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दोस्तों नमस्कार इस पोस्ट को पढ़कर आत्ममंथन करने की जरूरत है

✍ कैलाश बिश्नोई         माणकी   दोस्तों नमस्कार इस पोस्ट को पढ़कर आत्ममंथन करने की जरूरत है, मैं बात अपने सांचोर की करता हूं क...

✍ कैलाश बिश्नोई
        माणकी  
दोस्तों नमस्कार इस पोस्ट को पढ़कर आत्ममंथन करने की जरूरत है,
मैं बात अपने सांचोर की करता हूं कि सांचोर को राजस्थान का पंजाब यहाँ 5 नदियां चलने की वजह से कहा जाता है, मगर आज यहाँ नशे की वजह से भी सांचोर को राजस्थान का उड़ता पंजाब कहा जा सकता हैं।

सांचोर रानीवाड़ा भीनमाल क्षेत्र के करीब 30 गांव ऐसे है जो इस भयानक रूपी नशे की चपेट में है। जिक्र सांचोर तहसील के पुर, सरनाऊ, सांकड़, सेडिया, गुंदाऊ, वोढा, खारा, केरवी, डावल, डेडवा, सांगड़वा, सिवाड़ा हालीवाव केरिया और रानीवाड़ा के मोखातरा, मीरपुरा, कोटड़ा, सेवाड़ा, सांतरू, करवाड़ा, कूड़ा, करड़ा का थलीबेरा, इत्यादि।
भीनमाल तहसील के भालनी, डूंगरवा, गांवड़ी, सेवड़ी, कुछ हिस्सा पूनासा का, वाड़ा भाडवी, लाखनी ये जसवंतपुरा तहसील के बासड़ा धनजी, कुछ हिस्सा मोदरां और मोदरान स्टेशन उपरोक्त गांव जो इस स्मेक की चपेट में है।

धोरीमन्ना के कबूली, मानकी, भारते की बेरी (खारी), बांड मोखावा, बारासन, भी इससे ग्रसित है पर उतने नहीं जितने जालोर के उपरोक्त गांवो में है।
गांव में कोई शादी मुकलावा जान कोई भी समारोह हो ये ना तो निमंत्रण का इंतजार करते है, ना ही किसी के समारोह की व्यवस्थाओं का ध्यान रखते है, 20 से 30 युवा पहुँच जाते है, और वहाँ पे इच्छानुसार खाना खाकर अपने स्थान पर लौट जाते है।

अब ये गहन चिंता का विषय है कि युवा इस राह पर कब गया क्यों गया कैसे गया? अब इसका हल क्या है। इन गांवो में आने के लिए रिश्तेदार, महिला, बहिन- बेटी अकेले आने से कतरा रहे है, क्योंकि इससे ग्रसित युवा अपनी आपूर्ति के लिए किसी भी हद जा सकता है। गांव के निवासी आने वाली महिला, बेटियों को उनके आवागमन में हिफाजत की सलाह अवश्य देते है, मगर इसके निवारण का उपाय कोई नहीं सोचता। इसके लिए जितना वो युवा दोषी है, उतने ही उस गाँव के निवासी दोषी है, जो इस समस्या का हल नहीं कर सकते है।

अपना गांव जल रहा है, अपना घर जल रहा है, सब मूकदर्शक बन कर तमाशा देख रहे है। इस ख़ौफ़नाक मंजर और हालात का सामना हम कब तक करेंगे? क्या इससे निपटने में सभी को हिचकिचाहट क्यो है, कोई आगे क्यों नही आता ये महत्वपूर्ण सवाल है।

उतरी कोरिया ने हाइड्रोजन बम बनाया और अपने यहाँ मानवरूपी हाइड्रोजन बम हर गोचर में जाल के नीचे कैर के नीचे या किसी थोर के पीछे आसानी से मिल जायेंगे। आने वाले राहगीर के लिए वो किसी अमरनाथ यात्रा से कम नहीं है। सकुशल पहुचने पर मेजबान पूछता है कोई सोल्डा आडा तो फिरया नि? अब इतने विकट परिस्थितियों में वो इन युवाओं से ये नहीं पूछ सकते कि तुम्हें ये काम (नशा) करने से आखिर मिलना क्या है? इसका हश्र क्या होगा ये बात कोई नहीं बोल पा रहा है।

तू पुड़ी लेर आव हुँ इह जाल हेटी बैठो हूँ, मेरो व्हाटसोप बन्द है, लास्ट 2929 आला चालू है, आँ माते फोन करि जते हु इत बैठो हूं! लास्ट 29 नम्बर जो कि अपने आप को महान जम्भसेवक मानने वाला युवा क्या कर रहा है, ये बात उस खुद को पता नहीं हैं कि में किस मार्ग पर हूँ, इसका नतीजा क्या रहेगा मेरे मां-बाप, मेरे बच्चो का क्या होगा? ये सारे रिश्ते ताक पर रख कर युवा भटक गया और मानव रूपी दानव में तब्दील हो गया। उनके पीछे आने वाली पत्नी का हाल क्या होगा जिनके बच्चे है उनका का हाल होगा? ये तक नहीं सोचते बस स्मेक मिलनी चाहिए। और अपना काम होना चाहिए। येन-केन प्रकारेण कैसे भी अपने नशे की आपूर्ति होनी चाहिए। बहिन भाई से कतरा रही है, बाप बेटे से कतरा रहा है, रिश्ते तार तार होते जा रहे है आखिर कब तक जारी रहेगा?

पुराने समय मे ज़ब बहिन बेटी को गाड़ी चढ़ाने के लिए उसके ससुराल से सांचोर तक आता थे, उससे आगे वाली बस गांव में बहिन के गांव का कोई भी जाति का आदमी मिल जाता तो उसको भुलावन दे के कह देते ये फलाने की लड़की है, आपके गांव की है इसको घर तक पहुंचाने का जिम्मा आपका है और वो अपनी बहिन समझकर उसे घर तक छोड़ कर भी आता था। मगर आज के हालात बहुत बदल गए। सगे भाई से बहिन भयमुक्त नहीं है। सोचो ऐसा क्यों हो रहा है ???

इसके निवारण के लिए ठोस कदम उठाने की अति आवश्यकता है। इसके गांव में पंच सरपंच या बुजुर्ग आदमी के के देखरेख में 50 लोगों की एक कमेटी बनाकर, इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए कि अपने गांव में ये क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है, अब आगे से नही होने देंगे। चाहे कोई नशेड़ी हो उसको बक्शा नहीं जाएगा। इसके लिये पुलिस प्रसाशन की जरूरत नहीं है क्योंकि ये कभी नहीं चाहते कि इस गांव का भला हो। उन्हें इस प्रकार के माहोल में ज्यादा फायदा है क्योंकि शांति रहने से इन्हें कुछ मिलने वाला नहीं है। समय रहते हुए अगर इस विषय पर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय मे इसके परिणाम बहुत घातक हो सकते है।

हर युवा पढ़ा लिखा है जागरूक है समझदार है इसलिए इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाने में आगे आना चाहिए। क्योंकि इसमें लिप्त आदमी अपना भी कुछ ना कुछ लगता है इसलिए सभी से निवेदन है आप इस के सहयोग करे गांव में बैठक बुलाकर इस पर चर्चा की जाए। इससे निजात पाने के लिए अपना सकारात्मक पक्ष या राय रखे।

दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नस्ल को पतन की और जाने बचाओ इस नस्ल में सुंदरता, कलेजे, आत्मविश्वास की कोई कमी नही है। घर आये मेहमानों को खिलाने कभी पीछे हटते। कभी ओछी सोच नहीं रखते मगर इस आदतन नशे ने सत्यानाश कर दिया। फिर उसका सेवन करने के लिए ऐसे रास्ते मजबूरी में अपना लेते है

समाजसेवी, स्कूल का प्रिंसिपल, सरपंच, पंच (चौधरी), BLO, ग्रामसेवक भी इसके लिए सहयोग करें ताकि ये इस गांव को वापस गुलजार बना सके।

अल्फाजो में दम कहाँ , बयां करे  मन के भावो को
यों मन रखने को मान लेता हूँ, मै शायर के दावो को
मुस्कराने वाले भी दिखे सहलाते, यारा मन के घावो को
पहुंच किनारे ठोकर मारे, देख मतलबी नावो को
जग के संग हम भी हँसे, भूलके सब अभावो को
बांहे पतवार थाम न पाई, दोष दे  क्यों गांवो को 🙏🙏 🙏🙏

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