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अब सहकारी भूमि विकास बैंकों में ऋणआवेदन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन।

अब सहकारी भूमि विकास बैंकों में ऋणआवेदन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन। - गोल्ड लोन एवं एग्रो प्रोसेसिंग क्षेत्र में कार्य करेंगे बैं...

अब सहकारी भूमि विकास बैंकों में ऋणआवेदन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन।

- गोल्ड लोन एवं एग्रो प्रोसेसिंग क्षेत्र में कार्य करेंगे बैंक
बाड़मेर। राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक के प्रशासक एवं अतिरिक्त रजिस्ट्रार द्वितीय जी.एल. स्वामी ने कहा कि भूमि विकास बैंकों के माध्यम से किसानों के ऋण आवेदन की प्रक्रिया को शीघ्र ही पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ऋण वसूली एवं विधिक कार्यवाही को भी पोर्टल के माध्यम से सम्पन्न किया जायेगा। इससे ऋण प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता आएगी तथा मॉनिटंरिग भी प्रभावी हो सकेगी।
उन्होेंने कहा कि सहकारी भूमि विकास बैंकों में भर्ती के लिए शीघ्र ही सहकार भर्ती बोर्ड आवेदन आमंत्रित करेगा। उन्होंने कहा कि भूमि विकास बैंकों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में ऋण वितरण के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है।
राष्ट्रीय सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक्स फैण्डरेशन, मुंबई के प्रबंध निदेशक श्री के.के. रविन्द्रन ने कहा कि बदलते समय में ऋण वितरण की प्रक्रिया को सरल करते हुए किसान पर कम किस्त अदायगी का शेड्यूल बनाना चाहिए ताकि वह समय पर ऋण की अदायगी कर सके। उन्होंने कहा कि बैंक द्वारा व्यवसायिक विविधिकरण की ओर आगे बढ़ते हुए मल्टी सर्विस देने पर जोर दिया जाए ताकि तरलता की समस्या नही आये तथा बैंक प्रबंधन को भी ऑन फंड क्रियेट करने पर ध्यान देना होगा।उन्होंने कहा कि जिन भूमि विकास बैंकों की स्थिति अच्छी है उन्हें गोल्ड लोन एवं एग्रो प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में कार्य करना चाहिए। राजस्थान के सहकारी भूमि विकास बैंकों को कर्नाटक, केरल, तेलगांना जैसे राज्यों के मॉडल को अपनाते हुए कार्य करना होगा ताकि ऋण असंतुलन जैसी स्थितियों से सहकारी भूमि विकास बैंकों को उभारा जा सके। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्राथमिक भूमि विकास बैंकों का अध्ययन कर उनके अनुरूप योजनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि बैंकों को ऋण वसूली पर ध्यान देना चाहिए।
प्रबंध निदेशक एसएलडीबी जितेन्द्र शर्मा ने कहा कि भूमि विकास बैंकों द्वारा फसली ऋण वितरण के लिए नाबार्ड से आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि भूमि विकास बैंकों के सदस्यों को 3 लाख रूपये तक के व्यक्तिगत ऋण देने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक विविधिकरण की ओर बढ़ते हुए ऋणों का नियमित चुकारा करने वाले ऋणी सदस्यों को नकद साख सीमा ऋण उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर कार्य योजना बनाई जा रही है।
शर्मा ने कहा कि भूमि विकास बैंकों से ऋण वितरण की प्रक्रिया को नया लुक दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऋण वितरण की पुरानी अवधि में समय के अनुसार फेरबदल किया जा रहा है। उन्होेंने कहा कि नाबार्ड की ऋण नीति के अनुसार ऋण वितरण में विविधता को प्रमुखता दी जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि नाबार्ड पुनर्वित्त की ब्याज दरों में कमी लाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 - 20 में 230 करोड़ का दीर्घकालीन कृषि ऋण किसानों को वितरित किया जा रहा है।

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