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एक छोटे से गाँव के तीन दोस्त कोरोना के सामने दीवार बनकर खड़े हैं।

एक छोटे से गाँव के तीन दोस्त कोरोना के सामने दीवार बनकर खड़े हैं। @राम प्रसाद सैन जोधपुर/भोपालगढ़। क्षेत्र के हीरादेसर गाँव...

एक छोटे से गाँव के तीन दोस्त कोरोना के सामने दीवार बनकर खड़े हैं।

@राम प्रसाद सैन
जोधपुर/भोपालगढ़। क्षेत्र के हीरादेसर गाँव के डॉ. राधेश्याम मेघवाल पुत्र गिरधारीलाल मेघवाल वैसे तो हर रोज गंभीर बीमारी टीबी के मरीजों का इलाज करते है, और इस गंभीर बीमारी को भी मात देने में माहिर टीबी स्पेशलिस्ट है, जोधपुर के सबसे बड़े क्षय रोग अस्पताल में नियुक्ति है, लेकिन वर्तमान में कोरोना वायरस महामारी जो जोधपुर में फैलती जा रही है, उसको देखते हुए मथुरादास माथुर अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने में लगे हुए थे, अब 14 दिन के लिए कोरोंटिन पर होटल में है।

वही हीरादेसर के किशन मेघवाल पुत्र भीयाराम नर्सिंग ऑफिसर मथुरादास माथुर अस्पताल में अपनी सेवाएं कोरोना वायरस मरीजों के वार्ड में दे रहे हैं। हर रोज कोरोना वायरस मरीजों के साथ रहते हैं हर समय खतरा बना रहता है।
किशन मेघवाल ने बताया कि गाँव में मां-बाप से वीडियो कॉलिंग के द्वारा  बात होती है। पिताजी देश सेवा को ही सबसे बड़ी सेवा का आशीर्वाद देते हैं, वही घर में छोटी बच्ची व पत्नी से वीडियो कॉलिंग के जरिए बात होती है।
जोधपुर हॉटस्पॉट होने के कारण  हमारा दायित्व बढ़ गया है, मरीजों की सेवा में ही समय निकल जाता है, लेकिन सावधानी से खुद को बचाते हैं व कोरोना पॉजिटिव मरीजों की भी सेवा में लगे हुए हैं।
किशन मेघवाल ने बताया कि घर में एक छोटी बच्ची है हर समय अपनी मम्मी से पूछती रहती है पापा कहां गए, कब लौटेंगे, फोन पर ही क्यों बात कर रहे हैं, अमूमन ड्यूटी के बाद जब घर लौटते हैं तो बच्ची के साथ में खेलना व शरारतें करना अच्छा लगता है, लेकिन अभी देश सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है, और हम लोगों की मजबूरी भी है, हम अपने घर पर नही जा रहे हैं, परिवार की रक्षा के लिए नियमों का पालन कर रहे हैं। वीडियो कॉलिंग के जरिए ही  बच्ची के साथ नटखट शरारतें कर लेते हैं, मन बहल जाता है ओर अपने आप को तरोताजा कर नई ऊर्जा के साथ देश सेवा में लग जाते हैं।

वहीं हीरादेसर के हंसराज बंशीवाल पुत्र जगदीश बंशीवाल महात्मा गांधी अस्पताल मे नर्सिंग ऑफिसर के पद पर नियुक्त हैं, अस्पताल में कोरोना प्रोजेक्टिव मरीजों की सर्जरी डिपार्टमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लगातार ड्यूटी के बाद घर ना जाने की मजबूरी है तो मरीजों की सेवा  भी हमारे लिए जरूरी है। जिस प्रोफेशन के लिए हम आए हैं उसका फर्ज निभाने का मौका मिला है।

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