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मंगलमुखी समाज पर कोरोना का अमंगल साया।

मंगलमुखी समाज पर कोरोना का अमंगल साया। @मुकेश पाल सिंह सिरोही/पिंडवाड़ा। इस समय फसलों के कटने के साथ देश प्रदेश में  वैवाहिक, धार्म...

मंगलमुखी समाज पर कोरोना का अमंगल साया।

@मुकेश पाल सिंह
सिरोही/पिंडवाड़ा। इस समय फसलों के कटने के साथ देश प्रदेश में  वैवाहिक, धार्मिक व सामाजिक आयोजनों का दौर चलता है ।वैवाहिक व मांगलिक आयोजनों के अवसर पर उल्लास और खुशियो को बढ़ाने के लिए लोग पेशेवराना संगीतकारों और बैंड वालो की सेवाएं लेते है। बैंड वालो व संगीत का व्यवसाय करने वालो के लिए यह समय सीजन का होता है, जिसमे ये लोग साल भर की कमाई का जुगाड़ करते है। अक्षय तृतीया वैवाहिक सावो का अबूझ मुहूर्त माना जाता है। परीक्षाओ के समापन के साथ स्कूल कॉलेजो में अवकाश पड़ने के कारण ज्यादातर परिवार अपने शादी लायक बच्चो के विवाह एवं अन्य तयशुदा सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमो का आयोजन करते है। ऐसे में वे लोग अपने मांगलिक प्रसंगों को रोचक व मनमोहक बनाने के लिए इन संगीत साधको की सेवाएं लेते है। हम देखते है कि बैंड वाले व संगीतकार कलाकार अपनी सुरीली संगीत प्रस्तुतियों से यजमान के खास आयोजन में चार चांद लगा देते है।कार्यक्रमो में शरीक लोग इनकी कलाकारी पर मुग्ध होकर नाचने पर मजबूर हो जाते है।

इस समय हमारा देश प्रदेश ही नही बल्कि पूरी दुनिया कोरोना महामारी से बचाव की भरसक लड़ाई लड़ रहे है। पूरे देश और सभी राज्यो में सम्पूर्ण लॉक डाउन व अनेक जगह कर्फ्यू लगाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपने नागरिकों की जान बचाने के लिए कड़े सुरक्षात्मक उपाय किये है जिसके चलते वैवाहिक, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक व शैक्षणिक कार्यक्रम प्रतिबंधित कर दिए है जिसकी बहुत जरूरत भी है। कोविड़ 19 महामारी को देखते हुए आमजन ने भी अपने सभी प्रकार के आयोजनों को स्थगित कर दिया है। यदि किसी ने अपवाद स्वरूप शादी ब्याह किया भी है तो मात्र दो पांच लोगों की उपस्थिति में औपचारिकता निभाई होगी वह भी कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन करते हुऐ।

जब सबकुछ लॉक डाउन हो चुका है तो ऐसे हालात में बैंड बजाने व संगीत के व्यवसाय से जुड़े लोगों  के लिए हालात बहुत मुश्किलात भरे हो गये है। वैवाहिक व अन्य आयोजनों की तिथियो को लेकर किये गए समस्त अनुबंध स्वतः निरस्त हो चुके है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर इन कलाकार मजदूरों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। पूरे वर्ष भर इन लोगो को इस सीजन की बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है क्योकि इसी दौर में ये संगीत साधक मजदूर वर्षभर की घर चलाने लायक कमाई कर लेते है परन्तु इस बार ऐसा नही है। कोरोना वायरस की अमंगलकारी दस्तक ने इस व्यवसाय से जुड़े गरीब लोगों की रोजी रोटी  का जरिया ही समाप्त कर दिया है।आज ज्यादातर परिवार फांका कशी के संकट से जुंझ रहे है। लॉक डाउन की वजह से बैंड व गाने बजाने के धंधे पर पूर्णतया निर्भर लोग दूसरा कोई रोजगार भी नही कर पा रहे है।

जहाँ तक बैंड बजाने और गाने बजाने से जुड़े लोगों का सवाल है तो इसमें ज्यादातर परिवार परम्परागत  रूप से अनुसूचित व अल्पसंख्यक वर्ग के तबके ही शरीक है। यह धंधा सीजनल ही चलता है और साल के अन्य दिनों में कभी कभार ही काम मिलता है। बेंड वाले लोग खाली समय मे गाने बजाने का रियाज करते है ताकि अनुबंधित तिथियो पर बढ़िया से बढ़िया प्रस्तुति दे सके। बैंड पार्टी चलाने वाले लोग अपनी जरूरत के लिहाज से महीने ओर साल के हिसाब से कलाकारों को अनुबंधित करके उन्हें अग्रिम रकम देकर निवेश करते है साथ ही  आवश्यकतानुसार साजो सामान ओर वाद्ययंत्र खरीदते है जिससे उनकी साख व रुतबा बना रहे। इसके लिए लाखों रुपयों का कर्ज करते है परंतु इस बार कोरोना संकट ने इन लोगो को तबाह करके कही का नही रखा।

मुख्यधारा से कटा हुआ सर्वथा उपेक्षित और नेतृत्वहीन यह कलाकार तबका आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। किसी को कही से कोई उम्मीद नजर नही आती। सरकारों द्वारा भी कभी इस कला उपासक संगीतकारो की तरफ कोई विशेष ध्यान देने की जहमत नही उठाई। सभी सुविधाओं से महरूम यह वर्ग अपने परिवार और बच्चो के सुनहरे भविष्य को लेकर बहुत हताश है और सरकारों से उम्मीद करता है कि उनकी कोई सुध ले। इनके लिए अच्छी तालीम के लिए सुविधायुक्त आवासीय विद्यालय खोलते हुये इन परिवारों को विशेष पहचान पत्र जारी कर तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ मिले जिससे इनकी मद्धम पड़ती जिन्दगी में उम्मीद की लौ रोशनी कर सके।

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