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कोरोना के ख़िलाफ़ महाभारत की लड़ाई में भोपालगढ के पांच पांडव।

कोरोना के ख़िलाफ़ महाभारत की लड़ाई में भोपालगढ के पांच पांडव। @राम प्रसाद सैन जोधपुर/भोपालगढ। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के...

कोरोना के ख़िलाफ़ महाभारत की लड़ाई में भोपालगढ के पांच पांडव।

@राम प्रसाद सैन
जोधपुर/भोपालगढ। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन में सरकारी चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी, लैबकर्मी, वार्ड बॉय, सफाईकर्मी समेत अन्य कार्मिक जी-जान से जुटे हुए हैं। इनमें लैब टेक्नीशियनों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, लैब टेक्नीशियन ही कोरोना योद्धा के तौर पर संबंधित रोगियों का सेम्पल लेता है। ऐसे में भोपालगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के 5 लैब टेक्नीशियन कोरोना वायरस की लड़ाई में भोपालगढ़ के पांच पांडव बनकर जोधपुर में पिछले 10 दिनों से लगातार कोरोना योद्धा के रूप में सराहनीय सेवा दे रहे हैं। मुख्य ब्लॉक चिकित्सा प्रभारी अधिकारी डॉक्टर दिलीप चौधरी ने बताया कि आसोप अस्पताल के लेब टेक्नीशियन मंछाराम व बाबुलाल, भोपालगढ के रामवतार, कुड़ी के भोमाराम व कोसाना अस्पताल के जमील जोधपुर में कोरोना वायरस के तहत आने वाले मरीजों के सैंपल लेकर लगातार अपनी सराहनीय सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यह जोधपुर के जूनी चौकी, नवचोकीया, नागोरी गेट,  उदय मंदिर में टीम बनाकर कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल ले रहे हैं। अपनी सेवा देने के बाद रघुनाथ धर्मशाला, रेलवे स्टेशन में रुकते है।

पीपीई किट व एन 95 मास्क ही है सहारा:
लैब टेक्नीशियनों की मानें तो मरीज का जांच के लिए नमूना लेते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं रख सकते हैं। ऐसे में मरीज और लैब टेक्नीशियन के बीच की दूरी नहीं के बराबर होती है। दूसरे मरीज के ओरोफेरेंजीएल या नेजीफेरेंजीयल स्वाब लेते वक्त मरीज को खांसी आती है। कई बार तो उल्टी भी हो जाती है। इसकी वजह से संक्रमण का खतरा सदैव बना रहता है। हालांकि इस दौरान ये पीपीई किट, एन 95 मास्क व ग्लव्ज पहनते हैं।

प्रारम्भिक लक्षण है मुख्य आधार: बीसीएमएचओ डॉक्टर दिलीप चौधरी ने बताया कि संदिग्ध व संक्रमित व्यक्ति की प्रारम्भिक पहचान उसके लक्षणों, कोरोना संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क, प्रभावित क्षेत्र की यात्रा के आधार पर की जाती है। संक्रमित व्यक्ति के गले में खरास व श्वास लेने तकलीफ एवं हल्का बुखार के लक्षण पाए जाते हैं। इनकी प्रमुख जांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर सीबीसी करवाकर संदिग्ध का अनुमान लगाया जाता है। अन्य वायरस में सीबीसी में टीएलसी घट जाती है एवं लिम्फोसाइट्स की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन कोरोना संक्रमित व्यक्ति में सीबीसी में लिम्फोसाइट्स की संख्या घट जाती है।


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