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उकलाना मंडी के कोरोना कर्मवीर डॉक्टर विपुल दिनोंदिया 3 महीने से लगातार सेवाएं दे रहें हैं।

उकलाना मंडी के कोरोना कर्मवीर डॉक्टर विपुल दिनोंदिया 3 महीने से लगातार सेवाएं दे रहें हैं। हरियाणा/भिवानी। भारत से कोरोना क...

उकलाना मंडी के कोरोना कर्मवीर डॉक्टर विपुल दिनोंदिया 3 महीने से लगातार सेवाएं दे रहें हैं।


हरियाणा/भिवानी। भारत से कोरोना को भगाने में देश का हर एक तबका जी जान से लगा हुआ हैं। ऐसा ही एक तबका हैं चिकित्सा विभाग जो हर तरह से हमें बीमारियों से बचाने में अपनी भूमिका निभाता हैं। आज लाखों की संख्या में डॉक्टरों के साथ चिकित्सा पद्धति से जुड़े अनगिनत कर्मचारियों द्वारा दिन-रात इस महामारी की जंग में दो-दो हाथ करते हुए देखा जा रहा हैं। यह धरती पर किसी भगवान से कम नहीं हैं क्योंकि डॉक्टर को भगवान के बाद दूसरा भगवान का दर्जा भी मिला हुआ हैं। आज इनको अपनी मेहनत और ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन करते हुए असंख्य बीमारियों का इलाज करते हुए हम सभी देख रहे हैं, और हम अपने आप पर गर्व भी महसूस करते हैं कि किसी भी ख़तरे से हमको डॉक्टर जरूर निकाल देंगें। हमारे परिवार में जब भी कोई सदस्य बीमार होता हैं तो हमारे दिमाग और मन मे एक ही चित्रण आता हैं, और वो हैं डॉक्टर का चित्रण क्योंकि चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोग ही देशभर के बीमार मरीजों को बीमारियों से लड़ने के लिए योद्धा बनाते हैं। इस वैश्विक महामारी के बीच हमारे हौसले के साथ निडरता के लिए चिकित्सा महकमे का ही कमाल हैं जिससे आमजन बिना भयभीत होकर इस वायरस को भगाने में और इस बला को टालने में लोगों का विश्वास बना हुआ हैं।
आज आप सभी को रूबरू करवाते हैं ऐसे ही एक डॉक्टर परिवार के डॉक्टर से जो होली के बाद से निरंतर अस्पताल में अपनी सेवाएं दें रहे हैं और परिवार से नहीं मिल पाए हैं।
हरियाणा प्रदेश के हिसार जिले के उकलाना मंडी निवासी डॉक्टर परिवार के डॉक्टर विपुल दिनोंदिया पुत्र डॉक्टर वीरेंद्र दिनोंदिया इनके दादा डॉक्टर मांगेराम दिनोंदिया भी डॉक्टर हैं कुल मिलाकर एक दर्जन से ज्यादा इनके परिवार में डॉक्टर हैं। डॉक्टर विपुल दिनोंदिया फिलहाल हरियाणा के भिवानी शहर के सिविल अस्पताल कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दिनोंदिया बताते हैं कि होली के बाद से अपने परिवार और माता-पिता से मिलना नहीं हो पाया हैं और पिछले 3 महीनों से यहाँ पर कार्यरत हैं। इनका कहना हैं कि आज के संकटग्रस्त समय मे इंसानियत के नाते परिवार से पहले मानवजाति के जीवन को बचाना जरूरी हैं इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी ड्यूटी को महत्व देना जरूर समझ रहें हैं। जल्दी ही कोरोना भारत से भागेगा और सभी सुखद मनुभूति महसूस करेंगे तब परिवार से मिलने का अलग ही आनंद आएगा।

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