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राजस्थान में शिक्षकों में बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा।

राजस्थान में शिक्षकों में बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा। @मुकेश पाल सिंह सिरोही/पिंडवाड़ा। राजस्थान के शिक्षकों में कोरोना संक...

राजस्थान में शिक्षकों में बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा।

@मुकेश पाल सिंह
सिरोही/पिंडवाड़ा। राजस्थान के शिक्षकों में कोरोना संक्रमण का खतरा गहरा गया है।राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश सहमंत्री राव गोपालसिंह पोसालिया ने शिक्षकों को सम्पूर्ण सुरक्षा कीट देने की मांग की। राव के अनुसार राजस्थान के शिक्षकों में कोरोना संक्रमण का खतरा गहरा गया है। यह वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति इस समय पलायन से रोके गए कामगारों या आइसोलेशन सेंटर  वाले स्कूल में है। सरकार के निर्देश पर यह स्कूलों में ड्यूटी तो दे रहे हैं, लेकिन इनके पास कोरोना से सुरक्षा के कोई उपाय नहीं है। बिना मास्क, दस्ताने व अन्य मूलभूत सुविधाओं के यह उन स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। उस पर स्कूलों में ड्यूटी देने के बाद यह सीधे अपने परिवार में भी लौट रहे हैं। ऐसे में परिवार सहित संकट में पड़े शिक्षकों के बचाव के साधन व बीमा सरीखी सुविधाएं उपलब्ध कराए। शिक्षकों के जोखिम को देखते हुए सरकार से अब इन्हें सुरक्षा के साधन मुहैया कराने की सख्त आवश्यकता है। महासंघ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को ज्ञापन भेजा है। जिसमें महासंघ ने ऐसे शिक्षकों व सेवा देने वाले सभी कर्मचारियों को कोरोना से बचाव के लिए सुरक्षा किट व बीमा सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। महासंघ के प्रदेश सहमंत्री राव गोपालसिंह ने बताया कि संक्रमण से बचाव अभियान में शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके लिए न बीमा का प्रावधान किया गया है, और न ही सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जो उनके साथ अन्याय व भेदभाव है। ऐसे में पुलिस व स्वास्थ्यकर्मी की तरह उन्हें भी सुरक्षा किट व बीमा सुविधा मुहैया करवाई जाए।

महासंघ के जिला अध्यक्ष दशरथ सिंह भाटी के अनुसार क्वारेंटाइन सेंटर बने स्कूलों में ड्यूटी दे रहे शिक्षकों को पीपीई किट उपलब्ध कराने के साथ उनकी ड्यूटी रोटेशन में करने, 50 लाख रुपए का बीमा करने व कोरोना संदिग्धों के बीच रह रहे शिक्षकों के सीधे घर जाने की बजाय अन्य सुरक्षित स्थान पर आवास की व्यवस्था की मांग की गई है। जिस पर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए।

कोरोना के कहर के बीच सरकारी स्कूलों में इस समय सेवाएं दे रहे शिक्षक भी उतने ही जोखिम में है, जितने स्वास्थ्यकर्मी है। ऐसे में सरकार को उन्हें भी स्वास्थ्य किट उपलब्ध कराने के साथ बीमा सुविधा मुहैया करानी चाहिए।

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