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लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हम हमारी जिम्मेदारी को अच्छे से समझे।

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हम हमारी जिम्मेदारी को अच्छे से समझे। यदि लॉक डाउन 3 मई को खत्म हो जाता है, तो भी हमें सोशल डिस्टेंस...

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हम हमारी जिम्मेदारी को अच्छे से समझे।

यदि लॉक डाउन 3 मई को खत्म हो जाता है, तो भी हमें सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखना होगा, सोशल गेदरिंग से बचना होगा। अब जीवन पहले जैसा नही जीया जाएगा क्योंकि वैक्सीन जब तक नहीं बनेगी तब तक कोरोना वायरस के अगले वर्षों तक सक्रिय रहने की संभावना बनी रहेगी। यदि हम सजग नही रहेंगे तो संक्रमण पुनः फैलने में देरी नही लगेगी। विश्व पटल पर भारत की छवि अच्छी बनी है क्योंकि भारत ने अन्य देशों के मुकाबले कोरोना से जंग जीती है। फिर भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्तियों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा भी हुआ है। हाँ इतना कहना हमारे लिए सुखद अनुभूति करवाता है कि संक्रमित व्यक्तियों की संख्या अन्य देशों की तुलना में भारत में धीमी गति से बढ़ी है, खास बात यह भी कि भारत में संक्रमित हुए अनेक लोगों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गयी है, वे एकदम स्वस्थ हो गए है। 

यदि सावधानी, सजगता, सोशल डिस्टेंसिंग नही रखी तो चिंता अब भी है, आगे भी रहेगी क्योंकि यह कोरोनाकाल वैज्ञानिकों के मुताबिक बिना वैक्सीन के लगभग यूँही कहर बरपाता रहेगा। 
इसलिए हम सबको अपनी अपनी जिम्मेदारी समझने हुए, बहुत जरूरी काम हो तो ही घर से बाहर निकलना चाहिए। मुँह पर मास्क, हाथों पर सेनेटाइजर, 2 गज दूरी का ख्याल आगे आने वाले समय में भी रखना ही होगा। शादी विवाह, उज्मणा, भोज, त्योहार, पर्व आदि अवसरों पर फिलहाल निमंत्रण देना बंद करना होगा। मृत्युभोज, सामूहिक लंगर, सामूहिक नमाज, सामूहिक विशाल जम्मा -जागरण, भजन संध्या, मॉल व होटलों पर लॉक डाउन के नियमों के अनुसार ही आगे भी पालना की जानी चाहिए।
भविष्य में सबसे ज्यादा डिस्टर्ब होगा तो वो शिक्षा के क्षेत्र में होगा क्योंकि एक ही स्कूल में 500 से लेकर 1000 तक की स्टेन्थ में सोशल डिस्टनसिंग का ध्यान कैसे रखा जाएगा, कैसे पढ़ाई होगी, यदि ऑनलाइन पढ़ाई होगी तो कैसे होगी? अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क नही है, न ही स्मार्ट फोन। इस सम्बंध में सरकार व प्रशासन को बहुत सी मशक्कत करनी पड़ेगी। चलो यह तो भविष्य के गर्त की बातें है, फिर भी हम चाहेंगे कि अपने भारत की अर्थव्यवस्था पुनः पटरी पर लौटे, लोगों की दिनचर्या सामान्य रूप से चले क्योंकि सिर्फ लॉक डाउन से ही कोरोना वायरस से मुक्ति नही मिलेगी, इसके लिए वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने के लिए प्रयासरत है, आशा करते है, जल्द वे इसमें सफल होंगे।

कोरोना रोकथाम की वैक्सीन बनने बाद बेझिझक किसान खेतों में काम करेंगे, विद्यार्थी व अध्यापक विद्यालय जाएंगे, कर्मचारी दफ्तरों में जाएंगे, श्रमिक अपने कार्यस्थल पर जाएंगे, सभी अपने अपने कार्यों में लगेंगे।
लेखक पेशे से शिक्षक है 
- नरपतराम जांगिड़ भारतीय पनावड़ा

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