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चौहटन, पहले दिन आरती के साथ हुआ नानी बाई मायरे का आगाज।

चौहटन, पहले दिन आरती के साथ हुआ नानी बाई मायरे का आगाज। जोगाराम चौधरी  बाड़मेर/चौहटन। नव सृजित ग्राम पंचायत मुकने का तला के ...

चौहटन, पहले दिन आरती के साथ हुआ नानी बाई मायरे का आगाज।

जोगाराम चौधरी 
बाड़मेर/चौहटन। नव सृजित ग्राम पंचायत मुकने का तला के भीलासर नाडी के जगदम्बा मन्दिर परिसर में तीन द्विवसीय नानी बाई मायरे का आगाज आरती के साथ हुआ। पहले दिन धार्मिक कथा नानी बाई रो मायरो का आयोजन किया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में पहुंचे। मदन सोनी ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि नानी बाई रो मायरो अटूट श्रद्धा पर आधारित प्रेरणादायी कथा है। 

कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का गुणगान किया जाता है। भगवान को यदि सच्चे मन से याद किया जाए तो वे अपने भक्तों की रक्षा करने स्वयं आते हैं। सोनी ने कथा का झांकियों के साथ विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि नानी बाई रो मायरो की शुरूआत नरसी भगत के जीवन से हुई। नरसी का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में आज से 600 साल पूर्व हुमायूं के शासनकाल में हुआ। नरसी जन्म से ही गूंगे - बहरे थे। वो अपनी दादी के पास रहते थे। उनका एक भाई - भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था। एक संत की कृपा से नरसी की आवाज आ गई तथा उनका बहरापन भी ठीक हो गया। नरसी के माता - पिता गांव की एक महामारी का शिकार हो गए। 

नरसी का विवाह हुआ लेकिन छोटी उम्र में पत्नी भगवान को प्यारी हो गई। नरसी का दूसरा विवाह कराया गया। समय बीतने पर नरसी की लड़की नानीबाई का विवाह अंजार नगर में हुआ। इधर नरसी की भाभी ने उन्हें घर से निकाल दिया। नरसी श्रीकृष्ण के अटूट भक्त थे। वे उन्हीं की भक्ति में लग गए। भगवान शंकर की कृपा से उन्होंने ठाकुर जी के दर्शन किए। उसके बाद तो नरसी ने सांसारिक मोह त्याग दिया और संत बन गए। उधर नानीबाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लायक हो गई किंतु नरसी को कोई खबर नहीं थी, कथा के बीच भागीरथ रावल, रुपाराम प्रजापत, प्रेम, द्वारा गाए गए मधुर भजनों पर पंडाल में बैठे श्रद्धालु झूम उठे। पहले दिन गोसाईराम मुढण ने प्रसादी का लाभ लिया, कार्यक्रम के दौरान प्रभुराम मुढण, पुरखाराम सियोल, जोगाराम बुढि़या, हरजीराम मुढण, दुर्गाराम मुढण, हरिश, नेमाराम नाई, सहित सैकड़ों लोग मौजुद रहे।

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