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चौहटन, खुले आम गलियों में फेंका जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट।

चौहटन, खुले आम गलियों में फेंका जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट। बाड़मेर/चौहटन ( विपिन भंसाली ) कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य के...

चौहटन, खुले आम गलियों में फेंका जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट।

बाड़मेर/चौहटन ( विपिन भंसाली ) कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण की व्यवस्था होने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से लागू नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। अस्पताल परिसर की दीवार के पीछे कूड़े के साथ - साथ बायोमेडिकल कचरे को भी फेंका जा रहा है। यहाँ सैकड़ों की तादात में मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीज अस्पताल आते हैं। इन मरीजों के इलाज के पश्चात इंजेक्शन दवाइयां सब इन गलियों में फेंक दी जाती है, जिससे पीछे गली में आम रास्ता पूर्ण रूप से मेडिकल वेस्ट से भरा पड़ा रहता है।

बायो मेडिकल वेस्ट नियमानुसार लाल, नीले और पीले रंग के डिब्बों में डाला जाता है। उसी के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक भट्ठी से बायो मेडिकल वेस्ट जलाना होता है। भट्ठी की चिमनी कम से कम 200 फीट ऊंची होनी चाहिए ताकि पर्यावरण प्रदूषित न हो। अस्पताल के आसपास रहने वाले निवासियों के लिए यह एक गंभीर समस्या बनी हुई है। कई मर्तबा राहगीरों के पैरों में भी कई संक्रमित सुई चुभ जाती है जिससे आए दिन बीमारी  फैलने का खतरा बना रहता है। कचरा उठाने के लिए ग्राम पंचायत के सफाई कर्मचारियों का भी कहना है कि उन्हें भी इंफेक्शन का डर रहता है। हर रोज अस्पताल से प्लास्टिक की बोतलें और कचरा फेंकने से इस आम रास्ते पर लोगों का निकलना दूभर सा हो गया है। बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल को लेकर हॉस्पिटल मैनेजमेंट बिल्कुल गंभीर नहीं है। खुले में बायो मेडिकल वेस्ट फेंकने से बीमारियों को फैलने का खतरा हर समय बना रहता है। अब देखना यह है कि अस्पताल प्रबंधन खबर प्रसारित होने के बाद कितना जागरूक होकर बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कर आमजन की इस बड़ी समस्या से राहत दिला पाता है।

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