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तप जीवन को निर्मल बनाता है : मनितप्रभसागर

तप जीवन को निर्मल बनाता है : मनितप्रभसागर बाड़मेर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त जिनमणिप्रभसूरीश्वर के शिष्य प्रखर प्रवचनकार  मनि...

तप जीवन को निर्मल बनाता है : मनितप्रभसागर

बाड़मेर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त जिनमणिप्रभसूरीश्वर के शिष्य प्रखर प्रवचनकार  मनितप्रभसागर ने आराधना भवन में प्रवचन के दौरान तप की महता बताते हुए कहा कि जैन धर्म तप प्रधान है। कुछ तप ऐसे है, जिनकी आराधना स्वयं तीर्थंकर भगवन्तों ने की। जैसे आदिनाथ भगवान ने वर्षीपत किया, महावीर स्वामी भगवान ने मासक्षमण आदि तप किए पर कुछ तप ऐसे है जो उनके द्वारा उपदेश में बताये गए है, जैसे सिद्वीतप आदि।
तप जीवन को निर्मल बनाता है, तप से स्वास्थ्य ठीक रहता है आदिनाथ परमात्मा के तप का लक्ष्य कर्ममुक्ति, समाधि, साधना, शान्ति और मनशुद्वि था। तप से इच्छाएँ समाप्त हो जाती है उसे कर्म और पाप के कवच को भेदा जाता है, आदिनाथ भगवान ने 400 दिन के तप का पारना श्रेयांस कुमार के हाथों से किया। यह तप वर्षीतप के रूप में प्रसिद्व है। हजारों आराधक हर वर्ष इस तप के द्वारा आत्मा की शुद्वि करते है।

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