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कुत्ते ! नहीं नहीं कुत्ते ऐसा नहीं करते

कुत्ते   ! नहीं नहीं कुत्ते ऐसा नहीं करते  बंगाल के पुरुलिया की बात है। दिन शनिवार , 6 नवंबर 2016 गली के चार आवारा कुत्ते...


कुत्ते   ! नहीं नहीं कुत्ते ऐसा नहीं करते 
बंगाल के पुरुलिया की बात है। दिन शनिवार , 6 नवंबर 2016 गली के चार आवारा कुत्ते सात दिन की नन्ही परी की पहरेदारी करते रहे किसी ने उस नवजात को कचरे के ढेर में मरने के लिए फैक दिया था पर कुत्तों ने उसे देखा और तब तक चौकीदारी करते रहे जब तक इंसान वहां न पहुंच जाए उधर से गुजर रहे  शिक्षक उल्ल्हास चौधरी मंजर देख कर अभिभूत हो गए कौए उस नन्ही जान पर हमला करना चाहते थे ,लेकिन कुत्ते मुहाफ़िज बन कर खड़े हो गए फिर बस्ती के लोग इक्क्ठा हुए और उस नवजात को आश्रय स्थल  को सौंप दिया। चूँकि दिन शनिवार था ,बालिका को शनिया नाम दिया गया। आज के माहौल में कहना दुश्वार है कि जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दी गई शनिया को तब तो कुत्तो ने बचा लिया।मगर बड़ी होने पर आदमजात क्या सलूक करेंगे ,कहना मुशिकल है।

 यह कोई इकलौती घटना नहीं है जब  कुत्तो ने किस नवजात को बचाया हो। इसी साल जुलाई में हरियाणा के कैथल में किसी ने छोटी सी गुड़िया को पॉलीथिन की थैली में लपेट कर गंदे नाले में फैक दिया।इंसान ने नाइंसाफी की / मगर कुत्ते तब भी जमा हो गए और भोंक भोक कर जमाना इक्क्ठा कर लिया। लोग आये और गुड़िया को बचा लिया गया।पर कुत्ते  ये जरूर पूछ रहे होंगे कि बदलते भारत में अब गुड़िया का क्या होगा ?  

   यह सर जमीं ए हिन्द है।यहां जगह जगह जानवर और इंसान के बीच रिश्तो की  इबारत लिखी  मिलती है।बंगाल की प्रतिमा देवी गुजिश्ता तीस साल से दिल्ली की झुगी झोंपड़ी में 400 कुतो की परवरिश करती है।उसकी छोटी सी झुगी इन आवारा कुत्तों का आशियाना है। प्रतिमा न आये तो कुत्ते कुछ भी नहीं खाते।दो साल पहले नगर निगम ने उसका आश्रय स्थल जमीदोज कर दिया मगर फिर भी प्रतिमा डटी हुई है।कूड़ा कर्कट इक्क्ठा करती है और उसे बेचती है। इसी से कुतो का पालन करती है।यही उसका परिवार है। यही उसका संसार है।          
        
वर्ष 2017 ,अगस्त का आखिरी हफ्ता। बेंगलोर में 19 साल की गामिनी माँ बाप की इकलौती संतान थी। घर में एक कुत्ता पाल रखा था।एक दिन कुत्ता किसी बीमारी से चल बसा। गामिनी उदास रहने लगी और एक दिन उसने मौत को गले लगा लिया। माँ बाप कहते है हमने बेटी का दिल बहलाने की बहुत कोशिश की। एक कुत्ता और भी लाये। मगर गामिनी अपने पालतू कुत्ते का बिछोह सहन नहीं कर सकी।ये वाकये भारत में इंसान और जानवरो के दरिम्यान संबधो की दास्ताँ सुनाते है। मगर उसी शहर में गामिनी की मौत के चार दिन बाद एक पत्रकार गौरी लंकेश को कुत्ते की मौत मार दिया गया।गामिनी अपने कुत्ते की मौत पर गमजदा थी। पर गौरी की मौत पर बहुतेरे ऐसा कुछ कहते मिले जो यह भावार्थ देता था कि हत्या तो गलत है। मगर गौरी ऐसी थी वैसी थी।     
    
  एक भारत वो है जिसमे गली के आवारा कुत्ते इंसान के हाथो मरने के  लिए छोड़ दी गई बेटी को बचा लेते है,एक भारत वो है जिसमे ईश्वर के हाथो जीने के लिएी छोड़ी गई एक औरत को मौत के घाट उतार दिया जाता है।          यह बदलता भारत है। वो भारत जिसमे इंसानी सवेंदना मौसमी हो जाती है।किसी हत्या पर सड़के  जज्बात के समंदर  से लबरेज हो जाती है।भीड़ में शुमार चेहरे  मानवता का खोल ओढ़े मिलते है। लगता है इंसानियत अभी जिन्दा है। मगर जब बुलंदशहर  में पुलिस इंस्पेक्टर  सुबोध कुमार सिंह के कथित हत्यारे जमानत पर छूटते है ,भीड़ स्वागत करती मिलती है। गोया कोई जंगे आज़ादी का सेनानी जेल से छूट कर आया हो।इंस्पेक्टर सिंह अपनी ड्यूटी अंजाम देते हुये भीड़ के हाथो मारे गए थे। उनकी बेवा रजनी सिंह उसी सवेंदनशील समाज से पूछती है जब फर्ज अंजाम करते मारे गए लोगो के साथ देश साथ न्याय नहीं कर सकता तो फिर किसके साथ इंसाफ होगा। पर उनकी वेदना अनसुनी चली जाती है। क्योंकि सवेंदना मौसमी हो गई है। वो कभी जाति देखती है कभी धर्म।और कभी उप जाति और गोत्र भी।        
    
भारत में किसी अपने पराये की  मौत पर शरीके ग़म होना सबसे नेक काम माना  जाता है /दिल्ली अपने दुलारे नेता पूर्व प्रधान मंत्री वाजपेयी के निधन पर शोकाकुल थी। दिल्ली ने देखा शव यात्रा में शामिल होने आये 80 साल के स्वामी अग्निवेश को हुजूम पीट रहा है।न किसी ने निंदा की ,न किसी ने अफ़सोस जताया। यह उस कवि ह्रदय नेता की अंतिम यात्रा थी जो कह गए थे 'कोई छोटे मन से बड़ा नहीं होता ,टूटे दिल से खड़ा नहीं होता'।इंसानी सवेंदना है ,मौसमी हो गई थी। 
                       
  जून ,2018 /राजस्थान का मरुस्थली क्षेत्र।उस सहरा में एक वाहन ने मोटर साइकिल पर जा रहे तीन लोगो- परमानंद ,चंदाराम और गेमाराम को कुचल दिया।तीनो लहूलुहान थे।साँसे उखड़ रही थी। उनकी बुझती आँखों में  मदद की गुहार थी। लोग सेल्फी लेते रहे।चंदाराम ने उखड़ती साँसों को रोका और हुजूम से जिंदगी की भीख मांगी। पर कोई दिल ऐसा नहीं निकला जो पसीजता।इतने सेल्फिश हो गए  कि  सब सेल्फी लेते रहे।तीनो चल बसे। तीनो मजदूर थे/ उनके परिजनों ने दर्ज किया होगा कि यह नया भारत है। इसमें सवेंदना मौसमी है।      
                                          हर 70 मिनट में एक बेटी दहेज के सबब मार दी जाती है। हम उस घुड़चढ़ी में शामिल होते है जिसमे कोई दूल्हा किसी बेबस बाप से दहेज की सौदेबाजी कर अश्वारोही हुआ है।हर 15 मिनट में एक औरत  बलात्कार की शिकार होती है।हर ढाई दिन  में एक महिला पर तेजाब फेंक देने की वारदात होती है।हर पांचवी मिनट कोई औरत ससुराल में बदसलूकी की शिकार होती है।ये सब हमारे आस पास होती है। पर सवेंदना है ,मौसमी हो जाती है।  

बिहार के डी जी पी गुप्तेश्वर पांडे ने किसी घटना में मीडिया से कहा ' पुलिस अकेले अपराध नहीं रोक सकती। समाज को साथ देना होगा।अपराध तभी रुकेंगे जब समाज खड़ा होगा। जब हम अपराधियों को कभी जाति के नाम, पर कभी मजहब के नाम पर और कभी दल के नाम पर मालाये पहनाएंगे ,स्वागत करेंगे ,जुर्म कैसे रुकेंगे।नहीं जनता कि वो कैसे अफसर है। पर उनकी बात में दम है।  

                                        धार्मिक है आस्थावान भी। ईश्वर जब रूबरू होगा ,उस दिन जरूर हिसाब लेगा और पूछेगा तुम किधर थे ? इंसानियत की तरफ या किसी और जानिब ?    
                  
सियासत तेरी चालाकियाँ अच्छी नहीं लगती है                     
 कफ़न में लिपटी   बेटिया अच्छी नहीं लगती है                      
पहरा ही बैठाना  है तो नफरत पर बैठाओ                      
मुहब्बत के पेरो में बेड़िया अच्छी नहीं लगती है।  
साभार-नारायण बारेठ

नोट -यह फोटो 1996 की है। बंगाल के एक अख़बार में फोटोग्रापर तपन और रिपोर्टर पिनाकी मजूमदार ने एक स्टोरी की थी। जिसमे तीन कुत्ते  लावारिस छोड़ दी गई एक नवजात की पूरी रात  हिफाजत करते रहे। फोटो -साभार इंटरनेट

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