसी के सामने झुकना सीखें। 
कार्यक्रम में सेवादारों के सदस्यों द्वारा पीटी परेड गेम तथा मार्चिंग गीत हिन्दू न सिख, इसाई न हम मुसलमान हैं मानवता हैं धर्म हमारा हम केवल इंसान हैं भी गाया। कार्यक्रम के दौरान सभी सेवादारों ने हाथ जोड़कर क्षमा याचना गीत गाकर अपनी गलतियों के लिए सतगुरु से क्षमा मांगी।
कार्यक्रम के अंत में जोनल इंचार्ज संत शांतिलाल ने कहा कि क्षमा मांगना और किसी को क्षमा कर देने की यह शक्ति और साहस सबमे नहीं होती तथा यह इंसान का महान गुण हैं। उन्होंने कहा कि सेवादारों को जो सेवा सौंपी जाती हैं वे उसे खुशी - खुशी करते हैं। चाहे रक्तदान हो या सफाई अभियान या फिर सत्संग हर जगह सेवादार तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि सतगुरु सर्व शक्तिमान होता हैं। जो इंसान सतगुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके गुरु के हुक्म में रहकर प्रभु की भक्ति और मानवता की सेवा करता हैं उसके जीवन में कोई कमी नहीं रहती जीवन खुशियों से भर जाता हैं। उन्होंने कहा कि जहां मिशन आपसी प्रेम - भाव की बातें सिखाता है वहीं एक - दूसरे की गलती हो जाने पर क्षमा करने एवं क्षमा मांगने की भी सीख देता है। उन्होंने कहा कि जहां पर परमात्मा के प्रति प्रेम हैए वहीं स्वर्ग है। गुरु पीर पैगंबरों ने इंसान को प्रेम से जीने की शिक्षा दी है और कहा कि जहां पर नफरत और ईर्ष्या होती है वहां पर अज्ञान का अंधेरा छा जाता है। जब हम सत्संग में आते हैं तो सन्तों महापुरुषों के प्रेरणादायक वचन हमें बुराई के रास्ते पर नहीं जाने देते। सत्संग में आने से जीवन में निर्मलता आती हैं कर्मों में पावनता आती हैं। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन की सेवा शिक्षक सेवादल विनोद कुमार ने की।

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