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अपनी जान पर खेलकर कोरोना के सैंपल लेकर निकलता हैं निर्मोही।

अपनी जान पर खेलकर कोरोना के सैंपल लेकर निकलता हैं निर्मोही। बाड़मेर। विश्वभर में अपने पंख पसार चुके कोरोना के संक्रमण को रोकने...

अपनी जान पर खेलकर कोरोना के सैंपल लेकर निकलता हैं निर्मोही।

बाड़मेर। विश्वभर में अपने पंख पसार चुके कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए दुनियाभर में कर्मवीर जीतोड़ मेहनत और अपनी लग्न से आमजन को बचाने में लगे हुए हैं। इस महामारी के संक्रमण का पता लगाने के लिए लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही इस दौरान कई टेस्ट भी किये जाते हैं जिससे कोरोना पॉजिटिव का पता लगाया जा सके। इन टेस्टिंग के बाद उन सैम्पलों से लैब में भेजा जाता हैं। कई बार मेडिकल स्टाप को लोगो की स्क्रीनिंग ओर टेस्टिंग के लिए दूर - दराज के गांव ढाणियों में जाना पड़ता हैं। उन्हीं जगहों से लिये नमूनों को पता करने के लिए लैब में भेजा जाता हैं। टेस्टिंग के दौरान लिए गए सैम्पलों को सावधानी के साथ जिला मुख्यालय पर लाया जाता हैं, उसके बाद इन सैम्पलों की पैकिंग की जाती हैं जो तीन तरह की प्रक्रियाओं से गुजरती हुई थर्मोकोल के बॉक्स में पैकिंग होती हैं। बाड़मेर जिले भर के सैम्पलों को सावधानी से एंबुलेंस द्वारा जोधपुर पहुंचाया जाता हैं। जोधपुर से फिर इन सैम्पलों को देश के उच्चतम स्तर की लेबोरेटरी में भेजा जाता हैं। बाड़मेर जिले से भी इन दिनों रोजाना सेंपल जोधपुर लैब में भेजे जाते हैं। इन सभी सेंपल को लेकर जाने वाले राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर के प्रयोगशाला सहायक प्रेमसिंह निर्मोही बताते हैं कि जिले में सेंपल इकठ्ठा करने के लिए अलग - अलग टीम लगी हैं। उन सैम्पलों को पेकिंग करके बाड़मेर जिला मुख्यालय ओर बालोतरा दोनों जगहों के सेंपल लेकर हमारे साथी एंबुलेंस पायलट बालाराम गौड़ के साथ जोधपुर के लिए निकल पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि सुबह लैब में 10 बजे से जाँच कार्य, दोपहर में 2 से 6 बजे तक रिपोर्ट वितरण, दिन भर में आये कोरोना संदिग्ध मरीजो की सेम्पलिंग, लेबलिंग, पैकिग करके शाम को रोजाना रात में मेडिकल कॉलेज, जोधपुर पहुँचाकर सुबह तक वापिस बाड़मेर आना ओर, फिर वही सुबह से शुरू यही दिनचर्या हैं इन दिनों। जब हमने पूछा कि आपको इस कार्य के दौरान घर पहुंचने में काफी समय लगता होगा ऐसे में आपको परिवार की चिंता तो होती होगी। इस पर उन्होंने बताया कि परिवार की चिंता करने बैठ जाएंगे तो यह कार्य कौन करेगा। मनुष्य जीवन मिला हैं तो इस समय देश मे मानवजाति पर आए संकट को दूर करने में लगाने में क्या हर्ज हैं। मेरी ड्यूटी को में हमेशा बेहतर तरीके से करने की कोशिश में रहता हूँ जिससे मेरे साथियों को भी कार्य करने में आनंद मिले। आज भागदौड़ ज्यादा हैं कोई बात नहीं आम दिनों में इतनी भागमभाग नहीं रहती हैं। आज इस परिस्थिति में पूरा देश बचाव में लगा हैं। ऐसे में मेरा भी फर्ज बनता हैं जिससे में निभाने में लगा हूँ। कई तरह की बिमारिया आई और हमने पूरे आत्मविश्वास और दुगने उत्साह व अनुभव के चलते उसे जड़ से मिटाने का प्रयास किया अबकी बार वायरस मानव निमि॔त है थोड़ा समय लगेगा मगर लॉकडाउन के चलते युद्ध हम जरूर जीतेंगे।  
निर्मोही ने बताया कि नियुक्ति से लेकर अब तक एक भी दिन अवकाश नही लिया व ना ही लेने का कोई विचार है। अपनी छोटी साली का 26 मार्च को देहांत हो गया मगर लॉक डाऊन और अपने कर्तव्य के चलते शामिल ना हो पाने की ग्लानि व दुःख हुआ फिर भी अपने कर्तव्य पर डेटा रहा।

बाड़मेर घर पर परिवार जनो के नही होने पर स्थिति और भी विकट हो गई, कपड़े धोना, खाना तैयार करना, और अपने कार्य पर पहुँचना। उन्होंने बताया कि घर के बाहर दशामाता पूजन के दौरान दीपक की लौ से कपड़े चपेट मे आने से छोटी साली झुलस गई थी, लॉकडाऊन से पहले परिवार जनो को देखभाल के लिए जोधपुर महात्मा गांधी चिकित्सालय छोड़ना पड़ा जो अब तक जोधपुर में ही हैं।

निर्मोही अपने सीएमएचओ आॅफिस के मलेरिया निरीक्षक डॉक्टर कुन्दन सोनी, बाड़मेर पीएमओ बीएल मंसुरिया, बाड़मेर माइक्रोबायलोजी विभाग, बाड़मेर एमएल खत्री को आदर्श मानते हैं।

कुछ जानकर लोगों का कहना हैं कि आम दिनों में भी निर्मोही बाकी कर्मचारियों से अलग कार्य करते हुए रहते हैं उन्होंने कभी अपने कार्य को लेकर कोई लापरवाही बरतने की कभी कोशिश भी नहीं कि होगी। हर दिन ड्यूटी के अलावा भी कई कार्यो के लिए अपने आपको अलर्ट रखते हैं।

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