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अब टिड्डी कीटनाशक के लिए किसानों को नहीं करना पड़ेगा भुगतान।

टिड्डी प्रभावित किसानों की सहूलियत के लिए रसायन पर अनुदान प्रक्रिया में बदलाव - अब टिड्डी कीटनाशक के लिए किसानों को नहीं करना पड़...


टिड्डी प्रभावित किसानों की सहूलियत के लिए रसायन पर अनुदान प्रक्रिया में बदलाव
- अब टिड्डी कीटनाशक के लिए किसानों को नहीं करना पड़ेगा भुगतान
- सरकार सीधा सहकारी संस्था को देगी शत प्रतिशत अनुदान
बाड़मेर। कृषि विभाग ने टिड्डी प्रभावित इलाकों में किसानों की सहूलियत के लिए पौध संरक्षण रसायनों पर अनुदान प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब किसान बिना कोई भुगतान किए सहकारी संस्थाओं से रसायन खरीद सकेगा और अनुदान का भुगतान किसानों की खरीद के अनुसार सीधे सहकारी संस्थाओं को कर दिया जाएगा।
कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में किसान को पौध संरक्षण रसायन खरीदने के बाद अनुदान राशि का भुगतान संबंधित कार्यालय की ओर से ऑनलाइन किया जाता है। तात्कालिक जरूरत के मध्यनजर इस आदेश में आंशिक संशोधन किया गया है। नए दिशा - निर्देशों के मुताबिक किसान कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की सिफारिश के अनुसार क्रय - विक्रय सहकारी समिति ग्राम सेवा सहकारी समिति एवं लेम्पस से पौध संरक्षण रसायन खरीद सकेंगे। विभाग ने जरूरी औपचारिकता पूरी करने के लिए सहकारी संस्था पर ही कृषि विस्तार कार्यकर्ता नियुक्त कर दिए हैंए ताकि काश्तकार को बिना किसी दिक्कत के तुरंत रसायन मिल जाए। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसान रसायन की खरीद निकटतम सहकारी संस्थाओं के माध्यम से करें। प्रभावित क्षेत्र में सहकारी संस्था नहीं होने की स्थिति में नजदीकी सहकारी संस्थाओं से कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की सिफारिश अनुसार ही पौध संरक्षण रसायन खरीदें। कृषि मंत्री ने बताया कि काश्तकारों को पौध संरक्षण रसायन उपलब्ध कराने के बाद अनुदान राशि के क्लेम के लिए सहकारी संस्थाएं आवेदक किसानों की सूची जरूरी दस्तावेजों के साथ संबंधित उप निदेशक कृषि (विस्तार) या सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय में प्रस्तुत करेगी। संबंधित कार्यालय क्लेम प्रस्तुत करने पर अनुदान राशि का भुगतान दस दिन में करना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व में जारी अन्य दिशा - निर्देश यथावत रहेंगे। उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग ने किसान हित में गत 27 दिसंबर को संशोधित आदेश जारी कर टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में पौध संरक्षण रसायनों पर अनुदान 50 फीसदी या पांच सौ रूपए से बढ़ाकर वास्तविक लागत या अधिकतम एक हजार रूपए जो भी कम हो प्रति हैक्टेयर किया था।



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