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अब सांप से डर नही लगता : दीपक सेन

अब सांप से डर नही लगता : दीपक सेन दीपक रोज करते है सांपो से दो-दो हाथ, अब तक तीन हजार से ज्यादा सांपो का कर चुके रेस्क्यू, पांच ...


अब सांप से डर नही लगता : दीपक सेन
दीपक रोज करते है सांपो से दो-दो हाथ, अब तक तीन हजार से ज्यादा सांपो का कर चुके रेस्क्यू, पांच सौ कोबरा सांपो को सुरक्षित जंगल में छोड़ा। 

अरूण माथुर 
किंग कोबरा सांप का नाम सुन हर किसी को डर लगने लगता है, क्योकि यह एक ऐसा खतरनाक सांप होता है जो काफी खतरनाक एवं आक्रामक प्रवृति किस्म का होता है। अगर किसी को डस जाए तो इसका जहर इतना जल्दी फैलता है कि वह मात्र 30 सेकण्ड के अन्दर दम तोड़ देता है। कहा तो यहां तक जाता है कि कोबरा जिसका औसतन जीवन काल बीस साल तक का होता है अगर हाथी जैसे विशालकाय जानवर को भी काट ले तो वह मर जाता है। 
कोबरा सांप को लेकर एक किदवंति यह भी है कि वह आंखे नही होेने के बावजूद जमीन में होने वाले कम्पन से भांप जाता है कि कोई उसका शिकार करने के लिए आ रहा है। ऐसे मेे वह सतर्क होकर बैठ जाता है और शिकार करने वाले के पास आते ही वह उस पर जहर उगल देता है। कई बार जहर आंख में जाने से शिकारी अंधा भी हो जाता है। कोबरा सांप के इतना खतरनाक होने के बाद भी बाड़मेर में एक युवक ऐसा है, जो दिन-रात कोबरा सांप से ही दो-दो हाथ करना नजर आता है। 
आमतौर पर यदि किसी को सांप नजर आ जाता है तो वह घबराकर भाग जाता है। और अगर सांप काट जाए तो दहशत से ही उसके प्राण छूटने लगते है। ऐसी परिस्थिति में यह बात कोई मायने नही रखती कि सांप जहरीला था कि नही। मगर बाड़मेर का यह युवक तो सांप से डरता तक नही और यही कारण है कि इस शहर के लोग युवक को उसके असली नाम से कम कोबरा मैन के नाम से ज्यादा जानते है। जी हाँ हम बात कर रहे दीपक सेन की। वह दीपक सेन जो बचपन में सांप को देख खुद सिहर जाता था, पर अब सांप उससे डरने लगे है।
दीपक सेन उर्फ कोबरा मैन को अब किसी सांप से डर नही लगता। बीते पांच छह साल में दीपक तीन हजार से ज्यादा विभिन्न प्रजाति के सांपों के साथ-साथ 500 से ज्यादा कोबरा सांप का रेस्क्यू कर उनका जीवन बचा चुके है, लिहाजा बाड़मेर जिले के लोग कोबरा मैन के नाम से उसे पुकारने लगे है। बता दे कि कोबरा मैन के पास जिले के दूर दराज गांवों से कोबरा सांप पकड़ने के लिए फोन आता है, तो वह सांप को जनता से और जनता को सांप से बचाने के लिए तुरन्त पहॅुच जाता है। दीपक सेन 5 - 6 सांपो का रोज रेस्क्यू करता है। खास बात यह कि दीपक सेन 100 फीट गहरे कुएं से भी कोबरा सांप का रेस्क्यू कर चुका हैं। 
कोबरा मैन दीपक सेन का कहना है कि बचपन मे लोगो को सांप मारते हुए देखता था तो सांपो पर दया आती थी। इसलिए प्रण किया कि अब सांपो को मरने नही दुँगा। सांपों के रेस्क्यू के लिए दीपक ने बाकायदा उदयपुर के वन्यजीव संरक्षण को लेकर काम कर रहे चमनसिह चौहान से कला सीखी। उसका परिणाम है कि वह 5 - 6 सालो में ही 3000 हजार से ज्यादा सांपो का रेस्क्यू कर जंगलो में छोड़ चुके है। 
बाड़मेर को कर्मभूमि बनाया।
उदयपुर में 10 जून 1995 में जन्में दीपक सेन ने सांपो के रेस्क्यू करने की ट्रेनिग चमनसिह चौहान से लेने के बाद वर्ष 2015 में बाड़मेर आकर विभिन्न प्रजाति के सांपों का रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में ले जाकर छोड़ने का काम शुरू किया। सांपों का रेस्क्यू करते उसने बाड़मेर को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया। अब वे इस शहर के युवकों को इस कार्य की ट्रेनिंग दे रहे है, साथ ही युवाओं को मार्शल आर्ट भी सीखा रहे है। 
वन विभाग का भी करते है सहयोग।
कोबरा मैन दीपक सेन को वन विभाग के आला अफसरों ने वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए जब कभी भी याद किया तो वे हाजिर रहे है। संसाधनों की कमी के बावजूद वे वन विभाग की टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते है। दीपक को वर्ष 2018 में उनके सहयोग से खुश होते हुए एक वन अधिकारी विक्रम केसरी प्रधान ने 47 हजार रूपए का ईनाम भी दिया। इस राशि का दीपक ने वन्यजीवों के रेस्क्यू में उपयोग किया।

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