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सिणधरी, सरकारी अस्पताल से डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान।

सिणधरी, सरकारी अस्पताल से डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान। बाड़मेर/सिणधरी ( कैलाश गोस्वामी ) सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद भी बाड़मेर...

सिणधरी, सरकारी अस्पताल से डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान।

बाड़मेर/सिणधरी ( कैलाश गोस्वामी ) सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद भी बाड़मेर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकल रहा है। आज हमारी टीम पायला कल्ला भाटाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची जहाँ पर चिकित्सक सहित पूरा स्टाफ नदारद मिला। पायला कला में एक नर्स रेणु बाला मिली, वही भाटाला में भी 2nd मेल नर्स भैराराम बेनिवाल मिले, डॉक्टर सभी जगह नदारद मिले। ग्रामीणों को उच्च चिकित्सा सेवा देने का सरकार का दावा खोखला दिखाई देता नज़र आ रहा है। डॉक्टर नहीं मिलने की वजह से मरीजों को इलाज के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

भाटाला व पायला कला में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुराने ढर्रे पर चल रहा है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं तो डॉक्टर भी मनमानी पर उतारू है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां अक्सर डॉक्टर अपने केबिनों से नदारद रहते हैं। शनिवार को भी डॉक्टर ओपीडी से नदारद दिखे। ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर अस्पताल मे कभी आते ही नहीं हैं। दस बारह दिन में एक बार आते है, और हस्ताक्षर कर वापस चले जाते है। जब चाहे उस समय अस्पताल पहुंचते हैं, और जब मर्जी तब चले जाते हैं। इसके चलते मरीजों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। घंटों मरीज डॉक्टरों के इंतजार में लाइनों में खड़े रहते हैं, लेकिन जब खड़े होने की हिम्मत नहीं होती, तो मायूस होकर अस्पताल से लौट जाते हैं। अभी हाल ही में विधानसभा में भी इस बात को लेकर मुद्दा उठाया था, तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नीमहकीमों पर नकेल कसने की बात कही थी, और चिकित्सा सेवा सुधारने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए, डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी थी। इसके बावजूद भी डॉक्टरों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं हुआ है।


आइए क्या बोले मरीजअस्पताल में मौजूद भाटाला निवासी युवक देवीलाल ने बताया कि वह अस्पताल में दवाई लेने के लिए आया है। लेकिन, यहां काफी देर से डॉक्टर ही नहीं आए हैं।


अस्पताल में मौजूद भाटाला निवासी बुजुर्ग रणजीत सिंह राठौड़ का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए बार - बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी डॉक्टर नहीं मिलते, तो कभी दवाई। वह परेशान हैं।

अस्पताल में मौजूद गुमानसिंह ने बताया कि मेगा हाइवे पर हमेशा हादसे होते रहते है, अस्पताल में जख्म पर मरहम - पट्टी के लिए कई वाहन चालक आते है, लेकिन मरहम पट्टी करने और देखभाल करने वाला कोई नहीं है। जिसके लिए काफी परेशानी रहती है।

यहां उपस्थित नारायण राम बांगड़वा ने बताया कि डॉक्टर को देखे हुए कई दिन हो गए हैं। ग्रामीणों को दूर 100 किलोमीटर दूर या 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

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