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बाड़मेर, विद्यालयों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित।

बाड़मेर, विद्यालयों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित। बाड़मेर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं सचिव, जिला विधिक सेव...

बाड़मेर, विद्यालयों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित।

बाड़मेर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजीज खान के निर्देशों की पालना में गुरूवार को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर आमजन में जन जागृति हेतु संस्कार चिल्ड्रन एकेडमी सीनियर सैकण्डरी विद्यालय, इन्दिरा कॉलोनी, बाड़मेर एवं किशन बाल निकेतन माध्यमिक विद्यालय अम्बेडकर कॉलानी, महावीर नगर, बाड़मेर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन पीएलवी वजादीन एवं पीएलवी भीयाराम द्वारा किया गया।

तालुका विधिक सेवा समिति अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने बताया कि इस अवसर पर संस्कार चिल्ड्रन एकेडमी विद्यालय के प्रधानाचार्य भँवरलाल विश्नोई ने विद्यालय में उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि भारतीय संविधान सामाजिक न्याय की आधारशिला पर खड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और लैंगिक आदि रूपों से पिछड़े तबकों को बराबरी पर लाने के लिए कई अहम प्रावधान किए हैं। बीते सात दशक में हमने इस दिशा में काफी प्रगति भी की है, लेकिन कई मोर्चों पर लंबा सफर तय करना अभी बाकी है। उन्होंने संविधान में वर्णित कई अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि सभी नागरिकों को कानून की नजरों में बराबर मानते हुए समान कानूनी संरक्षण देने की व्यवस्था करता है। उन्होने बताया कि धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर किसी तरह के भेदभाव को निषिद्ध करता है। छुआछूत, मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी, बाल-श्रम आदि दंडनीय अपराध हैं, इनमें सजा का प्रावधान है।

किशन बाल निकेतन के प्रधानाध्यापक किशनाराम देम्बा के विद्यालय में उपस्थित छात्र-छात्राओं को बताया कि 6 से 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा, महिलाओं को पुरूषों के समान जीविका के अवसर और वेतन देने की व्यवस्था है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न दंडनीय अपराध है। उन्होने समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के बारे में बताते हुए कहा कि कन्या भू्रण हत्या, दहेज प्रथा, बाल-विवाह, पर्दा प्रथा, डाकन प्रथा, यदि किसी जगह पर घटित हो रहा है तो यह कानूनी अपराध है, इसमें सजा का प्रावधान है। दुनिया में लोगों के बीच कई तरह के भेदभाव पैदा हो रहे हैं, जोकि लोगों के बीच एक दूरी का कारण बना है। इन भेदभाव के कारण कई लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं दुनिया में इस तरह की बुराईओं को खत्म करने के लिए हर साल ‘विश्व सामजिक न्याय दिवस’ मनाया जाता है।
पैरा लीगल वालिन्टियर वजादीन और भीयाराम ने नालसा/रालसा की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं, स्थाई लोक अदालत, राष्ट्रीय लोक अदालत, मध्यस्थता केन्द्र, निःशुल्क विधिक सहायता, पीड़ित प्रतिकर स्कीम आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

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