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लॉकडाउन में जाने केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की दिनचर्या।

लॉकडाउन में जाने केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की दिनचर्या। दिल्ली/जयपुर/बाड़मेर। वीडियो कॉन्फ्रेंस, औचक दौरे, कभी - कभी देर रात त...

लॉकडाउन में जाने केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की दिनचर्या।

दिल्ली/जयपुर/बाड़मेर। वीडियो कॉन्फ्रेंस, औचक दौरे, कभी - कभी देर रात तक ऑफिस या निवास में काम करना और पूजापाठ व योग के लिए समय निकालना- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी की कोविड-19 को लेकर 24 मार्च को अभूतपूर्व देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही यह दिनचर्या सी बन गई है।

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी लॉकडाउन के दौरान पिछले एक महीने से किसानों एवं आमजन की समस्याओं के समाधान एवं समन्वय के लिए दिल्ली में ही रुके हुए हैं। अपने मंत्रालय के रोज़मर्रा के कामकाज़ से जुड़ी बैठकों में भाग लेने के अलावा वे प्रतिदिन अपने संसदीय क्षेत्र बाड़मेर-जैसलमेर के अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से भी बात करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर महामारी के खिलाफ अभियान में आए अवरोधों को हटाने के प्रयास भी करते हैं।

साथ ही कैलाश चौधरी कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाने और सामाजिक दूरी के महत्व पर ज़ोर देने के लिए सोशल मीडिया पर भी बहुत सक्रिय है।

ज़िम्मेदारियों को लेकर तत्पर : किसानों की खरीफ फसल खरीद एवं कृषि उत्पादों के परिवहन से सम्बंधित वस्तुओं की बेरोकटोक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ज़मीनी स्थिति के आकलन के लिए अपने सहयोगियों के साथ कृषि मंत्रालय एवं निवास स्थान पर नियमित बैठकों में भाग लेते हैं।

खुद के लिए भी निकालते हैं समय : इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी दैनिक पूजापाठ और सुबह योग के लिए भी थोड़ा समय निकालते हैं। इसके साथ ही कई बार कैलाश चौधरी रसोई में खाना पकाने के साथ ही पूसा कैम्पस में कृषि कार्यों में भी हाथ आजमाने निकल पड़ते हैं। समय-समय पर वे सोशल मीडिया के माध्यम से इसके फोटो भी शेयर कर रहे हैं।

किसानों और आमजन के लिए हर समय सजग : बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद कैलाश चौधरी को संसदीय क्षेत्र के अलावा राजस्थान के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में प्रभावित आमजन समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क कर रहे हैं और वे इस संबंध में सम्बंधित अधिकारियों से फोन एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात करते हैं। सारी अतिरिक्त ज़िम्मेदारियां उन्हें देश के कृषि राज्यमंत्री का दायित्व निभाते हुए पूरी करनी पड़ रही हैं। यानि उन्हें अपने मंत्रालय से जुड़ी बैठकों में भी भाग लेना होता है। उदाहरण के लिए, गत सप्ताह उन्होंने लोकडॉउन के दौरान किसानों की फसल एवं कृषि उत्पादों के परिवहन की समस्या से निपटने की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं।

मंत्रालय की ज़िम्मेदारियों को निभाने के साथ ही कैलाश चौधरी ने जनता की मदद के विभिन्न अभिनव तरीकों को भी अपनाया है। चौधरी ने अपने कार्यालय एवं निवास पर मिनी कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएं कर रखी है, जिसे उनके कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी एवं निजी सहायक संचालित करते हैं।

चौधरी ने अपने परिचितों के ज़रिए प्रसारित अपना मोबाइल नंबर दिया हुआ है और साथ में ये संदेश कि भोजन, आवास या परिवहन संबंधी समस्या आने पर प्रभावित लोग उन्हें कॉल कर सकते हैं।

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा, ‘ऐसे व्यक्ति को सिर्फ अपना नाम, पता, फोन नंबर देना और ज़रूरतमंद लोगों की संख्या बतानी होती है। इसके बाद टीम सहायता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों के प्रशासनिक अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय करती है।

खुद के खर्चे से भेंट किए सेनेटाइजर कैबिन : कैलाश चौधरी ने बताया कि मैंने मेरे संसदीय क्षेत्र की सभी 8 विधानसभाओं में 1-1 लाख रुपये और पीएम केयर फंड में 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता राशि सांसद निधि कोष से भेंट की है। इसके अलावा मैंने देश और आमजन के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए 1 लाख रुपये पीएम केयर फंड में और दर्जनों सेनेटाइजर कैबिन बाड़मेर जिला प्रशासन को भेंट किए हैं।

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