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मारवाड़ का सागवान" रोहिड़ा" पर फूलों की बहार।

मारवाड़ का सागवान" रोहिड़ा" पर फूलों की बहार। बाड़मेर जिले के गिड़ा क्षेत्र से हमारें सवांदाता सरुप प्रजापत ने यह कवरेज ...

मारवाड़ का सागवान" रोहिड़ा" पर फूलों की बहार।

बाड़मेर जिले के गिड़ा क्षेत्र से हमारें सवांदाता सरुप प्रजापत ने यह कवरेज भेजी हैं। मारवाड़ का सागवान एवं राज्य पुष्प रोहिड़ा के फूलों की सुंदरता किसी से छुपी नहीं है। फूलों ने इन दिनों खुशबू बिखेरनी शुरू कर दी है। रोहिड़ा वृक्षों पर फूलों की इन दिनों बहार छाई हुई है। रोहिडा के वृक्ष हालांकि यहां काफी कम संख्या में है। केसरिया रंग के फूलों से लदे वृक्ष देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो उठते है। 75 वर्षीय जेताराम प्रजापत हीरा की ढाणी ने चंद कहकर रोहिड़े की विशेषता बतायी। 

“रोही को राजा रोहीड़ो, चटकीलै रंग फूल, मस्त करै मिंजर की सौरम, लुळै नीमड़ा झूल...।"
रोहिड़ा प्रजाति का वैज्ञानिक नाम टेकामेला अन्डयूलेटा कहते है। इसे “मरुशोभा’ की उपाधि दी गयी है। ऐसे में इस वृक्ष की लकड़ी का फर्नीचर काफी मजबूत और टिकाऊ होने से इसे देसी सागवान भी कहा जाता है। इस दौरान पिछले लंबे समय से प्रतिबंध इस वृक्ष की चोरी छुपे इसकी कटाई होने के कारण रोहिड़ा अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। फूलो की बाहर रोहिड़े की तसवीर हीरा की ढाणी गाँव के खेत में लगे पेड़ की है।

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