Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

धोरीमन्ना उपखंड क्षेत्र में कैर सांगरी की बहार।

धोरीमन्ना उपखंड क्षेत्र में कैर सांगरी की बहार। - महंगे मीनू की शान बन चुके है कैर सांगरी बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना उपखंड सह...

धोरीमन्ना उपखंड क्षेत्र में कैर सांगरी की बहार।

- महंगे मीनू की शान बन चुके है कैर सांगरी
बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना उपखंड सहित समूचे क्षेत्र में तथा सीमांत एवं रेगिस्तानी बाड़मेर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच मौसमी सब्जियों की बहार आई हुई है।
लोगों को इन दिनों ऐसी सब्जियों का बेसब्री से इंतज़ार रहता है और वे इन्हें सूखाकर साल भर के लिए काम मे लेते है। रेगिस्तानी ग्रामीण इलाकों का मुख्य भोजन बाजरी के सोगरे के साथ कैर, सांगरी की सब्जी मुख्य आहार रहा है। इन दिनों पेड़ पौधों पर कैर सांगरी बहुतायत में मिल रही है जिसे ग्रामीण तोड़कर घरों में सुखाने रखते है और साथ ही ताज़ा सब्जी भी इसी की बनती है।
समय के साथ ग्रामीण संस्कृति पर शहरों की छाया और बढ़ती सुविधाओ के चलते आजकल गांवो में कैर, सांगरी खेजड़ी के पेड़ पौधों पर ही लकदक होकर लटक रही है। ग्रामीण भी अब खेजड़ी के पेड़ पर चढ़ कर सांगरी उतारने और कैर की कंटीली झाड़ियों से कैर निकालने मे बच्चे, महिला-पुरुष ग्रामीण अंचलों मे कैर सांगरी बीनते नजर आते है।राजस्थान के कल्प वृक्ष नाम से मशहूर खेजड़ी के पेड़ पश्चिम सरहदी बाड़मेर जिले सांगरी की बहार से लटालुम होकर प्रकृति की शोभा बढ़ा रहे है। वही इलाकों के गांवो के नाडी तालाबो के इर्द-गिर्द कैर के पेड़ पौधे भी कैर आने से मध्यम वर्ग के लोगो के लिए ग्रामीण इलाकों मे मेवे के रूप सुखाकर सब्जी, कढ्ढी बनाने मे काम लिये जाते रहे है। इसके अलावा वन विभाग के वन क्षेत्रों में भी बहुतायत में कैर सांगरी लगती है।वर्तमान समय में जहां शहरी क्षेत्र में कैर सांगरी की सब्जी स्टेट सिंबल के रूप में शादी विवाहों और बड़े होटल रेस्टोरेंट के महंगे मीनू की शान बन चुके है तो खुले बाजार में कैर सांगरी की कीमत आसमान छूने लगे है।जबकि ग्रामीण इलाकों में इस वक़्त कैर सांगरी से पेड़ पौधे लटालूम पड़े है। जम्भेश्वर पर्यावरण एवम् जीवरक्षा प्रदेश संस्था मीडिया प्रभारी भंवरलाल विश्नोई ने बताया कि केर, सांगरी की सब्जी खाने से पेट का हाजमा ठीक रहता है। वही केर का अचार बनाने के बाद कई दिनों तक काम मे लिया जा सकता है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इन्हे सुखाकर साल भर के लिए सब्जी अचार बनाकर काम मे लिया जा सकता है।

गांव से फाइव स्टार होटलों तक
गांव की झोपड़ी से निकलकर देश के फाइव स्टार होटलों की थालियों मे जगह बना चुके मारवाड़ के मेवों के नाम से मशहूर कैर, सांगरी इन दिनो काजू-बादाम से भी महंगी हो गई है।कैर,सांगरी की सब्जी खराब नही होने के कारण घरों मे इन्हें प्राथमिकता से बनाया जाता था। अब महंगी दरों के कारण इनका नियमित सेवन मध्यम वर्गीय परिवारों के बस की बात नही है। शादी समारोह या पर्वो पर ये सब्जीया आज भी शौक से बनाई जाती है। ओर ग्रामीण अंचलों से लेकर बड़े बड़े शहरो तक हमेशा डिमांड रहती है।

कोई टिप्पणी नहीं