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मुमुक्षु पूजा संखलेचा बनी साध्वी सहजप्रज्ञाश्री संयम जीवन की यात्रा कि प्रारम्भ।

मुमुक्षु पूजा संखलेचा बनी साध्वी सहजप्रज्ञाश्री संयम जीवन की यात्रा कि प्रारम्भ। बाड़मेर। मुमुक्षु पूजा संखलेचा का वर्षों से संजोय...

मुमुक्षु पूजा संखलेचा बनी साध्वी सहजप्रज्ञाश्री संयम जीवन की यात्रा कि प्रारम्भ।

बाड़मेर। मुमुक्षु पूजा संखलेचा का वर्षों से संजोया स्वप्न साकार होने जा रहा था। प्रातः 6 बजे परमात्मा की अंतिम बार अष्टप्रकारी पूजा, स्नात्र पूजा करने के बाद दीक्षा मण्डप में आई, जहां दीक्षा प्रदाता खरतरगच्छाधिपति मुनि मणिप्रभ सूरिश्वर ने दीक्षा का विधि विधान प्रारंभ किया। अलसुबह ही हजारों की जनभेदनी पंडाल में दीक्षा देखने के लिए उपस्थित हो गई थी। देखते ही देखते वो घड़ी आ गई और गच्छाधिपति के करकमलों से मुमुक्षु पूजा संखलेचा को रजोहरण प्राप्त हुआ और रजोहरण मिलते ही मुमुक्षु पूजा बहन खुशी से झूम उठी और नृत्य करते हुए वेश परिवर्तन के लिए चली गई और कुछ समय बाद रंगबिरंगे वस्त्रों व आभूषणों का त्याग कर श्वेत श्रमण वेश धारण कर दीक्षा मण्डप में आई और गच्छाधिपति ने दीक्षा सूत्र प्रदान कर मुमुक्षु पूजा संखलेचा को जैन भागवती दीक्षा अंगीकार करवाई ओर नूतन नाम साध्वी सहजप्रज्ञाश्री प्रदान कर गच्छााधिपति कि निश्रा में प्रवर्तिनी शशिप्रभाश्री की शिष्या घोषित किया।

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